क्या एक सॉफ़्टवेयर से रोकी जा सकती है भगदड़?

  • 24 अक्तूबर 2013

सबसे ज़्यादा क्रूर और बेमतलब की मौत हो सकती है भीड़ में कुचलकर मर जाना लेकिन 21वीं सदी में भी इस तरह की मौतें हो रही हैं.

हाल ही में भारत में एक हिंदू त्यौहार के मौक़े पर मची भगदड़ में 115 लोग दुःखद हादसे में मारे गए.

इस पर पैदा हुआ दुःख जल्द ही ग़ुस्से में बदल गया क्योंकि मीडिया में इस तरह की ख़बरें आईं कि भीड़ का बेहतर प्रबंधन करके इस दुर्घटना को टाला जा सकता था.

सवाल ये है कि क्या तकनीक के इस्तेमाल से इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है?

हज यात्रा के लिए आयोजक अब भीड़ पर नज़र रखने के लिए एक सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं.

इसकी मदद से ना सिर्फ़ भीड़ में हो रही हरकतों का पता रहता है बल्कि यह भी पता चल सकता है कि कहाँ क्षमता से ज़्यादा लोगों के जुटने की आशंका है.

लाइव फ़ीड यानी किसी स्थान का सीधा वीडियो एक बड़े ऑपरेशन रूम में दिखता है, जिनका विश्लेषण सेना, पुलिस और भीड़ नियंत्रक करते हैं. ये सॉफ़्टवेयर भीड़ के आकार, उनके फैलाव और दिशा के बारे में सटीक डाटा तुरंत देता है.

इस तकनीक को विकसित करने वाली संस्था क्राउड विज़न की सह-संस्थापक फ़िओना स्ट्रेंस कहती हैं, ''भीड़ ख़तरनाक साबित हो सकती है. भीड़ में कुचलने, भगदड़ मचने और निकलने में असमर्थता का इतिहास पुराना है फिर चाहे वो भीड़ के किसी हिस्से ने अस्थिरता फैलाई हो, प्राकृतिक आपदा हो या फिर भीड़ नियंत्रकों की ग़लतफ़हमी की वजह से हो. यह तकनीक भीड़ के व्यवहार के बारे में जानकारी देती है जिससे संकेत मिलता है कि ज़्यादा संख्याबल, दबाव या गड़बड़ होने की संभावना कहां है. ''

चूंकि हज में बहुत बड़ी संख्या में लोग होते हैं, इसका इतिहास दुखद रहा है औऱ पिछले सालों के दौरान हज़ारों लोगों की जान जा चुकी है.

सबसे बुरी घटनाओं में से एक थी साल 2006 की भगदड़ जिसमें हज के आख़िरी दिन 346 लोगों की जान गई और 200 घायल हो गए.

भीड़ का व्यवहार

मक्का में तकनीक के इस्तेमाल से प्रशासन ने भगदड़ पर क़ाबू पाया है

अपने पीएचडी शोध के तहत क्राउड विज़न के सह संस्थापक डॉक्टर ऐंडर्स जोहैंसन ने 2006 में मची भगदड़ से पहले और बाद में सीसीटीवी कैमरे की फ़ुटेज का अध्ययन किया. इससे पता चला कि भीड़ का निश्चित व्यवहार था जिसे अगर पहले से समझा जाता तो हादसा रोका जा सकता था.

साल 2007 से ये प्रणाली मक्का में लगाई गई और तब से हर साल इसके ज़रिए भीड़ का नियंत्रण किया जा रहा है और तब से किसी हादसे या मौत की ख़बर नहीं है. हालांकि स्ट्रेंस ये नहीं मानतीं कि यह पूरी तरह से तकनीक पर निर्भर है.

वह कहती हैं, ''हाल के वर्षों में मक्का प्रशासन ने हाजियों की सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचे, योजना और तकनीक को बेहतर बनाया है लेकिन हम त्वरित आंकड़े और जानकारी देने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं ताकि फ़ैसले लेने में मदद मिल सके.''

सऊदी प्रशासन अपने तकनीकी सहयोगी को पाकर काफ़ी ख़ुश है. शहरी और ग्रामीण मामलों के मंत्रालय में भीड़ प्रबंधन विशेषज्ञ डॉक्टर सलीम अल बोस्ता कहते हैं कि भीड़ का सजीव विश्लेषण यात्रियों की सुरक्षा बेहतर बनाता है.

