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स्मार्ट खरीददार बनिए

 शनिवार, 31 अगस्त, 2013 को 22:38 IST तक के समाचार

आजकल ऑनलाइन खरीददारी का चलन बढ़ रहा है, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल कर दुकानदार ग्राहकों के अपनी दुकान की तरफ खींच सकते हैं.

किसी ख़ास मौके के लिए खरीददारी करना आसान काम नहीं है. अपनी पसंद के कपड़े ढूंढना और फिर लंबे समय तक मोलभाव करना हर किसी के बस की बात नहीं है.

यही वजह है कि ऑनलाइन खरीददारी का बाज़ार दिन दोगुना रात चौगुना बढ़ रहा है. ई-मार्केटर के मुताबिक़ साल 2012 में ई-कॉमर्स बिक्री 21.1 प्रतिशत बढ़कर दस खरब डॉलर पहुंच गई है और इसके इस साल 18.3 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है.

ऑनलाइन खरीददारी के बढ़ते चलन और दुनियाभर में छाई मंदी के कारण परंपरागत दुकानदारों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है.

लेकिन तकनीक का इस्तेमाल करके वे ग्राहकों को अपनी तरफ रिझा सकते हैं. ऑमनी क्लिक करें कॉमर्स ग्राहकों को ऑनलाइन और स्टोर में से किसी को चुनने के बजाय एक तीसरा विकल्प मुहैया कराता है.

तकनीक

क्लिक करें रिटेल तकनीक विशेषज्ञ एनसीआर ने वक़्त की नज़ाकत को समझते हुए इस पर काम करना शुरू कर दिया है.

एनसीआर के उत्तरी क्लिक करें यूरोप के सेल्स डायरेक्टर गिओवानी बैंडी कहते हैं, "हमें लगता है कि इस मामले में तत्काल काम करने की ज़रूरत है. परंपरागत दुकानों के अस्तित्व को ख़तरा है ये हम सभी जानते हैं. सवाल है कि अब आगे कैसे बढ़ें."

शादी के कपड़ों की ही बात ले लीजिए. मान लीजिए आपको कोई ड्रेस या सूट पसंद आ गया लेकिन मैचिंग कमीज, बैग, जूते और टाई ढूंढने में आपके पसीने छूट जाएंगे.

एनसीआर को लगता है कि उसने इस समस्या का हल ढूंढ लिया है. कंपनी का एंडलैस ऐसल कियोस्क किसी बड़े टैबलेट कम्प्यूटर सा लगता है जिस पर एलईडी टचस्क्रीन है.

इसमें मौजूद एक एप्स की मदद से उपभोक्ता अपनी पसंद की चीज चुनकर उसे एक कैमरे के सामने रखता है. कियोस्क अपने स्टोर में मौजूद उस रंग से मिलती जुलती एक्सेसरीज को स्क्रीन पर दिखाता है.

इससे उपभोक्ता अपनी मनपसंद चीजें खरीद सकता है और होम डिलीवरी के लिए उनका ऑर्डर भी दे सकता है.

चुनौती

एनसीआर के केविन ब्रिग्स कहते हैं, "वेब प्लेटफॉर्म के अनुभव को कियोस्क में मोबाइल क्लिक करें एप्स के साथ देना एक चुनौती है. हमें उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा."

उन्होंने कहा कि सामान खरीदने का तरीका अब पूरी तरह बदल गया है. ब्रिग्स ने कहा, "पहले दुकानदार उपभोक्ताओं को अपनी उंगलियों पर नचाते थे लेकिन अब मामला उल्टा हो गया है."

उन्होंने कहा, "उपभोक्ता के पास अब खरीददारी के कई तरीके हैं. अब दुकानदार के समक्ष यह चुनौती है कि वो ग्राहक को कैसे अपनी तरफ खींचे."

क्लिक करें सैमसंग द्वारा कराए गए शोध के मुताबिक़ 72 प्रतिशत रिटेलर्स मानते हैं कि वेब के साथ प्रतिस्पर्द्धा करने के लिए तकनीक में निवेश जरूरी है लेकिन सच्चाई यह है कि उनमें से केवल 35 प्रतिशत ने ही टैबलेट जैसी तकनीक को अपनाया है.

कंपनी के फिलिप ओल्डहैम ने कहा, "रिटेल का मतलब यह नहीं है कि जहां लोग सामान खरीदते हैं बल्कि इसका मतलब यह है कि वे कैसे खरीददारी करते हैं. ऑनलाइन के साथ प्रतिस्पर्द्धा के लिए दुकानों को तकनीक अपनानी ही होगी."

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