लंदन की सड़कों के नीचे रोमन नरमुंडों का ढेर

  • 4 अक्तूबर 2013
रोमन खोपड़ी, क्रॉसरेल प्रोजेक्ट, लंदन, ब्रिटेन, पुरातत्व

लंदन की क्रॉसरेल परियोजना के दौरान रोमन काल की 20 खोपड़ियां बरामद हुई हैं.

पुरातत्वविदों का मानना है कि ये हड्डियां लंदन की विलुप्त नदी वॉलब्रूक के किनारे मौजूद क़ब्रगाह से बहकर यहां पहुंची हैं.

पिछले कुछ सालों में पुरातत्वविदों ने लंदन में रोमन युग की क़रीब दस हज़ार वस्तुएं बरामद की हैं.

खोपड़ियों के साथ ही कुछ साबुत बर्तन भी मिले हैं जो शायद इन खोपड़ियों के साथ बहकर आए थे.

हड्डियों के दूसरे टुकड़े संभवतः नदी के बहाव में बह गए होंगे.

कफ़न-दफ़न

15वीं सदी के आसपास वॉलब्रूक नदी की वजह से शहर पूर्वी और पश्चिमी दो हिस्सों में बंट गया.

इस नदी की नमी वाली दलदली दीवारें पुरावशेषों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह अनुकूल थीं.

लंदन का इतिहास तस्वीरों में

यह ताज़ा खोज धरती से तीन किलोमीटर नीचे बेडलैम क़ब्रिस्तान के भीतर हुई है. इस क़ब्रिस्तान से सैकड़ों कंकाल निकाले गए हैं.

हाल ही में बरामद ये खोपड़ियां रोमन लोगों के जीवन पर नई रौशनी डाल सकती हैं.

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हालांकि सटीक काल-निर्धारण के लिए अभी इन खोपड़ियों की फ़ॉरेंसिक जांच होनी बाक़ी है.

म्यूज़ियम ऑफ़ लंदन आर्कियोलॉजी के निकोलस एल्सडेन कहते हैं कि ये तीसरी से चौथी सदी ईसवी की हो सकती हैं क्योंकि तब रोमन लोग अपने नागरिकों का अंतिम संस्कार करने के बजाय उन्हें दफ़नाते थे.

वह कहते हैं, "अगर आप किसी क़ब्रिस्तान में नहीं हैं तो इतनी सारी खोपड़ियां (एक स्थान पर) खोज निकालना काफ़ी मुश्किल होता है."

एल्सडेन के मुताबिक़ रोमन क़ानून के तहत क़ब्रगाह को शहर से बाहर बनाया जाता था. इसका मतलब यह था कि शहर के चारों ओर क़ब्रगाहें हुआ करती थीं.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने बताया, "हम यह जानना चाहते हैं कि रोमन अपने मृतकों के बारे में क्या सोचते थे. किसी ने कभी भी किसी क़ब्रिस्तान को नदी में बहाने के बारे में सोचा भी नहीं होगा."

म्यूज़ियम ऑफ़ लंदन आर्कियोलॉजी के अस्थिविज्ञान विशेषज्ञ डॉन वॉकर कहते हैं कि खोपड़ियां अलग-अलग वातावरण में दफ़नाई गईं होंगी क्योंकि उनका रंग भूरा और धूसर है.

वॉकर के मुताबिक़, "फ़ॉरेंसिक जांच में पता चला है कि अगर कोई कंकाल किसी पानी की धारा के आसपास टूटता है तो खोपड़ी सबसे दूर बहकर जाती है या तो वह बहती है या फिर वो नदी के बहाव में उलट-पुलट सकती है. इन्हें शायद ऐसे इलाक़े में दफ़नाया गया था जहां ज़्यादा ज़मीन मौजूद नहीं थी. फ़िलहाल लगता है कि वो प्राकृतिक ढंग से एकसाथ हो गए होंगे."

सड़कों के नीचे रहस्य

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शुरुआती पड़ताल के बाद वॉकर कहते हैं कि इस मामले में किसी ‘गड़बड़ी’ के सुबूत नहीं मिले हैं, लेकिन उनके लिंग और उम्र का पता आगे की जांच के बाद ही चलेगा.

वे कहते हैं कि दांतों पर रासायनिक निशानों से इन लोगों के स्थान और उनके भोजन के बारे में पता चल सकता है.

पुरातत्वविदों का विश्वास है कि क्रॉसरेल परियोजना के ज़रिए लंदन की सड़कों के नीचे मौजूद और भी कई रहस्य उजागर होंगे जिससे रोमन साम्राज्य के समय के लंदन को समझने में काफ़ी मदद मिलेगी.

दूसरी कई अन्य खुदाइयों के दौरान कुछ और भी कंकाल मिले हैं जो 'ब्लैक डेथ' के समय के माने जा रहे हैं.

ये कंकाल करीब साढ़े तीन हज़ार साल पहले कांस्य युग के दौरान लंदन पहुंचे होंगे.

क्रॉसरेल परियोजना के तहत फिलहाल 40 जगहों पर खुदाई चल रही है और हर स्थान पर पुरातत्वविदों की पड़ताल भी जारी है.

क्रॉसरेल के तहत कई जगहों पर स्टेशनों का निर्माण होना है.

इस परियोजना के तहत हीथ्रो एयरपोर्ट और पश्चिम में मेडेनहैड तक 37 स्टेशनों को केंद्रीय लंदन के ज़रिए एबे वुड और पूर्व में शेनफ़ील्ड को जोड़ा जाना है. यह परियोजना 2018 तक पूरी होगी.

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