पाकिस्तान: नए फ़ौजी कमांडरों की तलाश

  • 3 अक्तूबर 2013
पाकिस्तान, सेना, फ़ौज, नियुक्तियां, आर्मी चीफ़, सेना प्रमुख, नवाज़ शरीफ़

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ जल्द ही ज्वाइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ कमेटी यानी जेसीएससी के नए चेयरमैन के नाम की घोषणा करने वाले हैं.

नए चेयरमैन जनरल ख़ालिद शमीम वाइन की जगह लेंगे जो छह अक्तूबर को रिटायर हो रहे हैं.

हालांकि जेसीएससी चेयरमैन का पद औपचारिक भर है, पर इसके ऐलान का सीधा असर मौजूदा सेना प्रमुख जनरल अशफ़ाक़ कयानी के उत्तराधिकारी के चुनाव पर पड़ेगा, जो 28 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

नवाज़ शरीफ़ के पास रक्षा मंत्रालय का पदभार भी है पर उन्होंने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं.

संकेत मिल रहे हैं कि वे वरिष्ठता के सिद्धांत का पालन करेंगे लेकिन पाकिस्तानी मीडिया ने अभी से फ़ौज के नए नेतृत्व के बारे में क़यास लगाने शुरू कर दिए हैं.

सीन-एक

परंपरागत तौर पर जेसीएससी दफ़्तर का कामकाज तीनों फ़ौजों के अफ़सर अपनी-अपनी बारी से संभालते रहे हैं.

पाकिस्तानी सेना में यह पद नौ नवंबर 1997 से है, जब पूर्व एयर चीफ़ फ़ारुक़ फ़िरोज़ ख़ान ने अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा किया था, क्योंकि कमेटी के सभी छह चेयरमैन फ़ौज से ही थे.

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अगर नवाज़ शरीफ़ जेसीएससी में रोटेशन यानी बारी का सिद्धांत लागू करना चाहते हैं, तो यह पद मौजूदा चीफ़ ऑफ़ नेवल स्टाफ़ एडमिरल मोहम्मद आसिफ़ सांडीला को मिल सकता है.

जेसीएससी के चेयरमैन होने के नाते वे दोनों पदों पर भी रह सकते हैं, जैसा इस पद पर रहे अब तक के इकलौते नेवी चीफ़ एडमिरल इफ़्तिखार अहमद सिरोही ने 1988 में किया था, जब उन्हें जेसीएससी का चेयरमैन बनाया गया था. या फिर वाइस चीफ़ ऑफ़ नेवल स्टाफ़ वाइस एडमिरल मोहम्मद ज़काउल्लाह को नेवी चीफ़ बनाया जा सकता है.

अगर ये हालात रहे तो इससे साफ़ हो जाएगा कि कयानी के बाद सबसे वरिष्ठ जनरल हारुन असलम अगले सेना प्रमुख होंगे.

लेफ़्टिनेंट जनरल हारुन असलम इस वक़्त रावलपिंडी में मौजूद सेना मुख्यालय में चीफ़ ऑफ़ लॉजिस्टिक्स स्टाफ़ हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उनका करियर शानदार रहा है. कहा जाता है कि उन्होंने 2010 में लेफ़्टिनेंट जनरल बनने के बाद बहावलपुर कोर की कमान भी संभाली. इससे पहले उन्होंने 2009 में राह-ए-रास्त ऑपरेशन में हिस्सा लिया था जिसे सेना ने तालिबान चरमपंथियों के ख़िलाफ़ स्वात घाटी में चलाया था.

उन्होंने सेना के स्पेशल सर्विसेज़ ग्रुप की अध्यक्षता भी की, जो फ़ौज की कमांडो विंग है और वे डायरेक्टर जनरल ऑफ़ मिलिट्री ऑपरेशंस यानी डीजीएमओ भी रहे हैं.

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जंग अख़बार की वेबसाइट पर एक अक्तूबर को छपी एक रिपोर्ट के अनुसार नेवल चीफ़ एडमिरल मोहम्मद आसिफ़ सांडीला, हारुन असलम और पाकिस्तान एयरफ़ोर्स के मौजूदा प्रमुख ताहिर रफ़ीक़ के नाम दिए गए हैं. ये नाम रक्षा मंत्रालय की तरफ़ से जेसीएससी चेयरमैन के लिए रखे गए हैं. ऐसे में इस समीकरण को विश्वसनीयता हासिल होती है.

