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बांग्लादेश में 150 सैनिकों को मौत की सज़ा

 मंगलवार, 5 नवंबर, 2013 को 16:12 IST तक के समाचार

बांग्लादेश की एक अदालत ने वर्ष 2009 में हुए सैनिक विद्रोह के आरोप में 150 सैनिकों को मौत की सज़ा सुनाई है. इसके साथ ही अदालत ने इस मामले में शामिल आठ सौ से अधिक सैनिक अभियुक्तों को सज़ा देने का सिलसिला शुरू कर दिया है.

राजधानी ढाका स्थित बांग्लादेशी राइफ़ल्स के मुख्यालय में हुई इस सैन्य विद्रोह की घटना में सेना के 57 अधिकारियों समेत 74 लोग मारे गए थे.

वेतन और शिकायतों को लेकर चली करीब तीस घंटों की इस बग़ावत में कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे, बाद में जिनके शव सीवर में फेंक दिए गए थे.

अदालत के इस फैसले में दोषी पाए गए सैनिकों पर हत्या, प्रताड़ित करने, साजिश और अन्य कई आरोप हैं. इन लोगों को सेना की एक अदालत में पहले ही दोषी करार दिया जा चुका है.

"अदालत के इस फैसले में दोषी पाए गए सैनिकों पर हत्या, प्रताड़ित, साजिश और अन्य कई आरोप हैं. इन लोगों को सेना की एक अदालत में पहले ही दोषी करार दिया जा चुका है"

विद्रोह के इस मामले में करीब छह हज़ार सैनिक जेल में सज़ा काट रहे हैं. यह विद्रोह बाद में देश की अन्य सैन्य छावनियों में भी फैल गया था. इसकी वजह से सरकार और सेना के बीच काफ़ी तनाव बढ़ गया था.

दूसरी ओर, ढाका के मेट्रोपॉलिटिन सत्र अदालत के न्यायाधीश मोहम्मद अख़्तरूज़्ज़माँ ने 157 सैनिकों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई. इनमें से अधिकतर बोर्डर गार्ड शामिल हैं. जबकि 271 लोगों को रिहा कर दिया गया.

इस मामले में अदालत का पूरा फ़ैसला आना अभी शेष है. डेढ़ सौ सैनिकों को मौत की सज़ा का फ़ैसला कड़ी सुरक्षा के बीच ढाका स्थित एक स्कूल परिसर में खचाखच भरे कमरे में सुनाया गया.

इस बहुचर्चित मामले में कुल 860 सैनिक शामिल हैं और इसको लेकर कई मानवाधिकार संगठन बड़े स्तर पर की जा रही कार्यवाही की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े करते रहे हैं.

सैनिक विद्रोह की यह घटना प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के पद संभालने के दो महीने बाद 25 फरवरी 2009 को हुई जब बोर्डर गार्ड बांग्लादेश के सैनिकों ने दो दिन तक अपने सैनिक अधिकारियों के ख़िलाफ़ वेतन और दूसरी शिकायतों को लेकर बग़ावत कर डाली थी.

इसके बाद बांगलादेशी सेना सरकार के उस रुख़ से ख़ासी नाराज़ थी, जिसकी वजह से उन्हें ढाका स्थित बोर्डर गार्ड के मुख्यालय पर हमला बोलने की अनुमति नहीं दी गई थी. इस बग़ावत में उनके कई कमांडर मारे गए थे.

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