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महंगाई की मारः इतालवियों की प्लेट से ज़रूरी चीज़ें गायब

 मंगलवार, 17 सितंबर, 2013 को 03:32 IST तक के समाचार

टमाटर और प्याज की आसमान छूती कीमतों के साथ तमाम चीज़ों की महंगाई से जूझने के मामले में भारत के लोग दुनिया में अकेले नहीं हैं. आज दुनिया के तमाम देशों में महंगाई ने भोजन की थाली से कई ज़रूरी चीज़ें गायब कर दी हैं.

भारत से ही मिलता-जुलता हाल यूरोप के एक विकसित देश इटली का है. इन दिनों वित्तीय संकट की मार झेल रहे इस देश के लोगों की प्लेट में पौष्टिक भोजन कम ही दिखते हैं.

यहां की एक महिला गिवोवाना अज़ी कहती हैं कि कुछ साल पहले तक फलों और सब्जियों के जिस हिस्से को वह कूड़े में फेंक देती थीं आज वह इस पर ज़ोर देती हैं कि कोई भी चीज़ बर्बाद न हो.

गिवोवाना की तरह इटली के कई परिवार बढ़ती महंगाई और कम वेतन की मार झेल रहे हैं.

आर्थिक संकट के शुरू होने के साथ जब उनके परिवार की आय कम होने लगी तो गिवोवाना ने अपने इलेक्ट्रीशियन पति के साथ मिलकर घर का बजट बनाना शुरू कर दिया.

उन्होंने कहा कि पति-पत्नी और दो बच्चों के परिवार के लिए उन्हें सप्ताह में पीत्ज़ा मंगाने पर 30 यूरो खर्च करने पड़ते थे, लेकिन इस खर्च में कटौती करने के लिए वह घर में ही पीत्ज़ा बनाने लगीं.

उन्होंने इस संवाददाता को मार्गिरिटा पीत्ज़ा का एक टुकड़ा चखाते हुए कहा कि अब यह हमारे जैसे परिवारों के बज़ट से बाहर की चीज़ हो गई है. दरअसल, इस पीत्ज़ा को बनाने के लिए भैंस की मांस की जरूरत होती है, जो अब काफी महंगा हो गया है.

संकट ने बदल दिया खान-पान

चर्चित टीवी शो के शेफ लोगों को मौसमी सब्जियों से विभिन्न चीजें बनाकर स्टोर करने की सलाह दे रहे हैं.

उन्होंने आर्थिक संकट के बाद से परिवार के खान-पान में आए बदलाव की चर्चा की. उन्होंने कहा कि बोलोगनेस चटनी की बात करें, तो पहले वह इसे बनाने के लिए आधा किलो गोमांस का इस्तेमाल करती थीं लेकिन चटनी के लिए अब 200 ग्राम गोमांस मिल जाए तो वह खुद को सौभाग्यशाली समझती हैं.

वह कहती हैं कि महंगाई के कारण आजकल उनका परिवार कम से कम मांस और करीब-करीब बिना मछली के भोजन करता है.

गिवोवाना निश्चिततौर पर एक समझदार और अच्छी कुक हैं लेकिन इटली का हर परिवार इनके जैसा नहीं हो सकता.

आर्थिक संकट के इस दौर में गिवोवाना का इलाज़ करने वाली एक आहार विशेषज्ञ फ्रांसेस्का नोली इटलीवासियों में पारंपरिक भोजन के प्रति लगाव कम होने पर चिंता जाहिर करती हैं.

उन्होंने कहा, ''साल 2008 से इटलीवासी चावल और पास्ता का खूब सेवन करते हैं.'' उनका कहना है सस्ता होने के साथ इससे पेट जल्दी भर जाता है.

उन्होंने कहा, ''लेकिन अब लोग ताज़ा सब्जियों, मछली और मांस का कम सेवन कर रहे हैं. इतना ही नहीं सस्ते के चक्कर में वे ख़राब भोजन खरीद लेते हैं.''

भविष्य की चिंता

माथा पकड़ते हुए वह कहती हैं कि वर्तमान और भविष्य को लेकर वह काफ़ी चिंतित हैं.

आज की तारीख़ में हर तीन में से एक इटलीवासी मोटापे की बीमारी का शिकार है जबकि दो करोड़ युवाओं का वज़न सामान्य से अधिक है. देश के दक्षिणी हिस्से में रहने वाले गरीब लोगों में यह समस्या ज्यादा गंभीर है.

इटली में बैकरी की दुकानों की बिक्री 40 से 50 फीसदी घटी है.

इतना ही नहीं महंगाई से जूझ रहे इतावली समाज को इसका समाधान भी बताया जा रहा है. मिलान के बाहरी इलाके में स्थित एक मॉल में एक टीवी शेफ टमाटर जैसी मौसमी सब्जियों से चटनी बनाकर गर्मियों में इस्तेमाल करने का सुझाव दे रहे हैं. गर्मियों में टमाटर की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है.

इसी तरह कुछ दुकानदार भी धन बचाने के उपाय बता रहे हैं. कोल्डीरेट्टी के अल्फ्रेडो गाएटानी का कहना है, ''यह सही है कि आम परिवारों के लिए सब्ज़ी और फल महंगे हो गए हैं. ऐसे में हम लोगों को बता रहे हैं कि अगर वे घरों में खाना बनाएं तो स्वस्थ रह सकते हैं.''

एक तिहाई इतावली घर में बना रहे पीत्ज़ा

वह मुस्कुराते हुए कहते हैं कि इस तरह से सब्जियों को संरक्षित रखना इतावली संस्कृति का हिस्सा है. इसलिए वह कहते हैं कि निश्चित तौर पर संकट है लेकिन पुरानी परंपरा अपनाकर बेहतर जीवन जिया जा सकता है.

कोल्डीरेट्टी के मुताबिक एक तिहाई इतावली अब घरों में पीत्ज़ा और 19 फीसदी अपने लिए ब्रेड बना रहे हैं.

लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसा होने से हर किसी को फ़ायदा हो रहा है. इटैलियन एसोसिएशन फॉर स्मॉल एंड मीडियम आर्टिजन बिजनेस के मुताबिक पिछले दो साल में राजधानी रोम के आसपास की 10 फीसदी छोटी बेकरी बंद हो गई हैं.

मिलान में सैंडविच और बेकरी की दुकान चलाने वाले ओरेटे मोंटेल्टो का कहना है कि पिछले साल की तुलना में उनकी बिक्री में 40 से 50 फीसदी तक की गिरावट आई है. उन्हें लगता है कि इटली में बेकरी की दुकानें बंद हो जाएंगी.

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