कैसे ज़िंदगी में पहली बार सूरज की किरणें नसीब हुईं?

  • 30 अक्तूबर 2013
नॉर्वे
एक पहाड़ पर 17 स्क्वेयर मीटर के तीन बड़े शीशे रखे गए हैं जिससे रोशनी टकराकर शहर में पहुँचती है

नॉर्वे के युर्कान शहर को सर्दी में पहली बार सूरज की किरणें नसीब हुई हैं. और ये कमाल है पास के पहाड़ पर तीन बड़े शीशों का.

ये शहर एक गहरी घाटी में स्थित है और सर्दी के छह महीनों में घिरे हुए पहाड़ों के कारण दोपहर में भी यहाँ छाँव रहती है.

पहाड़ों पर शीशे लगाने का ख्याल लोगों को करीब सौ साल पहले आया था लेकिन इसकी तकनीक 2003 में ही उपलब्ध हो पाई.

इस शहर में सूरज के स्वागत के लिए एक बड़ी पार्टी का आयोजन किया गया है और छात्रों को सूरज की तेज़ किरणों से अपनी आंखों को बचाने के लिए चश्में दिए गए हैं.

यहां रहने वालों को कई बार केबल कार में बैठकर दोपहर में पहाड़ के ऊपर जाना पड़ता है ताकि उन्हें विटामिन डी मिल पाए, लेकिन बुधवार को सूरज की किरणें पहली बार शहर के मध्य में स्थित बाज़ार तक पहुँची.

उत्साह

और इसका कारण था कि पास के एक पहाड़ पर 17 स्क्वेयर मीटर के तीन बड़े शीशे रखे गए हैं.

जैसे ही शीशे से टकराकर सूरज की किरणें शहर के मध्य में पहुँची, लोगों ने नॉर्वे के झंडे फहराए. उनके हाथ में कॉकटेल थे और उन्होंने धूप के चश्में पहन रखे थे.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार एक स्थानीय निवास कैरिन रो ने कहा, “ये गर्मी अच्छी लग रही है. जब सप्ताह के दिनों में हमारे पास पहाड़ के ऊपर जाने का वक्त नहीं रहेगा, तब सूरज की गर्मी को अपने चेहर पर महसूस कहना बेहद अच्छा होगा.”

स्कैंडिनेविया के दूसरे इलाकों की तरह जुकान में सर्दियों के दिनों में बहुत ठंडक रहती है, लेकिन बुधवार को वहाँ तापमान सात डिग्री सेल्सियस था.

एपी के अनुसार इटली के शहर विगनेला में एक शीश है, लेकिन उसका आकार छोटा है.

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