BBC navigation

'विज्ञान में पाक भारत से पीछे क्यों'

 रविवार, 10 नवंबर, 2013 को 07:12 IST तक के समाचार
दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह चुनावी सर्वेक्षणों का विरोध करते हैं

ड्रोन हमले में तालिबान के नेता हकीमुल्ला महसूद की मौत और उसके कारण पटरी से उतरी बातचीत की प्रक्रिया पाकिस्तानी ऊर्दू मीडिया में लगातार सुर्खियों में बनी हुई है, जबकि भारत में जिन खबरों की खास तौर से चर्चा रही उनमें चुनावी सर्वेक्षणों पर पाबंदी की मांग और मोदी को लेकर विश्लेषण शामिल हैं.

दिल्ली समेत कई शहरों से निकलने वाले 'राष्ट्रीय सहारा' ने 'चुनावी सर्वे पर सवाल' शीर्षक से अपना संपादकीय लिखा है.

अख़बार कहता है कि कांग्रेस चुनावी सर्वेक्षणों को गुमराह करने वाली बता रही है तो विपक्षी भाजपा के मुताबिक अपने पैरों तले ज़मीन खिसकती देख कांग्रेस इनका विरोध कर रही है.

अख़बार कहता है कि चुनावी सर्वे किसके हक में है और किसके विरोध में, इस बात से हट कर भी देखा जाए तो सच्चाई यही है कि ये इन्हें वास्तविक रुझान को जानने का पैमाना नहीं माना जा सकता है, क्योंकि कई चुनाव नतीजे ओपेनियन पोल के नतीजों से उलट रही हैं.

मोदी एक बुलबुला

'हिंदुस्तान एक्प्रेस' ने पाकिस्तान की लोक गायिका रेशमा को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा 'रेशमी आवाज़ गुम हो गई'. अखबार कहता है कि अब ये आवाज़ तो गुम हो गई है, लेकिन उसके बोल बाकी रहेंगे. न सिर्फ उनके गीतों बल्कि उनके अंदाज से प्रेरणा पाने वाले अन्य गायकों के जरिए उनकी विरासत सदा हमारे बीच रहेगी.

मुंबई से छपने वाले 'उर्दू टाइम्स' ने समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव के इस बयान पर संपादकीय लिखा है कि नरेंद्र मोदी सिर्फ टीवी और गुजरात तक सीमित हैं.

"गुजरात दंगे मोदी का पीछा नहीं छोड़ेंगे. इसलिए मोदी एक बुलबुला है जिसकी हवा 2014 के चुनाव के बाद निकल जाएगी."

उर्दू टाइम्स, उर्दू अखबार

अखबार के मुताबिक बताया जाता है कि मोदी की अब तक जो छवि है वो अमरीका की एक बड़ी पब्लिक रिलेशन कंपनी एप्को वर्ल्डवाइड की देन है. इस कंपनी के 45 हजार कर्मचारी 20 देशों में काम कर रहे हैं.

हालांकि एप्को वर्ल्डवाइड का दावा है कि वो मोदी के लिए काम नहीं करती है, बस गुजरात को निवेशकों के लिए आर्कषक जगह के तौर पर पेश करना उसकी जिम्मेदारी है, लेकिन सच्चाई इससे इतर नज़र आती है.

अख़बार के अनुसार गुजरात दंगे मोदी का पीछा नहीं छोड़ेंगे. इसलिए मोदी एक बुलबुला है जिसकी हवा 2014 के चुनाव के बाद निकल जाएगी.

विज्ञान में पीछे

उधर पाकिस्तानी अख़बारों में लाहौर से छपने वाले 'नवाए वक्त' ने लिखा है कि इस बात में शक नहीं है कि पाकिस्तान को भारत के परमाणु हथियार के मुकबाले में परमाणु हथियार बनाने पड़े हैं और उसकी मिसाइलों के जवाब में पाकिस्तान ने मिसाइलें भी बनाई हैं. लेकिन पाकिस्तान वैज्ञानिक प्रगति के मामले में भारत से बहुत पीछे है.

मंगल पर भारत ने यान भेजा

मंगल पर भारत ने यान भेजा

अख़बार के अनुसार पिछले दिनों भारत ने मंगल ग्रह के लिए अपना अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया. ऐसा करने वाला वो एशिया का पहला देश है. इससे पहले भारत 2008 में चंद्रमा पर मानवरहित यान भेज चुका है. ऐसे में पाकिस्तान के लिए सिर्फ एटम बम बना कर संतोष कर लेने से काम नहीं चलेगा.

नवाए वक्त के अनुसार साइंस के क्षेत्र में अगर भारत से आगे नहीं तो कम से कम उसकी बराबरी हासिल की जानी चाहिए. इसके लिए वैज्ञानिक प्रगति के लिए पर्याप्त बजट बढ़ाने जाने की जरूरत है.

