अफ़ग़ानिस्तानः फ़ुटबॉल से बंधता देश

  • 6 नवंबर 2013
अफ़ग़ानिस्तान फ़ुटबॉल

अफ़ग़ानिस्तान में हाल ही में फ़ुटबॉल प्रीमियर लीग संपन्न हुई है. अफ़गान फ़ुटबॉल खिलाड़ी देश के नए आदर्श के रूप में उभरे हैं और उन्हें पता है कि उनका प्यारा खेल सिर्फ़ खेल नहीं है.

युद्ध से तबाह हो चुके इस देश को वह ऐसे लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं जिनका महत्व यहां सबसे अधिक है- एकता.

नई लीग के सह-आयुक्त शफ़ीक ग़ौरी कहते हैं, "लोगों के बीच एकता लाने का सबसे प्रबल कारक फ़ुटबॉल है."

फ़ुटबॉल की ताकत पिछले महीने तब दिखी थी जब अफ़ग़ानिस्तान की राष्ट्रीय टीम ने दक्षिण एशियाई फ़ेडरेशन कप फ़ुटबॉल में भारत को हरा दिया था.

ग़ौरी खुद भी फ़ुटबॉल खिलाड़ी रहे हैं. वह कहते हैं, "हमारे देश के इतिहास में पहली बार सभी लोग अफ़ग़ानिस्तान की जीत में शामिल हुए हैं."

रोमांच

अफ़ग़ानिस्तान के फ़ुटबॉल जगत के लिए यह थोड़ा असामान्य और अभूतपूर्व भी है.

एक ऐसा देश जो पिछले 30 साल युद्धरत रहा हो उसमें सिर्फ़ दो साल में एक नया फ़ुटबॉल स्टेडियम बन गया है. इसके साथ ही इसमें आठ टीमों की एक लीग भी शुरू हो गई है जो अक्सर देश को बांटने वाले जातियों से ऊपर है.

यह सब एक निजी टीवी चैनल टोलो पर एक रीएलिटी टीवी कार्यक्रम के साथ शुरू जिसमें खिलाड़ियों को चुना जा रहा था. इसे पैसे वाले निजी क्षेत्र का भी ज़बरदस्त समर्थन हासिल था.

शुक्रवार को उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के पांच प्रांतों के क्लब सिमोर्ग अल्बोर्ज़ फ़ाइनल मुक़ाबले में क़ाबुल के शाहीन आस्मायी क्लब से भिड़ा.

उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के पांच प्रांतों के क्लब सिमोर्ग अल्बोर्ज़, के कोच फ़ाहिम शरीफ़यार मैच से अपनी टीम से बात करते हुए कहते हैं, "हमने लंबा रास्ता तय किया है."

अफ़ग़ानिस्तान फ़ुटबॉल
राष्ट्रीय टीम की विजय से बच्चों और युवाओं में फ़ुटबॉल का आकर्षण बढ़ा है.

क़ाबुल में सुरक्षा गार्डों से अच्छी तरह से घिरे एक गेस्ट हाउस में मैं उत्तरी टीम से मिले. यहां खिलाड़ी बंक बेड्स में सोते हैं और बगीचे में लगे एक रंगीन टेंट के नीचे साथ-साथ खाना खाते हैं.

टीम के कैप्टन 27 साल के मुनीर नदीम ने मुझे बताया, "हम यह नहीं सोचते कि कोई खिलाड़ी किस प्रांत से आया है. हम भाई जैसा महसूस करते हैं और हम साथ खेलते हैं."

क़ाबुल के दूसरी हिस्से में, उनकी विरोधी टीम के खिलाड़ी पुराने गाज़ी स्टेडियम में अभ्यास कर रहे हैं. स्टेडियम को तालिबान शासन के दौरान क्रूर इस्लामिक सज़ा देने के लिए एक मंच के रूप में इस्तेमाल किया जाता था.

क़ाबुल की टीम से खेलने वाले 26 वर्षीय फ़ैज़ मुज्तबा कहते हैं, "मैं तभी से फ़ुटबॉल खेलना चाहता था जब एक किशोर के रूप में ग़ाज़ी स्टेडियम में मैच देखने आया था इसका रोमांच महसूस किया था."

नए हीरो

लेकिन फ़ैज़ तालिबान के शासन को भी नहीं भूलते हैं.

एक मैच से पहले, तालिबान एक आदमी को लाए और उसे चार बार गोली मार दी. उसके बाद दो और आदमियों को लाए और उनके हाथ काट दिए गए. उसके बाद कोई भी स्टेडियम में फ़ुटबॉल मैच नहीं देखना चाहता था."

लेकिन अब पूरे देश के साथ लीग का फ़ाइनल अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व सेनापति, राजा और तो और राष्ट्रपति हामिद करज़ई भी देख रहे हैं.

क़ाबुल में फ़ैज़ के साधारण से घर में, जहां वह अपने बड़े परिवार के साथ रहते हैं, दक्षिण एशिया चैंपियनशिप जी पर राष्ट्रपति हामिद करज़ई की राष्ट्रीय टीम को बधाई देती हुई तस्वीर प्रमुखता से लगी हुई है.

फ़ैज़ का छोटा भाई, 12 साल का सामी, अर्जेंटीना के स्ट्राइकर लियोनेल मेसी की धारीवाली टी शर्ट पहने हुए है. लेकिन अब उसकी प्रेरणा उससे भी बड़ा आदर्श बन गया है.

वह शरमाते हुए कहता है, "मैं अपने बड़े भाई की तरह ही फ़ुटबॉल खिलाड़ी बनना चाहता हूं."

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अफ़ग़ानिस्तान के नए फ़ुटबॉल हीरो नए शांतिदूत भी हैं. वह स्थानीय मीडिया के ज़रिये अफ़ग़ानिस्तान के युवाओं को नशे से दूर रहने, स्कूल जाने और तो और अगले साल के राष्ट्रपति चुनाव में वोट देने की अपील भी कर रहे हैं.

सबक

क्या अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों में लगे नेताओं के लिए फ़ुटबॉल की सफलता एक सबक है?

बड़ी मुस्कान के साथ शफ़ीक ग़ौरी कहते हैं, "यक़ीनन, इसमें टीमवर्क की, पारदर्शिता और लगातार विकास के लिए लक्ष्य-निर्धारित परियोजनाओं की ज़रूरत पड़ती है."

राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव की उम्मीद करने वाले अफ़ग़ानिस्तान के युवाओं पर अब भी कबीलों के सेनापतियों का प्रभाव है. ये युवा भी फ़ुटबॉल को बदलाव के एक प्रभावशाली हथियार के रूप में देख रहे हैं.

एक नए युवा आंदोलन, अफ़ग़ानिस्तान 1400, से जुड़े अहमद शुजा कहते हैं, "11 लोग 3.20 करोड़ लोगों को प्रेरित कर रहे थे और उनमें से किसी के भी हाथ में बंदूक नहीं थी."

वह कहते हैं, "मुझे उम्मीद है कि इस चुनाव में हमारे नेता ये बात समझेंगे कि हीरो होने के नए मायने क्या हैं."

लेकिन शुक्रवार को सिर्फ़ फ़ुटबॉल पर ही ध्यान था.

और इस फ़ाइनल मुकाबले में शाहीन आस्मायी ने सिमोर्ग अल्बोर्ज़ को 2-1 से हरा दिया.

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