ये जोनाथन कौन हैं..

  • 18 सितंबर 2013

गूगल पर अगर जोनाथन फ्लेचर के बारे में जानकारी जुटाना चाहेंगे, तो तुरन्त कुछ मिल पाए मुश्किल लगता है.

इसमें कोई शक नहीं है किसी भी तरह की जानकारी की ज़रूरत होने पर हमारा ध्यान गूगल की ओर ही खिंचा चला जाता है.

गूगल आज इंटरनेट पर उपलब्ध सर्च इंजन का पर्याय बन चुका है.

गूगल इस साल अपनी 15वीं सालगिरह मना रहा है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे की तकनीक के जनक रहे जोनाथन फ्लेचर का ही नाम ढूंढने में आपको खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है.

सर्चिंग के पिता

फ्लेचर का नाम गूगल पर डालने पर वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) के विकास में उनके योगदान के बारे में तुरंत ही कुछ पता चल सके ये मुश्किल लगता है.

यही नहीं, सर्च इंजन के जनक के रूप में उनका कोई योगदान हो, ऐसा भी कहीं ढूंढे नहीं मिलता है.

20 साल पहले स्कॉटलैंड की स्टिर्लिंग यूनिवर्सिटी की एक कम्प्यूटर लैब में फ्लेचर ने दुनिया के पहले सर्च इंजन की खोज की.

इस तकनीक का आज भी गूगल, बिंग, याहू और यहां तक कि सभी बड़े सर्च इंजन इस्तेमाल करते हैं.

साल 1993 में इंटरनेट अपने शुरूआती दौर में था. उस समय मोज़ेक पहला लोकप्रिय ब्राउजर था, जो आज उपलब्ध इंटरफेस से काफी मिलता जुलता था.

इस पर कई हज़ारों पेज मौजूद थे. लेकिन इस समय तक यह गुत्थी नहीं सुलझ पाई थी कि अगर किसी चीज़ के बारे में पता करना हो तो उसे कैसे ढूंढा जाए.

मोज़ेक पर "वॉट्स न्यू" नाम से एक पेज ज़रूर था, लेकिन इसके ज़रिए नई उपलब्ध वेबसाइटों तक ही पहुंचा जा सकता था.

ऐसे में मोज़ेक के डवलर्पस के सामने सबसे बड़ी समस्या नई वेबसाइटों के बारे में जानकारी रखना थी.

नई वेबसाइट बनाने वालों को इलिनोइ अर्बाना स्थित "नेशनल सेंटर फॉर सुपर कम्प्यूटिंग एप्लिकेशन्स" को इसकी जानकारी देनी होती थी. इस सेंटर में ब्राउज़र्स की टीम मौजूद रहती थी.

आज गूगल पर एक खरब से ज़्यादा पेज मौजूद हैं.

इस समय फ्लेचर स्टिर्लिंग यूनिवर्सिटी से स्नातक कर चुके थे और आगे ग्लासगो यूनिवर्सिटी से पीएचडी के बारे में सोच रहे थे.

इस बारे में वह आगे कुछ फैसला कर पाते, इससे पहले ही यूनिवर्सिटी को पैसा मिलना बंद हो गया और उन्हें निराश होना पड़ा.

फ्लेचर कहते हैं "तभी मुझे पैसा कमाने का एक मौका मिला. मैं वापस अपनी यूनिवर्सिटी गया और तकनीकी विभाग में नौकरी कर ली. इस नौकरी में मुझे वर्ल्ड वाइड वेब और मोज़ेक के "वाट्स न्यू" पेज से रूबरू होना पड़ता था".

बेहतर रास्ता

यूनिवर्सिटी के लिए वेब सर्वर बनाते हुए फ्लेचर ने महसूस किया की वाट्स न्यू पेज में मूलभूत रूप से कई खामियां हैं. क्योंकि नई वेबसाइटों को सूचीबद्ध तरीके से जोड़ा जाता था. उनकी सामग्री में बदलाव पता करना संभव नहीं होता था.

ऐसे में कई लिंक काफी पुराने और गलत तरीके से शीर्षकबद्ध हो जाते थे. यदि आपको ये देखना हो कि वेबसाइट में क्या बदलाव किया गया है आपको लिंक पर वापस जाना होता था.

फ्लेचर बताते हैं कि कम्प्यूटर साइंस में अपनी डिग्री और अपने विचार से उन्होंने पाया कि इसका और कोई बेहतर तरीका हो सकता है. उन्होंने अपने संतुष्टि के लिए काम करना शुरू किया.

ये दुनिया का पहला वेब सर्च इंजन था. फ्लेचर ने इसको "जंप स्टेशन" दिया.

इसके साथ ही उन्होंने पेज इंडेक्स भी जोड़ दिया. जिसे वेब पर जानकारी लेने वाला व्यक्ति खोज सकता था.

शुरूआत में यह एक स्वचालित प्रक्रिया थी. जिसके बीच आने वाले हर हर पेज पर उपलब्ध हर लिंक पर यह खुद ब खुद जाता था.

इसके दस दिन बाद 21 दिसम्बर 1993 को जंप स्टेशन पर जानकारियां उपलब्ध थी. इसके साथ 25 हजार पेज जोड़े गए.

सर्च इंजन के इतिहास में अध्ययन करने वाले रॉयल मेलबोर्न इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर मार्क सेंडरसन के अनुसार, उनका मानना है कि फ्लेचर वेब सर्च इंजन के जनक हैं. इसमें कोई शक नहीं कि पिछले लंबे समय से कम्प्यूटर नई खोजें करते रहे हैं.

निश्चित रूप से वेब से पहले भी सर्च इंजन थे, लेकिन जोनाथन सभी घटकों वाले एक आधुनिक सर्च इंजन बनाने वाले पहले व्यक्ति थे.

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