पाकिस्तानी अपनी इज़्ज़त कब करेंगे?

  • 16 अक्तूबर 2013
पाकिस्तान
पश्चिम देशों से पाकिस्तान के रिश्ते हमेशा द्वंद्व का शिकार रहे हैं

अल्लामा! कुछ देर के लिए ये मान लेने में क्या हर्ज़ है कि दुनिया को पाकिस्तान में कुछ अच्छा नज़र नहीं आता है और सब के सब इस ताक में रहते हैं कि कब यहां से कोई बुरी ख़बर आए और कब एक नया ढिंढोरा पीटने का बहाना मिले.

पाकिस्तान अब से नहीं, बल्कि अपनी पैदाइश से ही विरोधियों के दिलों में कांटे की तरह चुभ रहा है. हालांकि पाकिस्तानियों ने ऐसा कुछ नहीं किया है जिसकी उन्हें इस तरह सज़ा मिले.

अब इसमें पाकिस्तान का क्या क़सूर है कि उसे अफ़ग़ानिस्तान, ईरान और भारत जैसे पड़ोसी मिले हैं जो बराबर पाकिस्तान के बारे में बात बेबात संदेह करते रहते हैं.

अगर पाकिस्तान इतना ही बुरा है तो चीन से पाकिस्तान के रिश्ते आख़िर क्यों इतने अच्छे रहे हैं? जबकि दोनों की न तो भाषा मिलती है और न ही इतिहास, न भूगोल और न ही नस्ल, न तहज़ीब. कुछ भी तो साझा नहीं. फिर आख़िर क्यों इन दोनों पड़ोसी देशों की दोस्ती की मिसालें दी जाती हैं.

इस पर अल्लामा अल्लाह रखा अंजुम ने एक आंख दबाकर मुस्कराते हुए पान की पीक थूकी. कहने लगे शुक्र करें कि चीन में न तो शिया बहुसंख्यक हैं और न ही पाकिस्तान और चीन के बीच कोई डूरंड लाइन (पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच की सीमा) है.

और न ही पाकिस्तान 1947 में चीन से अलग हुआ और न ही जब शिनचियांग में चीनी सैनिक दाख़िल हुए थो तो कश्मीर की तरह पाकिस्तान का इस तरह का दावा था, वरना चीन ताइवान की बजाय पाकिस्तान पर दांत रखे हुए होता. और आपके लीडर भारत के साथ जाम टकराते हुए हिमालय से बुलंद और समंदर से गहरी दोस्ती का दावा कर रहे होते.

अमरीका और पाकिस्तान

मगर अल्लामा बात इतनी सादा नहीं है. जिन देशों की सीमाएं पाकिस्तान से नहीं लगती हैं, उन्हें भी तो पाकिस्तान एक आंख नहीं भाता.

पाकिस्तान, हथियार
अकसर ये आशंका जताई जाती है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार चरमपंथियों के हाथों में जा सकते हैं

अब अमरीका को ही ले लें. पाकिस्तान ने हमेशा अपनी इज़्ज़त दांव पर लगा कर अमरीका का साथ दिया है, लेकिन अमरीका ने हमेशा पाकिस्तान को दो टके का बेचारा समझा है.

ख़ुद पाकिस्तान में जासूसी के अड्ड़े ले लिए लेकिन जब पाकिस्तान को साल 1965 में हथियारों की ज़रूरत थी, तो हथियार देने बंद कर दिए थे. साल 1971 में जब पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए थे तो सातवां बेड़ा बंगाल की खाड़ी में महज़ डीज़ल फूंकता रहा.

पाकिस्तान को जब परमाणु तकनीक की ज़रूरत पड़ी तो अमरीका सबसे बड़ा विलेन बन कर खड़ा हो गया था. जैसे ही अफ़ग़ानिस्तान से सोवियत फौजें वापस गईं तो पाकिस्तान को अपने हितों के दूध से मक्खी की तरह निकाल फेंका.

