लंदन डायरी: आ गया लाल पॉपीज़ का मौसम

  • 30 अक्तूबर 2013
 प्रधानमंत्री, पॉपी का फूल, लंदन,  डायरी, पॉपी का फूल

दुनिया के हर देश में लड़ाई में मारे गए सैनिकों को कृतज्ञता के साथ याद करने की परंपरा है, इस मामले में ब्रिटेन कोई अलग नहीं है.

पिछले कुछ दिनों से प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के कोट से लेकर, लंदन की टैक्सियों तक पर लाल रंग के काग़ज़ के फूल हर जगह दिखाई देते हैं, यह लड़ाई के मैदान में मारे गए सैनिकों की याद में पहने जाते हैं और इन्हें रेड पॉपीज़ कहा जाता है.

आम तौर पर रेड पॉपी हर जगह मिल जाती है जिसे लोग ख़रीदकर पहनते हैं और इससे मिलने वाला पैसा ब्रितानी सैनिकों के कल्याण के लिए ख़र्च किया जाता है, पिछले साल इस तरीक़े से तीन करोड़ पाउंड यानी लगभग तीन सौ करोड़ रुपए जुटाए गए.

इतने बड़े पैमाने पर लाल फूल पहने जाने की कहानी के पीछे एक कविता है.

लंदन की पत्रिका 'पंच' में पहले महायुद्ध के दौरान 1915 में कनाडा के एक फौजी डॉक्टर लेफ़्टिनेंट कर्नल जॉन मैकक्रे की कविता 'इन फ्लांडर्स फ़ील्ड' प्रकाशित हुई जिसमें उन्होंने लिखा था कि किस तरह लड़ाई में मारे गए उनके साथियों की सामूहिक कब्रों पर लाल रंग के फूल खिल उठे हैं.

 प्रधानमंत्री, पॉपी का फूल, लंदन,  डायरी, पॉपी का फूल

इसके बाद मोनिका माइकल नाम की एक अमरीकी महिला ने जॉन मैकक्रे की कविता से प्रभावित होकर मारे गए सैनिकों की याद में अपने कोट पर लाल फूल पहनना शुरू कर दिया. पाँच वर्षों के भीतर पॉपी, युद्ध में मारे गए सैनिकों की याद का प्रतीक बन गया, अमरीका-कनाडा से होते हुए 1920 में कागज़ के लाल फूल ब्रिटेन पहुँच गए.

ये लाल फूल आम तौर पर गोरे ब्रितानियों के कोट पर ही दिखाई देते हैं, ज़िम्मेदारी के सरकारी पदों पर बैठे लोग, टीवी के प्रेजेंटर, रिपोर्टर से लेकर खिलाड़ी तक पंद्रह दिनों के लिए हर रोज़ इसे पहनना नहीं भूलते लेकिन मेरे जैसे आप्रवासी लोगों के कोट पर यह कम ही नज़र आता है.

मैंने लाल फूल पहने भारतीय दिखने वाले एक व्यक्ति से पूछा था कि यह तो ब्रितानी सैनिकों की याद में पहना जाता है, आप तो भारतीय लगते हैं? मुझे थोड़ी देर घूरने के बाद उन्होंने कहा कि क्या पहले और दूसरे विश्व युद्ध में ब्रितानी सैनिकों के साथ भारतीय सैनिक नहीं मारे गए थे?

इसी तरह एक बार मेरे पूछे बिना टीवी देख रहे एक अँगरेज़ ने कहा, 'आई रियली हेट इट...', उनका कहना था कि साम्राज्यवादी ताक़तों की लड़ाइयों को ग्लोरिफ़ाई यानी महिमामंडित करने का काम करते हैं ये पॉपीज़.

ज़ाहिर है, हर तरह की सोच वाले लोग किसी भी लोकतांत्रिक समाज में मौजूद होते हैं.

 प्रधानमंत्री, पॉपी का फूल, लंदन,  डायरी, पॉपी का फूल

स्कॉटलैंड में दो-तीन साल पहले तय किया गया कि एक फुटबॉल मैच में दोनों टीमों के खिलाड़ी अपने टी-शर्ट पर पॉपी पहनेंगे, मैच के दौरान किसी ने एक बैनर लहराया, जिस पर लिखा था- 'हम स्कॉटलैंड के लोग ब्रितानी सैनिकों को अपना हीरो नहीं मानते'.

बहुत सारे ब्रितानी ऐसे हैं जो मानते हैं कि इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान जैसी लड़ाइयों में मारे गए सैनिकों का कोई कसूर नहीं लेकिन पॉपी पहनकर हम कहीं न कहीं उन राजनीतिक भूलों को समर्थन दे रहे होते हैं जिनकी वजह से इतनी जानें गईं.

मैं पॉपी एक बिल्कुल दूसरे कारणों से नहीं पहनता, पहला मैं शायद ही कभी कोट पहनता हूँ, पॉपी पहनना मुझे इसलिए अटपटा लगता है मानो मैं अँगरेज़ों की नक़ल कर रहा हूँ, इसके अलावा ये भी कि यह लड़ाई में मारे गए आम लोगों को याद करने के लिए नहीं है, उनकी याद में फूल पहनने का चलन हो तो मैं सोच सकता हूँ.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)