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क्यों नागरिकता छोड़ रहे हैं अमरीकी?

 सोमवार, 30 सितंबर, 2013 को 00:43 IST तक के समाचार

अमरीका में इस साल ऐसे लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है जिन्होंने अमरीकी नागरिकता को अलविदा कर दिया. इसकी एक वजह नए टैक्स कानून को भी माना जा रहा है जिसे लेकर विदेशों में रहने वाले कई अमरीकियों में हताशा है.

इस साल की दूसरी तिमाही में विदेश में रहने वाले 1,131 अमरीकियों ने अमरीकी पासपोर्ट छोड़ा जबकि एक साल पहले इस अवधि में ऐसे लोगों की संख्या सिर्फ 189 थी.

हालांकि विदेशों में रहने वाले अमरीकियों की तादाद साठ लाख है और उस लिहाज से ये संख्या काफी छोटी लग सकती है लेकिन इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि ये रुझान बढ़ता जा रहा है.

अमरीका के 'फेडरल रजिस्ट्रार' ने देश की नागरिकता छोड़ने वाले लोगों की सूची तैयार की है, लेकिन इसकी कोई वजह नहीं बताई गई है. हालांकि इसकी वजह टैक्स को माना जा रहा है.

अगले साल एक जुलाई से अमरीका में फॉरेन अकाउंट्स टैक्स कॉम्पलायंस एक्ट (फाक्टा) लागू हो रहा है

इसके तहत दुनियाभर के सभी वित्तीय संस्थानों को सीधे 'अमरीकी आंतरिक राजस्व सेवाओं यानी इंटरनल रिवैन्यू सर्विसेज (आईआरएस)' को उन अमरीकी नागरिकों की संपत्ति और आय के बारे में बताना होगा, जिनके खाते में कम से कम 50 हजार डालर हैं.

फ़ैटका से जुटेंगे 100 मिलियन डॉलर

अमरीकी अधिकारियों का अनुमान है कि विदेशों में रह रहे अमरीकी नागरिकों से फैटका के जरिए गैरदेय टैक्स के रूप में 100 मिलियन डॉलर जुटाए जा सकेंगे. दूसरे देशों से उलट अमरीका देश में रह रहे नागरिकों के साथ बाहर रह रहे नागरिकों से भी टैक्स वसूलता है.

धीरे-धीरे विदेश में रह रहे क्लिक करें अमरीकियों ने इनसे बचना शुरू किया. उन्हें टैक्स रिटर्न फ़ाइल करने के साथ अपने विदेशी ख़ातों की जानकारी देने के लिए एफ़बीएआर कहे जाने वाला एक फ़ॉर्म भरना होता था. हालांकि बहुत से अमरीकी ऐसा नहीं करते.

विदेशों में रह रहे अमरीकियों के लिए टैक्स बड़ी चिंता

अब फ़ैटका के आने का मतलब होगा कि टैक्स नहीं देने और खातों का सही ख़ुलासा नहीं करने पर ज्यादा कड़े आर्थिक दंड. इस क़ानून के जरिए अमरीकी अधिकारी अतीत की तुलना में कहीं ज्यादा जानकारी पा सकेंगे.

बहुत से लोग कह सकते हैं कि आईआरएस वही कर रहा है, जो उसका अधिकार है लेकिन आलोचकों का कहना है कि बेशक क्लिक करें अमरीका धनी टैक्स चालबाजों पर शिकंजा कसने की क़वायद कर रहा हो लेकिन इससे साधारण नागरिक ज्यादा परेशान हो रहे हैं. न केवल उनके सामने धऩ की समस्या आड़े आ रही है बल्कि जटिल फ़ॉर्म भरने में ज्यादा समय जाया करना पड़ रहा है.

ब्रिगेट ने वर्ष 2011 में अमरीकी नागरिकता छोड़ दी थी, उस समय वह 32 साल की थीं और नई ज़िंदगी बिताने के लिए स्कैंडेनेविया आ गईं.

वह कहती हैं,'' मैने ऐसा टैक्स के कारण नहीं किया. मैं अमरीका को टैक्स देने में कभी खतरे में नहीं रही बल्कि यहां मैं कहीं ज्यादा टैक्स भरती हूं. मेरे लिए टैक्स कोड पर नज़र रखना और पालन करना मुश्किल होता जा रहा था. जब मैने जाना कि फ़ैटका आ रहा है तो सोचा कि क्या मैं इसके साथ और आगे जाना चाहती हूं.''

तमाम क़ानूनी ज़िम्मेदारियों के बाद वह खुद को तब मुश्किल में पाती थीं. जब एक स्थानीय किराने की दुकान पर वह अपना लायल्टी कार्ड देती थीं तो उनकी फ़िक्र ये सोचकर बढ़ जाती थी कि उनकी इस ख़रीदारी को एक ऐसे बैंक खाते से जोड़ दिया जायेगा, जिसके बारे में वो नहीं तक जानतीं.

"आखिरकार अब मैं चैन से सो सकती हूं, अब मुझे अमरीकी अपेक्षाओं की चिंता करने की जरूरत नहीं. न तो मैं कभी अमरीका में संपत्ति खरीद पाउंगी और न ही वहां ज़िंदगी बिता पाउंगी, अलबत्ता मैं वहां जा जरूर सकती हूं, यही काफी है"

ब्रिगेट, पूर्व अमरीकी नागरिक

पेचीदा टैक्स रिटर्न

उनके लिए टैक्स रिटर्न भरना इतना पेचीदा हो गया कि वह पेशेवर चार्टेड अकाउंटेंट के पास जाने लगीं जिसके लिए उन्हें सालाना दो हजार डॉलर तक खर्च करने पड़ते थे. लेकिन फ़ैटका आने के बाद ये फीस 5000 डॉलर तक होने जाने की आशंका थी.

