'सीरिया पर हमले के होंगे भीषण दुष्परिणाम'

  • 6 सितंबर 2013
संयुक्त राष्ट्र अध्यक्ष: बान की मून
सीरिया के पर सैन्य कार्रवाई के भीषण दुष्परिणाम हो सकते हैं

संयुक्त राष्ट्र के अध्यक्ष बान की मून ने सीरिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चर्चा की निंदा की है. उन्होंने कहा कि इसे अच्छा नहीं माना जा सकता.

उन्होंने चेतावनी दी है कि सीरिया पर सैन्य कार्रवाई के भीषण दुष्परिणाम हो सकते हैं.

रूस में जी- 20 सम्मलेन से जुड़ी एक बैठक में उन्होंने कहा है कि सीरिया में असद सरकार पर रासायनिक हथियारों के प्रयोग के आरोप के कारण सीरिया पर आक्रमण करने से जातीय हिंसा बढ़ सकती है.

ब्रितानी सूत्रों का कहना है कि फ़्रांस, तुर्की, कनाडा और ब्रिटेन सीरिया पर सैन्य कार्रवाई के लिए अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा का समर्थन कर रहे हैं लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि किस पक्ष ने रासायनिक हथियारों का प्रयोग किया.

'आकांक्षाओं पर खरी नहीं'

लिथुआनिया में यूरोपीय संघ के रक्षा मंत्रियों की बैठक में कहा गया कि रासायनिक हथियारों के सीरिया की सरकार द्वारा प्रयोग किए जाने के कई संकेत मिलते हैं.

अमरीका
अमरीका सीरिया पर हमले के लिए समर्थन जुटा रहा है.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी प्रतिनिधि सामंथा पावर ने न्यूयार्क में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सीरिया के लोगों की आकांक्षाओं पर खरी नहीं उतरी है. उन्होंने इस हालात के लिए रूस को ज़िम्मेदार ठहराया.

सीरिया की संसद के अध्यक्ष ने अमरीकी संसद में अपने समकक्ष रिपब्लिकन नेता जॉन बोएनर को लिखे एक ख़त में सीरिया पर हमले के आदेश देने में जल्दबाजी ना करने को कहा है.

दमिश्क में बशर अल असद सरकार पर पिछले ढाई साल के विद्रोह के दौरान कई बार रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप है.

ताज़ा आरोप 21 अगस्त को राजधानी दमिश्क के बाहरी इलाके में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का है.

असद सरकार इन तमाम आरोपों को सिरे से ख़ारिज करती है.

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