सीरिया में रासायनिक हमलों के दावे में कितना दम

  • 26 अगस्त 2013
शवों के पास रोते-बिलखते लोग

सीरिया में विपक्षी कार्यकर्ताओं ने सरकार पर दमिश्क के बाहरी इलाके में रासायनिक हथियारों से हमला करने का आरोप लगाया है.

वहीं सीरिया की सेना ने जहरीली गैसों के इस्तेमाल से इनकार करते हुए इन दावों को गलत और पूरी तरह आधारहीन बताया है.

आइए जानते हैं इन हमलों के बारे में.

क्या हुआ था?

सरकारी सुरक्षा बल 21 अगस्त की सुबह पूर्वी दमिश्क इलाके में विद्रोहियों को खदेड़ने के लिए भारी बमबारी कर रहे थे.

विपक्षी गुटों का कहना है कि इस दौरान घाउटा के आबादी वाले इलाके में रॉकेट से खतरनाक रसायनिक पदार्थ गिराए गए.

उनका कहना है कि इन हमलों में तीन सौ से अधिक लोग मारे गए, इनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक थी. मेडिसिन सैंज फ्रंटियर (एमएसएफ) जैसे संगठनों ने भी इन हमलों में मरने वालों की संख्या करीब इतनी ही बताई है. लेकिन कुछ अन्य विपक्षी कार्यकर्ताओं के मुताबिक मृतकों की संख्या इससे कहीं अधिक है.

इन दावों को खारिज करते हुए सीरियाई सेना ने इसे हार छिपाने के लिए विद्रोहियों की हताशा भरी कार्रवाई बताया है.

वीडियो क्या दिखाना चाह रहा है ?

इंटरनेट पर आए वीडियो में रासायनिक हमलों से पीड़ित वयस्कों और बच्चों को दिखाया गया है, हालांकि इन वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं हो पाई है.

इनमें चिकित्साकर्मियों को इनका इलाज करते हुए दिखाया गया है.लेकिन इन लोगों के शरीर में बाहरी चोट के निशान नहीं हैं. कुछ मरीज गहरी नींद या बेहोशी की हालत में दिख रहे हैं.

वीडियो में दिखाया गया है कि एक क्लीनिक के फर्श पर कई शव कतार में पड़े हैं. इनमें छोटे बच्चे और शिशु भी शामिल हैं.

संवाददाताओं का कहना है कि इस हमले में मारे गए लोगों की संख्या सीरिया में इससे पहले हुए कथित रासायनिक हमलों में मारे गए लोगों से कहीं अधिक है.

दिखाई दे रहे लक्षणों से क्या लग रहा है?

विश्लेषकों का कहना है कि बाहरी चोटों का न दिखना रासायनिक हमले का संकेत हो सकता है.

पीड़ितों का इलाज करते चिकित्साकर्मी

ब्रिटेन के रासायनिक और जैविक हमलों से निपटने वाले बल के पूर्व कमांडर हामिश डे ब्रेटान-गार्डन कहते हैं, "खुला हुआ मुँह और घाव विहीन मौत जैसे लक्षण इराक के हालाबाजा में नर्व एजेंट से मारे गए हज़ारों लोगों में देखे गए लक्षणों जैसे ही हैं."

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों का बहुत कम समय में मर जाना भी रासायनीकि हमले की ओर इशारा करता है.

हामिश डे ब्रेटान-गार्डन कहते हैं, ''ईरान-इराक़ युद्ध में लोगों को मारने के दौरान बड़े पैमाने पर मस्टर्ड गैस का उपयोग किया गया था.''

जर्मनी के हेल विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल माइक्रोबाइलोजी के प्रोफ़ेसर अलेक्जेंडर केकुले रासायनिक हथियार के इस्तेमाल को लेकर सहमत हैं. वो कहते हैं कि त्वचा को जला देने वाले कड़वे पदार्थ के लक्षण नहीं मिले हैं.

इस हमले में बच गए लोग सांस लेने की समस्या से पीड़ित हैं.

रासायनिक या जैविक हथियारों के विशेषज्ञ डॉक्टर जीन पॉस्कल जेंडर्स कहते हैं कि कुछ मृतकों के चेहरे के गुलाबी रंगत को देखते हुए, एशफिशिएशन के जरिए विषाक्तता के ठोस सबूत नहीं हैं.

