वेस्टगेट के अंदर आख़िर चल क्या रहा है?

  • 29 सितंबर 2013
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नैरोबी शहर में दिन-दहाड़े वेस्टगेट मॉल पर हुए हमले को एक हफ़्ता चुका है. मॉल की इमारत का एक चौथाई हिस्सा ढह चुका है और जो बचा है, उसे सुरक्षा एजेंसियों ने अपने कब्ज़े में ले रखा है.

वेस्टगेट के भीतर इस समय भी अमरीका, इसरायल, ब्रिटेन, कीनिया और इंटरपोल के पेशेवर जांच निरीक्षक सुबूत इकठ्ठा कर रहे हैं.

लेकिन जांच और मलबे में शवों को ढूँढने का काम बेहद गुप्त रखा जा रहा है. आख़िर क्यों?

शनिवार देर शाम ख़बर मिली कि स्थानीय अधिकारियों ने मॉल के बाहर तक उन लोगों को जाने की आज्ञा दे दी है, जिनकी कारें हादसे के दिन अफ़रातफ़री में छूट गईं थीं.

मैं भी जा पहुंचा. इमारत के ठीक सामने गेट पर पहुँचने में दिक्कत इसलिए नहीं हुई क्योंकि ज्यादातर पहुँचने वालों में भारतीय मूल के लोग थे.

इंटरपोल

एक स्टॉल पर दो कीनियाई अधिकारी बैठकर उन लोगों की गाड़ियों के काग़ज़ जांच रहे थे, जो अपनी गाड़ियाँ लेने आए थे.

ज़्यादातर लोगों के चेहरों से डर झलक रहा था और वे उस घटना को याद तक नहीं करना चाहते.

पीछे की तरफ़ एक बड़े से घेरे में ब्रिटेन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अधिकारी यूनिफ़ॉर्म मैं बैठे थे. उनके ठीक बाएँ इंटरपोल के कुछ अफ़सर अपने हाथ में कई यंत्र लिए हुए वेस्टगेट मॉल से बाहर ही निकले थे.

एक व्यक्ति जब अपनी निसान कार लेने के लिए पहुंचे, तो डर के मारे फूट-फूटकर रोने लगे.

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इस अधेड़ उम्र के व्यक्ति की चमचमाती कार में कम से कम नौ गोलियों के निशान थे और कार की चादर कई जगह से फट चुकी थी.

विवाद

वेस्टगेट मॉल के भीतर हो क्या रहा है इस बात को लेकर कीनिया की राजधानी में तरह-तरह की ख़बरें आ रहीं हैं.

सबसे बड़ा विवाद का विषय है कि आख़िर इमारत का चार मंज़िला हिस्सा ढहा कैसे?

कुछ ख़बरों के मुताबिक़ चरमपंथियों ने इसके भीतर बेसमेंट में सैंकड़ों गद्दों को इकठ्ठा कर उनमें आग लगा दी थी, जिससे इमारत का एक हिस्सा ढह गया.

लेकिन दूसरी ख़बरें इस बात को ख़ारिज करते हुए कहतीं हैं कि सिर्फ इस आग भर से कंक्रीट और स्टील से बनी इस इमारत का ढांचा नहीं गिर सकता.

उनके अनुसार फ़ौज ने भीतर छिपे चरमपंथियों से निपटने के अभियान में इसे बमों से उड़ा दिया गया.

सवाल ये भी है कि वेस्टगेट मॉल में चरमपंथियों ने अगर बंधक बना रखे थे तब वे भी क्या इस मलबे में दब गए?

लापता

कीनियाई सरकार को इसका भी जवाब देने में मुश्किल हो रही है कि आख़िर हमलावरों की पहचान क्यों नहीं बताई जा रही है. अभी तक अधिकारियों की तरफ से मामले पर चुप्पी ही दिखी है.

एक स्थानीय अख़बार ने तो यहाँ तक कह डाला है कि हो सकता है एक भी हमलावर मारा या पकड़ा न गया हो क्योंकि मॉल के भीतर एक गुप्त सुरंग भी बनी हो सकती है.

दूसरा बड़ा सवाल है कि लापता लोगों के बारे में खुलकर कुछ बताया क्यों नहीं जा रहा?

इमारत का जो हिस्सा गिरा, वो इतना विशालकाय भी नहीं कि उसे खंगालने में एक हफ़्ते से ज़्यादा का समय लगे.

रेडक्रॉस संस्था ने दो दिन पहले तक यही कहा था कि कम से कम 70 स्थानीय लोग लापता हैं जबकि सरकार ने इस आंकड़े को 61 बताया है.

इस तरह की अपुष्ट खबरें भी आईं हैं कि जिन कुछ लोगों को मॉल के भीतर जाने की इजाज़त मिली है उनके अनुसार अंदर ज़बरदस्त लूट-खसोट भी हुई है.

फिलहाल तो नैरोबी में मंज़र यही है कि वेस्टगेट के भीतर हो क्या रहा है, ये सवाल हर दूसरे व्यक्ति की ज़ुबान पर है.

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