दैनिक 'आजकल' ने पिछले दिनों पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की रिहाई पर एक कार्टून बनाया है जिसमें वो किसी बच्चे की तरह कुंलांचे मारते हुए कह रहे हैं मैं आज़ाद हो गया मैं आज़ाद हो गया.

वही दैनिक 'वक्त' ने कराची के हालात को कार्टून में पेश किया है. इसमें एक व्यक्ति को कराची के तौर पर दिखाया गया जिसके हाथ पैर बंधे हैं और वो एक बड़े से बम पर बैठा है.

बहस का रुख़

दैनिक 'इंसाफ़' ने पाकिस्तान तालिबान के नेता हकीमुल्लाह महसूद की ड्रोन हमले में मौत पर लिखा है कि ये अजीब बात है कि बहस का रुख़ इस तरफ़ मोड़ दिया गया है कि क्या हकीमुल्लाह का क़त्ल मुनासिब था या नहीं या फिर उसे मार कर अमरिका ने पाकिस्तान की मदद की या नुकसान.

अखबार कहता है कि जोर इस बात पर है कि हकीमुल्लाह बहुत से बेगुनाहों का कातिल था इसलिए उसे हीरो न माना जाए, जबकि बहस तो ये होनी चाहिए कि पाकिस्तान में शांति के लिए तालिबान से बातचीत की नन्ही सी किरन को अमरीका ने बुझा दिया, आख़िर क्यों?

फ़ज़लुल्लाह

हकीमुल्लाह की मौत के बाद फज़लुल्लाह को पाकिस्तानी तालिबान का नया नेता चुना गया है

हकीमुल्लाह की मौत के बाद नाटो के लिए आपूर्ति मार्गों को बंद करने की उठ रही मांगों पर दैनिक 'पाकिस्तान' ने लिखा है कि इस बारे में विपक्ष की पार्टियों में आमराय नहीं है.

अख़बार कहता है कि नैटो की सप्लाई पाकिस्तान के रास्ते जारी रहने की एवज़ में पाकिस्तान को पर्याप्त आर्थिक मदद मिलती है और इन रास्तों को सिर्फ़ अमरीका को नुक़सान पहुंचाने के इरादे से बंद करने का मतलब है कि न सिर्फ अमरीकी मदद से हाथ धो बैठना बल्कि अमरीका से बहुत से मामलों में सहयोग बंद कर कर दुश्मनी मोल लेना.

अख़बार के अनुसार देश की भावनाएं या फिर इमरान ख़ान जैसे कुछ राजनेता की भावनाएं अपनी जगह हैं लेकिन इतने बड़े फ़ैसले करने के लिए जज़्बात की नहीं ज़मीनी वास्तविकताओं को सामने रखना पड़ता है. इसी तरह सरकार के फ़ैसले वास्तविकता के मुताबिक़ हो सकते हैं.

सड़क पर सदन

दैनिक 'खबरें' में छपी एक फोटो में कुछ लोग कुर्सियों और जिन्नाह की तस्वीर को उठा कर ले जा रहे हैं. दरअसल ये तस्वीर विपक्षी सीनेट सदस्यों की उस बैठक की है जो उन्हें संसद के बाहर सड़क पर आयोजित की.

अख़बार ने इस ख़बर को सुर्खी लगाई 'सीनेट: एक सदन पर सत्र दो, एक सदन यानी एवान में और दूसरा मैदान में'.

ये सांसद रक्षा मंत्रालय की तरफ़ से जारी इन आकड़ों का विरोध कर रहे थे कि 2008 से देश भर में हुए ड्रोन हमलों में मारे गए 2,227 लोगों में सिर्फ तीन प्रतिशत ही आम नागरिक हैं, जबकि इससे पहले सामने आए आंकड़ों और कई संगठनों के मुताबिक ये संख्या कहीं ज्यादा है.

इस मुद्दे पर 'जंग' ने अपने संपादकीय में लिखा है कि सरकार की ओर से इस तरह के जाली आकंड़े जारी होना तो उसके इस रुख के विपरीत है कि इन ड्रोन हमलों में निशाना बनने वाले ज्यादातर आम निर्दोष लोग होते हैं, ये एक बेहद गंभीर मामला है.

अख़बार के मुताबिक कई दिन की खामोशी के बाद रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने भी मानाकि ये आंकडे सही नहीं है और आने वाले दिनों में सही आंकड़े जारी किए जाएंगे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए क्लिक करें यहां क्लिक करें. आप हमें क्लिक करें फ़ेसबुक और क्लिक करें ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

इसे भी पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.