और फिर अफ़ग़ानिस्तान से तालिबान को निकालने की ज़रूरत पड़ी तो पाकिस्तान को खुशामद, धौंस और आर्थिक मदद की गाजर दिखाकर अपने साथ कर लिया.

इसके बावजूद अमरीका और उसके सहयोगियों को पाकिस्तान चरमपंथियों की पनाहगाह नज़र आता है. वो पाकिस्तान को एक जूता ड्रोन का मारता है और फिर तशरीफ़ पर आर्थिक मदद का मरहम लगा कर एक और ड्रोन का जूता मार देता है.

और अब पूरे 18 करोड़ लोगों में उसे सिर्फ़ एक मलाला ही मिली है जिसे अमरीकी और उसके पश्चिमी दरबारी उठाए उठाए घूम रहे हैं. अगर मलाला का नाम आफ़िया सिद्दीकी होता तो क्या पश्चिमी जगत फिर भी ऐसा ही करता?

गरीब के दर पर हाथी

अल्लामा अल्लाह रखा अंजुम ने दूसरी बार पीक थूकते हुए कि सीधी तरह कहो कि ये सब फिज़ूल बातें तुम इसलिए कर रहे हो कि मुझे पान का आनंद नहीं लेने दोगे. तुमने वो मुहावरा तो सुना ही होगा कि जब बाई जी कोठे पर बैठ गई हैं तो फिर क्या इज़्ज़त और कैसी बेइज़्ज़ती? हाथ भी फैलाना और नखरे और ग़ैरत भी दिखाना.

चलो मान लेते हैं कि दूसरे तुम्हारी इज़्ज़त नहीं करते हैं लेकिन तुम अपनी इज़्ज़त कितनी करते हो. तुमने जिन्ना की कितनी इज़्ज़त की? बस यही ना कि उन्हें नोटों पर छाप दिया और इनकी तस्वीर दफ़्तरों में लगाकर हर वो काम किया जिसे सख़्ती से मना किया गया था.

तुमने हुसैन शहीद सुहरावर्दी की कितनी इज़्ज़त की? उन्हें पहले तो प्रधानमंत्री बनाया और फिर गद्दार बना दिया. बंगालियों को कितनी इज्ज़त दी कि सात हजार साल पुराने मानवीय इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि बहुसंख्यक लोग अल्पसंख्यकों से तंग आकर भाग गए. न जाने तुम्हें इस कारनामे पर नोबेल पुरस्कार क्यों नहीं मिला?

और अब बलोचों का बंगालियों से भी ज़्यादा सम्मान हो रहा है. मियां सत्तर लाख बलोच तो तुमसे संभल नहीं रहे हैं और तुमने ठेका उठा रखा है कश्मीर का, अफ़ग़ानिस्तान का, फ़लस्तीनीयों का, बर्मा के मुसलमानों का, मिस्र के लोगों का, सीरिया के लोगों का और ख़ुद को कहते हैं मुस्लिम दुनिया का एटमी किला. ये एटम बम नहीं, बल्कि ग़रीब के दर बंधा हुआ हाथी है जिसके गन्ने तो पूरे नहीं हो रहे हैं तुमसे.

एटम बम अपनी हिफ़ाज़त के लिए बनाया था ना? अब इसकी हिफाज़त के लाले पड़े हैं. ये बताओ सऊदी अरब में कितने पाकिस्तानियों के सिर कलम हुए? कभी किसी सऊदी को पाकिस्तान की किसी जेल में एक साल तो बंद करके दिखाओ.

मलाला बाहर क्यों?

और खबरदार मुझे आइंदा मलाला और आफ़िया का राग ना सुनाना. चलो चौधरी ज़फ़रउल्लाह तो कादियानी थे तुमसे इज़्ज़त न की गई तो अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत उठा कर ले गई, लेकिन संगीत सम्राट बड़े गुलाम अली ख़ान तो कादयानी नहीं थे. उन्हें क्यों पाकिस्तान आकर वापस भारत जाना पड़ा.