हालांकि 2001 से 2005 हज यात्रा के लिए विशेष सलाहकार रहे वैज्ञानिक कीथ स्टिल इस बात पर को लेकर शंकित हैं कि इन जगहों पर तकनीक का कितना इस्तेमाल मदद कर सकता है. उन्होंने बीबीसी से कहा, ''किसी भी तकनीक को भीड़ प्रबंधन योजना के साथ ही इस्तेमाल किया जा सकता है.''

उन्हें इस बात पर भी भरोसा नहीं है कि क्राउड विज़न की तकनीक 'लाइव' स्थिति में काम कर सकती है. वह कहते हैं, ''ये भीड़ में पैदा हुई हलचल का पता लगा सकती है लेकिन अगर ऐसी हलचल हो रही है तो आप पहले से ही उस परिस्थिति पर पहुंच चुके हैं जहां लोग कुचले जा सकते हैं या गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं. जो भी नियंत्रण कर रहा है वह तो बुनियादी तौर पर स्थिति पर अपना क़ाबू खो चुका है. ये एक बेकार की कसरत बन सकती है.''

कीथ मानते हैं कि क्राउड विज़न की तकनीक सिर्फ़ भीड़ की संख्या मापने के काम आ सकती है. ''अगर आप क्षमता नापना चाहते हैं तो ये बढ़िया है लेकिन जोखिम प्रबंधन प्रणाली बनने में इसे अभी वक्त लगेगा.''

भीड़ और प्रदर्शन

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर पूरी तरह से सहमति नहीं है.

दुनिया भर के शहरों में जनसंख्या बढ़ती जा रही है. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि साल 2050 तक दुनिया भर की कुल जनसंख्या का 70 फ़ीसदी शहरों में होगा और लोग ज़्यादा वक्त भीड़ में बिताएंगे.

संगीत और खेल कार्यक्रमों में भीड़ तो आम बात है लेकिन सोशल मीडिया और स्मार्टफ़ोन तकनीक ने भीड़ के प्रदर्शनों को भी आम बना दिया है. विश्लेषक जो डिगनैन कहते हैं कि आने वाले दिनों में भीड़ नियंत्रक तकनीक बहुत अहम होने जा रही है.

भीड़ भले ही प्रदर्शन के लिए इकट्ठी हो, पार्टी के लिए या फिर मनोरंजन के लिए. परिस्थितियां कभी भी ख़राब हो सकती हैं.

क्राउड विज़न ने एक बहुमंज़िला इमारत से लोगों को निकाले जाने की रिहर्सल के समय पैदा हुई ख़तरनाक स्थितियों का हीट मैप बनाया है जिससे ये पता चलता है कि अगर भीड़ आराम से निकल रही हो तब भी कैसे ख़तरे के मौक़े पैदा हो सकते हैं.

मैप ने ये दिखाया कि जब भीड़ दोबारा बिल्डिंग में घुस रही थी तो कैसे ख़तरनाक तरह से पंक्तियां बनने लगीं. किसी संगीत कार्यक्रम में सबसे बड़ी ग़लती हो सकती हैं भीड़ प्रबंधकों को आगे खड़ा करना.

क्राउड विज़न की फ़िऔना स्ट्रेंस कहती हैं कि मैप से पता चलता है कि समस्याएं दरअसल भीड़ के बीच से शुरू होती हैं. अगर नियंत्रकों के पास उस वक्त की सूचना हो तो वो तुरंत पता लगा सकते हैं कि उनकी ज़रूरत कहां पर है.

इस तरह की बातें शायद मध्य प्रदेश के लिए वास्तविक साबित ना हों जहां हाल ही में भगदड़ हुई थी. जिस पुल से भीड़ गुज़र रही थी उसके गिरने की अफ़वाह फैली और अफ़रा-तफ़री मच गई जबकि ये पुल सात साल पहले हुए एक हादसे की वजह से ही बनाया गया था जब लोग नदी पार करते वक्त मारे गए थे.

प्रोफ़ेसर कीथ स्टिल मानते हैं कि तकनीक मदद भले ही कर सकती है लेकिन ये हल का एक हिस्सा हो सकती है. 'इससे बचने का सबसे बेहतर तरीक़ा है भीड़ की सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाना.'

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