इराक़ में आत्मघाती हमला, 20 की मौत

  • 14 सितंबर 2013
इराक़, मोसुल हमला, सुन्नी

उत्तरी इराक़ में एक अंतिम संस्कार के दौरान आत्मघाती हमलावर के हमले में 20 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई और कई ज़ख्मी हो गए हैं.

हमला निनेवेह राज्य की राजधानी मोसुल के पास शनिवार को हुआ.

अभी तक हमले के लिए ज़िम्मेदार लोगों का पता नहीं चला है. इराक़ में पिछले कुछ महीनों में सांप्रदायिक हिंसा की वारदात बढ़ी हैं और 2008 से ये सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंच गई हैं.

जानकारों के मुताबिक़ निनेवेह सुन्नी समुदाय के चरमपंथियों के लिए अहम निशाना बना हुआ है.

संयुक्त राष्ट्र संघ के मुताबिक़ इस साल अब तक इराक़ में पांच हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें से आठ सौ की सिर्फ़ अगस्त में मौत हुई.

सुन्नियों का ग़ुस्सा

इराक़, मोसुल हमला, सुन्नी
इराक़ के बाक़ुबा इलाक़े में दो दिन पहले हुए हमले में 30 लोगों की मौत हो गई थी.

पुलिस के मुताबिक़ ताज़ा हमले का निशाना शबाक समुदाय के एक सदस्य का अंतिम संस्कार समारोह था.

क़रीब 50 हज़ार लोगों का समुदाय शबाक मोसुल और बाशिक़ा इलाक़े में बसर करता है और उनकी अपनी अलग भाषा और विश्वास हैं.

ये लोग ज़्यादातर शिया इस्लाम से निकले एक धर्म को मानते हैं और सुन्नी चरमपंथियों के हमले का अक्सर निशाना बनते हैं.

ये हमला बाक़ुबा शहर की एक सुन्नी मस्जिद पर हुए बम हमले के एक दिन बाद हुआ है जिसमें 30 लोगों की मौत हो गई थी.

हाल ही में हिंसा की घटनाओं में बढ़ोत्तरी सामुदायिक और जातीय तनाव के चलते हुई है जिसकी शुरुआत अप्रैल में हाविजा में सुन्नी अरब सरकार विरोधी शिविर पर सेना की कार्रवाई से हुई थी.

पिछले कुछ हफ़्तों में इराक़ी सुरक्षा बलों ने सैकड़ों अल क़ायदा सदस्यों को बग़दाद के आसपास से गिरफ़्तार किया है. ये गिरफ़्तारियां शिया समर्थित सरकार के उस अभियान का हिस्सा हैं जिसे सरकार ने ‘शहीदों का बदला’ नाम दिया है.

मगर ये कार्रवाईयां ज़्यादातर सुन्नी इलाक़ों में हुईं हैं जिसने सुन्नी समुदाय को नाराज़ कर दिया है. सीरिया में चल रहे संघर्ष की वजह से भी देश में हिंसा की वारदात बढ़ी हैं.

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