मलाला यूसुफजई
तालिबान के हमले में शिकार होने वाली मलाला आजकल ब्रिटेन में रह रही हैं

लेखिका कुर्रतुलैन हैदर तो ईसाई नहीं थीं, फिर उन्हें क्यों नौ साल बाद ये ज़मीन आग का दरिया महसूस होने लगी. जोश तो नेहरू का हाथ झटक कर यहां आए थे. आखिर में फ़कीर होकर क्यों मरे?

फैज़ साब तो कहीं से नहीं आए थे ना? वो क्यों मॉस्को, बेरुत और लंदन में रहने को मजबूर कर दिए गए? हां, भुट्टो को फंदे की शक्ल का निशान-ए-पाकिस्तान दिया गया और उनकी बेटी को गोली की शक्ल में हिलाल-ए-जरात.

और क्या दुनिया ने तुम्हें भौतिकी का नोबेल पुरस्कार देकर सम्मान देने की कोशिश नहीं की थी? और तुमने उस नोबेल पुरस्कार विजेता की कब्र की तख़्ती पर ही कालिख फेर दी.

आफ़िया को अमरीका के हाथों में किसने दिया ? इसराइली की खुफिया एजेंसी मोसाद या भारत की रॉ ने?

मलाला अगर वाकई तुम्हारी बेटी या इज़्ज़त है तो फिर मलाला पाकिस्तान से बाहर क्यों है? वो तो आफ़िया की तरह क़ैद में नहीं हैं, क्या अजब बात है? जो क़ैद में है वो भी पश्चिमी जगत की क़ैद में है और जो आज़ाद है वो भी पश्चिमी जगत की क़ैद में आज़ाद है.

चैन से पान खा लूं?

और तेरह चौदह बरस की वो बच्ची जिसे अपने दस्तखत भी नहीं आते. वो भी जब अदालत से ईशनिंदा के ओरोपों से बरी हुई तो उसे भी जान बचाने के लिए पश्चिम की तरफ़ ही भागना पड़ा. और उस पर झूठा आरोप लगाने वाला उन्हीं गलियों में हार पहने घूमता है.

और हां, याद आया तुम्हारा वो शासक जो सीने पर हाथ मार कर कहता था कि हां, मैंने सीआईए को पाकिस्तान बेचा है और दूसरी सांस में कहता था कि रेप इसलिए हो रहे हैं ताकि पश्चिमी देशों में शरण लेने में आसानी हो.

शायद इसलिए तुम अपनी आंख पर सौ फीसदी और पश्चिम जगत में खोजे गए डीएनए टेस्ट पर बिल्कुल यकीन नहीं रखते. मगर चांद दिखाने के लिए तुम्हें पश्चिमी जगत में बनी दूरबीनों पर अपनी आंखों से ज्यादा और मिखाइल क्लाशनिकोव की बनाई बंदूक पर तुम्हें अपने हाथों से भी ज़्यादा यक़ीन है.

लेकिन अल्लामा फिर भी कोई तो वजह होगी कि पाकिस्तानियों को पूरी दुनिया इतनी पाकिस्तान विरोधी महसूस होती है. सोमालिया, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, तुर्की या मिस्र के लोगों को इतनी शिकायत क्यों नहीं है?

अल्लामा अल्लाह रखा अंजुम ने अपनी ऐनक उतार कर आंख मलते हुए कहा कि शायद ये सब देश ख़ुद पर विश्वास रखते हैं और अपनी कुछ न कुछ इज़्ज़त खुद भी करते हैं, इसीलिए दूसरे भी उन्हें थोड़ी बहुत इज़्ज़त देने को मजबूर हैं.

हो गई तसल्ली आपकी? अब मैं चैन से पान खा लूं?

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