एमएसएफ ने 24 अगस्त को कहा कि दमिश्क के तीन अस्पतालों ने बुधवार की सुबह तक न्यूरोटाक्सिक लक्षण वाले 3600 मरीजों का इलाज किया. इस दौरान 355 लोगों की मौत हो गई थी.

अनसुलझे सवाल

विशेषज्ञों ने वीडियो और हमले में उपयोग में लाए गए हथियारों को लेकर कुछ शंका जाहिर की है.

रासायनिक हथियारों से संबंधित फिनिश इंस्टीट्यूट के निदेशक पाउला वान्नानिनेन कहते हैं, '' फिलहाल मैं पूरी तरह से सहमत नहीं हूं, क्योंकि लोगों की सहायता करने वाले लोग न तो कोई रक्षात्मक कपड़ा नहीं पहने हुए थे और न वे सांस लेने वाले यंत्र लिए हुए थे.''

वो कहते हैं, ''वास्तविक मामलों में वे भी प्रभावित हो जाएंगे और उनमें भी लक्षण दिखेंगे.''

डॉक्टर जैनडर्स को तंत्रिका को प्रभावित करने वाले किसी पदार्थ के उपयोग को लेकर संदेह है.

उन्होंने एक ब्लॉग में लिखा है,'' मैंने किसी को जहर का प्रभाव कम करने वाली दवाओं का उपयोग करते हुए नहीं देखा. इलाज के लिए ले जाते समय या इलाज करते समय मेडिकल स्टाफ में दूसरे स्तर की विषाक्तता नहीं देखी गई.''

क्या ये वीडियो नकली हैं?

लेबनान में हिजबुल्लाह की ओर से संचालित मन्नार टीवी को सीरिया के सूचना मंत्री इमरान अल जुबिट ने कहा, ''दिखाई गई तस्वीरें फर्जी हैं और इसकी योजना पहले ही बना ली गई थी.''

लेकिन विदेशी विश्लेषकों ने बीबीसी से कहा कि इस पैमाने और विस्तार के साथ वीडियो फुटेज बना पाना असंभव है.

प्रोफ़ेसर केकुले ने कहा कि इन वीडियो के राजनीतिक होने के विचार को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता है.

वहीं हामिश डे ब्रेटान-गार्डन कहते हैं कि किसी साजिशकर्ता के लिए इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को इतने अधिक समय तक मृत दिखा पाना काफी कठिन है.

इस तरह के हमलों में कौन सक्षम है?

सीरिया की सरकार ने यह स्वीकार किया है कि उसके पास रासायनिक हथियार हैं. लेकिन उसका कहना है कि इन हथियारों का वह अपने लोगों के खिलाफ कभी इस्तेमाल नहीं करेंगे.

सीरिया के सूचना मंत्री इमरान-अल-जुबेई ने कहा कि बुधवार को जिस तरह के हमले की बात कही जा रही है, वह संभव नहीं है क्योंकि जहाँ यह हमला हुआ वहाँ कथित तौर पर सरकारी सुरक्षा बल भी मौजूद थे.

इस बीच रूस ने कहा है कि इस बात के सबूत हैं कि यह विरोधियों का काम है. लेकिन अमरीका और ब्रिटेन ने कहा है कि वे यह विश्वास नहीं कर सकते हैं कि विद्रोहियों की पहुँच रासायनिक हथियारों तक है.

हमला अभी क्यों?

सीरिया में मौजूद संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ता
संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ता देश में हुए रासायनिक हमलों की जाँच के लिए पहले से मौजूद थे

संयुक्त राष्ट्र के रासायनिक हथियार निरीक्षक तीन जगहों पर रासायनिक उपयोग की जाँच के लिए 18 अगस्त को सीरिया पहुँच गए थे. देश के उत्तर में स्थित खान-अल-असल में इस साल मार्च में हुए कथित रासायनिक हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी.

जांचकर्ताओं को अब दमिश्क में उस जगह पर जाने की इजाजत दे दी गई है, जहाँ कथित तौर पर 21 अगस्त को रासायनिक हथियारों से हमला हुआ था.

संवाददाताओं का कहना है कि इस बात पर विश्वास करना कठिन है कि ऐसे समय जब सीरिया सरकार विद्रोहियों को खदेड़ कर इलाकों पर फिर कब्जा कर रही हो और देश में जांचकर्ता मौजूद हो, रासायनिक हमला किया जाएगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार