असद ने दिया संकेत, जर्मनी करेगा मध्यस्थता

  • 6 अक्तूबर 2013

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ने यह संभावना जताई है कि उनके देश में 30 महीने से चले आ रहे गृहयुद्ध को ख़त्म करने के लिए जर्मनी मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है.

जर्मनी की डेयर श्पीगल पत्रिका से बातचीत करते हुए असद ने कहा, "अगर जर्मनी के राजदूत यहां आते हैं तो उन्हें बेहद ख़ुशी होगी."

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दमिश्क विद्रोहियों से तब तक बातचीत नहीं करेगा जब तक कि वे अपने हथियार नहीं छोड़ देते.

असद ने उन दावों को फिर से सिरे से ख़ारिज किया कि उनकी सेना ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था. बल्कि उन्होंने ऐसे हथियारों का इस्तेमाल करने का आरोप विद्रोहियों पर लगाया.

सोमवार को प्रकाशित हुए साक्षात्कार में असद ने कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के पास ऐसे कोई सबूत नहीं हैं कि दमिश्क ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था.

उन्होंने कहा, "उनके पास झूठ कहने के अलावा कुछ और नहीं है."

मॉस्को के साथ वॉशिंगटन की बनी सहमति से इतर उन्होंने रूस को 'सच्चा दोस्त' बताया.

'कई सवाल'

विशेषज्ञों की एक टीम को सीरिया के रासायनिक हथियारों को नष्ट करने की ज़िम्मेदारी सौंपे जाने के कुछ दिन बाद ही यह साक्षात्कार आया है.

इस टीम ने सरकारी अधिकारियों से बातचीत के बाद कहा था कि इस प्रक्रिया में काफी उत्साहजनक प्रगति है.

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) समर्थित रासायनिक हथियार निषेध संगठन (ओपीसीडब्ल्यू) के विशेषज्ञों की टीम ने कहा कि सीरिया ने पिछले बुधवार को दस्तावेज़ सौंपे जो काफी आशाजनक लग रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र की टीम
सीरिया में संयुक्त राष्ट्र की एक टीम हथियारों की जांच प्रक्रिया में जुट चुकी है.

टीम ने कहा कि तकनीकी रेखाचित्रों का विश्लेषण ज़रूरी होगा और अभी कई सवालों के जवाब मिलने बाक़ी हैं.

अगले हफ्ते साइट पर निगरानी और हथियारों को ख़त्म करने की योजना तय की गई है.

पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद ने सीरिया के रासायनिक हथियारों को नष्ट करने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया.

यह प्रस्ताव उस मसौदे पर आधारित था जिसके लिए अमरीका और रूस पहले ही जेनेवा में हामी भर चुके थे.

21 अगस्त को दमिश्क के बाहरी इलाके में मौजूद गूटा में हुए कथित रासायनिक हमले के बाद अमरीका ने सीरिया पर सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी.

अमरीकियों ने कहा कि 1,400 से ज़्यादा लोग मारे गए. रूस और सीरिया ने इस हमले के लिए विद्रोही गुटों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

ऐसा माना जाता है कि सीरिया में ऐसे दर्जनों ठिकाने हैं जहां 1,000 टन से ज़्यादा जहरीली गैस रखी गई है.

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