सीन–दो

हालांकि यह किसी ऐसे फ़ौजी नेतृत्व के लिए आदर्श स्थिति नहीं होगी जो फ़ौज के कार्यकलापों में किसी भी सियासी नेता के लिए फ़ैसलों को नापसंद करता है.

फ़ौजी अफ़सरों के साथ शरीफ़ के सीधे ताल्लुक़ात और फ़ौज की नज़र में उनके कार्यकलापों में दख़ल वो विवाद था जिसकी वजह से उनकी सरकार के ख़िलाफ़ 12 अक्तूबर 1999 में तख्तापलट हुआ था.

ऐसे में अगर फ़ौजी नेतृत्व की चलती है और ख़ाली पदों को लेकर फ़ैसले फ़ौज पर छोड़ दिए जाते हैं तो हारुन असलम जेसीएससी के अगले चेयरमैन के बतौर पदोन्नत किए जाएंगे और वरिष्ठता के क्रम में लेफ़्टिनेंट जनरल राशिद मसूद अगले चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़ बनेंगे और 28 नवंबर को जनरल कयानी की जगह लेंगे.

पाकिस्तानी मीडिया के एक हिस्से में इस पहलू को भी उठाया गया है. नवा-ए-वक़्त ग्रुप के अंग्रेज़ी अख़बार द नेशन में छपी एक ख़बर के मुताबिक़ जेसीएससी चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर रक्षा मंत्रालय की तरफ़ से भेजे गए नामों की सूची में लेफ़्टिनेंट जनरल हारुन असलम, लेफ़्टिनेंट जनरल राशिद महमूद और लेफ़्टिनेंट जनरल राहिल शरीफ़ तीन संभावित दावेदार हैं.

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इसलिए अगर हारुन असलम को जेसीएससी चेयरमैन चुना जाता है तो इसके बाद राशिद महमूद के लिए अगले सेना प्रमुख का रास्ता साफ़ हो जाएगा.

इस बात के पुख़्ता सुबूत हैं कि जनरल राशिद महमूद इस पद के लिए संभावित उम्मीदवारों में है.

इस साल की शुरुआत में महमूद को जनरल कयानी ने नए चीफ़ ऑफ़ जनरल स्टाफ़ के बतौर नामज़द किया था, जिसे पाकिस्तानी फ़ौज में बेहद अहम पद माना जाता है. वे लाहौर के कोर कमांडर भी रह चुके हैं.

ऐसे में इस वक़्त हेडक्वार्टर में तैनात इंस्पेक्टर जनरल ट्रेनिंग एंड इवेल्युएशन लेफ़्टिनेंट जनरल राहिल शरीफ़ को अगले वाइस चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़ का दावेदार माना जा सकता है. यह पद जनरल कयानी के सेना प्रमुख बनने से पहले ही मौजूद था.

एक और सीन

पाकिस्तानी मीडिया में एक और नज़रिए पर बहस जारी है. इसके मुताबिक़ फ़ौजी तैनातियों का मुद्दा न तो फ़ौज के हवाले किया जाएगा और न ही वरिष्ठता के सिद्धांत पर फ़ैसला होगा. इसके बजाय इस नज़रिए के मुताबिक़ इस मसले पर फ़ैसला योग्यता के आधार पर लिया जाएगा और इसमें अहम चीज़ होगी सेना की ज़रूरतें.

डेली टाइम्स में एक अक्तूबर को छपे एक लेख के मुताबिक़ देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे ऑपरेशंस की मांग को देखते हुए जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कयानी को नई बनी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का स्थायी सदस्य बनाया जा सकता है और जनरल राशिद महमूद को जनरल हारुन असलम से ऊपर जेसीएससी चेयरमैन के पद पर पदोन्नत किया जा सकता है.

इसी सोच का दूसरा हिस्सा यह है कि जनरल राहिल शरीफ़ को भी नज़रंदाज़ करते हुए जनरल मुहम्मद तारिक़ ख़ान को सेना प्रमुख नियुक्त करने के लिए रास्ता बनाया जा सकता है जो इस वक़्त मांगला के कोर कमांडर हैं.

जनरल तारिक़ ख़ान ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत से हैं और पैरामिलिट्री फ़्रंटियर कॉन्स्टेबुलेरी के प्रमुख रहे हैं.

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