वह कहती हैं कि दिक्कत ये भी है कि विदेशों में कुछ ही वकील अमरीकी ग्राहकों के केस लेते हैं. यहां तक कि कानून आने से पहले ही कुछ बैंक अमरीकी धन लौटाने लगे हैं.

वह कहती हैं, "आखिरकार अब मैं चैन से सो सकती हूं, अब मुझे अमरीकी औपचारिकताओं की चिंता करने की जरूरत नहीं. न तो मैं कभी अमरीका में संपत्ति खरीद पाउंगी और न ही वहां ज़िंदगी बिता पाउंगी, अलबत्ता मैं वहां जा जरूर सकती हूं, यही काफी है.''

ब्रिगेट एक संपादन और अनुवाद से काम से जुड़ी कंपनी चलाती हैं. वह कहती हैं, ''अमरीका को लेकर भावनात्मक बंधन खत्म हो चुका है. अमरीकी के तौर पर जितना आनंद लेना था वो ले लिया, मैं युवा होने के बाद कभी वहां नहीं रही. अब मेरे लिए इस नागरिकता को और रख पाना संभव नहीं.''

वह आगे कहती हैं, ''मैं हमेशा अपना परिचय अमरीकी के तौर पर देती थी लेकिन अब नहीं, हालांकि दिल से मैं हमेशा अमरीकी रहूंगी. भले ही अमरीकी पासपोर्ट न रख पाऊं.''

बड़ा मुद्दा बना फ़ैटका

1131 लोगों ने छोड़ी अमरीकी नागरिकता

वह कहती हैं कि देश से बाहर रह रहे जिन अमरीकियों को वह जानती हैं, उनके लिए टैक्स मामला बड़ा मुद्दा है. विदेशों में रह रहे अमरीकियों के काम करने वाले अमरीकी टैक्स कहते हैं कि ये एक बड़ा मुद्दा बन चुका है.

'थन फ़ाइनांशियल एडवाइजर्स' कंपनी के संस्थापक डेविड कुएंजी कहते हैं, "मैं सब लोगों के लिए काम करता हूं लेकिन इस कानून पर पूरी तरह अमल करना बहुत खर्चीला है. कुछ लोग टैक्स रिटर्न जमा करने के लिए सालभर में 4000 से 5000 डॉलर खर्च कर देते हैं जबकि अमरीका में उनका कुछ भी नहीं है.''

फ़ैटका कानून ने बाहर रह रहे अमरीकियों में डर बिठा दिया है कि अब उनके ख़ातों की पूरी जानकारी आईआरएस के पास होगी.

विदेशी बैंक भी इस कानून से खुश नहीं नजर नहीं आते हैं. रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर रैंड पॉल ने इस नए कानून में जानकारी साझा करने से जुड़े प्रावधानों को हटाने के लिए एक विधेयक पेश किया था. लेकिन अमरीकी वित्त मंत्रायल की स्थायी समिति इस कानून पर अटल है.

अंतरराष्ट्रीय कर मामलों पर अमरीकी सहायक मंत्री रॉबर्ट स्टाक का कहना है, "फाटका विदेश में रह रहे अमरीकियों पर कोई नई जिम्मेदारियों नहीं थोपता है.. विदेश में रह रहे अमरीकियों समेत सभी अमरीकी करदाताओं को अमरीकी टैक्स कानूनों का पालन करना होगा."

नहीं छोड़ेंगे नागरिकता

वैसे अमरीकी पासपोर्ट छोड़ने या ऐसा करने का इरादा रखने वाले वाले सभी लोग टैक्स बचाने की वजह से ये कदम नहीं उठा रहे हैं.

विक्टोरिया फेराउगे 47 साल की है और उनकी शादी एक फ्रेंच व्यक्ति से हुई है. वो पिछले 20 वर्षों से अमरीका से बाहर खास तौर से फ्रांस में रह रही हैं. अगर फ्रांस भी फाटका पर सहमत हो जाता है तो विक्टोरिया को नहीं पता कि इसका क्या नतीजा होगा.

वो कहती हैं, "क्या मेरा बैंक खाता बंद कर दिया जाएगा? या मेरे पति को बैंक खाते से मेरा नाम हटाना होगा."

विक्टोरिया बेरोजगार हैं और स्तन कैंसर के इलाज के बाद अब स्वास्थ्य लाभ कर ही हैं, इसलिए उनकी कोई आमदनी नहीं है. फिर भी इस साल उन्हें अकाउंटेंट को एक हजार डॉलर देना पड़ा है. बावजूद इसके उनका इरादा अमरीकी नागरिकता छोड़ने का कतई नहीं है.

वो कहती हैं, "मैं तो विदेश में रहने वाले ऐसे किसी अमरीकी को नहीं जानती जो ऐसा कदम उठाने की सोच रहा हो, लेकिन मैं खुद से यही कहती हूं कि जब तक मुमकिन होगा लड़ूंगी."

वो कहती हैं, "जब सभी विकल्प खत्म हो जाएंगे तो अमरीकी दूतावास से संपर्क करूंगी."

लेकिन दूसरी तरफ ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जिनका कहना है कि भले ही टैक्स कानून कितने भी सख़्त हो वो अमरीकी नागरिकता नहीं छोड़ेंगे. उनके मुताबिक अमरीकी होना कहीं ज्यादा अहम है.

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