'अफ़ग़ानिस्तान के बाद निशाने पर होगा पाकिस्तान'

  • 25 अगस्त 2013
नरेंद्र मोदी
नरेंद्र मोदी आम चुनावों की तैयारियो में जुटे हैं

बीते हफ़्ते भारत के ऊर्दू अख़बारों में जहां आम चुनावों के मद्देनज़र गर्माती राजनीति की चर्चा रही, तो पाकिस्तान के ऊर्दू अखबारों ने नियंत्रण रेखा पर लगातार जारी तनाव और घरेलू मोर्चे पर तालिबान से निपटने की चुनौती पर खास तवज्जो दी है.

दिल्ली से छपने वाले 'जदीद ख़बर' ने अयोध्या में कोसी परिक्रमा की कोशिशों पर लिखा है विश्व हिंदू परिषद एक बार फिर उत्तर प्रदेश को आग लगाने की कोशिशों में जुटा है.

अख़बार के अनुसार बीजेपी पिछले दो आम चुनावों मे सत्ता हासिल करने में नाकाम रही है. उसका समर्थन करने वाले भगवा संगठन भी सत्ता के आदी हो गए हैं, इसीलिए बीजेपी की आड़ में सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता में लगाने के लिए वो सक्रिय हो गए हैं.

अख़बार कहता है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाने की कोशिशें बीजेपी की मंशा को साफ करती है.

'मोदी और मुसलमान'

'हिंदुस्तान एक्सप्रेस' ने 'मोदी मुसमान और भारतीय जनता पार्टी' शीर्षक से संपादकीय लिखा है. अख़बार के अनुसार मोदी ने कहा है कि अगर गुजरात में मुसलमान बीजेपी को वोट दे सकते हैं, तो आम चुनावों में ऐसा क्यों नहीं हो सकता.

रुपए की हालत कमजोर
डॉलर के मुकाबले गिरता ही जा रहा है रुपया

अख़बार लिखता है कि औपचारिक तौर पर भले ही मोदी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित न किए गए हों लेकिन बीजेपी की दिशा वही तय कर कर रहे हैं. मोदी को समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की मजबूरी भी समझ आने लगी है, इसीलिए आम चुनावों के लिए तैयार ख़ाके में मुसलमानों को लुभाने की कोशिश हो रही है.

डॉलर के मुकाबले कमज़ोर होते रुपए पर दैनिक 'इन्क़लाब' की टिप्पणी है कि रुपए की हालत उस मरीज़ की तरह हो गई है जो दिन पर दिन कमज़ोर होता जा रहा है और इसकी बढ़ती हुई कमज़ोरी की वजह से बीमारी और गंभीर होती जा रही है.

वहीं नियंत्रण रेखा पर तनातनी की खबरें बराबर अख़बारों में बनी हुई हैं. दैनिक 'एतमाद' ने जहां पाकिस्तान की तरफ से संघर्ष विराम का बराबर उल्लंघन किए जाने के आरोपों से जुड़ी खबर दी, वहीं 'हिंदुस्तान एक्सप्रेस' ने सुर्खी लगाई दो फौजियों की मौत के बाद पाकिस्तान ने भारतीय उच्चायुक्त को किया तलब.

'कमज़ोरी विदेश नीति'

पाकिस्तानी ऊर्दू अख़बारों की बात करें तो 'एक्सप्रेस' लिखता है कि 14 और 15 अगस्त को दोनों देशों के स्वतंत्रता दिवस पर भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की तरफ से एक-दूसरे को शुभकामनाएं दिए जाने और सहयोग पर आधारित रिश्तों की ख़्वाहिश से उम्मीद बंधी थी कि अब सरहद पर फायरिंग का सिलसिला थम जाएगा और दोनों देश पिछली तल्ख़ियां भुलाकर एक दूसरे की तरफ दोस्ती का हाथ बढाएंगे.

नियंत्रण रेखा
नियंत्रण रेखा पर तनाव से दोनों देशों के रिश्ते मुश्किलों से गुजर रहे हैं

लेकिन अख़बार ने लिखा है कि भारतीय सेना की तरफ से बराबर गोलीबारी और उसमें एक पाकिस्तान कप्तान और एक सिपाही की मौत के बाद रिश्तों में और तनाव आ गया है. इसके बावजूद पाकिस्तान प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ बेहद संयम से काम ले रहे हैं. पिछले दिनों भारतीय विदेश मंत्री ने भी एक बयान में कहा कि तनाव के बावजूद सभी विवादों का हल बातचीत से ही होगा.

दैनिक 'ख़बरें' ने सीमा पर तनाव को भारत का आक्रामकता बताते हुए इसे पाकिस्तान की कमज़ोर विदेश नीति का नतीजा बताया है.

दैनिक 'औसाफ़' लिखता है कि पाकिस्तान में नई सरकार बनने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की पहली बैठक में भी नियंत्रण रेखा पर तनाव की चर्चा हुई लेकिन इसे दोतरफ़ा रिश्तों में बाधा न बनने देने का संकल्प जताया गया.

तालिबान की धमकी

इस बैठक में सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने चरमपंथियों को कड़ा संदेश दिया कि वो अपने हथियार डाल दें वरना उनके ख़िलाफ़ बल प्रयोग किया जाएगा. पिछले दिनों प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने तालिबान समेत सभी चमरपंथी को बातचीत का न्यौता दिया था लेकिन ये बातचीत तभी होगी जब चरमपंथीहथियार डाल देंगे.

'औसाफ़' ने इसी बारे में अपने संपादकीय पन्ने पर एक कार्टून भी छापा है जिसमें नवाज़ शरीफ़ को बड़े-बड़े कांटों वाले एक कैक्टस पेड़ से लिपटे दिखाया गया है और लिखा है दहशतदर्दी का खात्मा पहली तरजीह है.

वहीं दैनिक 'वक़्त' ने बीबीसी ऊर्दू को दिए इंटरव्यू के हवाले से ख़बर लगाई है, 'अफगानिस्तान में जीत मिलने के बाद पाकिस्तान लक्ष्य है, तालिबान की धमकी'.

तहरीके तालिबान पंजाब के प्रमुख अस्मतुल्लाह ने कहा है कि सरकार की बातचीत की पेशकश पर जल्द विचार करेंगे, लेकिन सरकार ये ख़याल अपने दिल से निकाल दे कि अफ़ग़ानिस्तान से विदेशी सेनाओं की वापसी के बाद पाकिस्तान में तालिबान की कार्रवाइयों में कमी आ जाएगी.

दीपिका का जादू

पिछले दिनों पाकिस्तान में हुए आम चुनावों की ख़बरें भी सभी अख़बारों में हैं जिसमें नेशनल अंसेबली की पांच सीटें जीतकर सत्ताधारी पीएमएल-एन पहले स्थान पर रही जबकि पीपीपी को तीन और इमरान ख़ान की पीटीआई को तीन सीटें मिली.

दीपिका पादुकोण
बॉक्स ऑफिस पर दीपिका ने दिखाया दम

दैनिक 'इंसाफ़' लिखता है कि चुनाव आयोग ने ख़ैबर पख़्तून ख़्वाह में दो ऐसे क्षेत्रों में चुनाव नतीजों पर रोक लगा दी है जहां महिलाओं को वोट नहीं डालने दिए गए. साथ ही उस जिरगे की गिरफ़्तारी के आदेश भी दिए हैं जिसने महिलाओं के वोट डालने पर पाबंदी लगाई.

'मशरिक' में एक कार्टून छपा है जिसमें पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को फिलसते हुए दिखाया गया है और उनका पैर फंदे में फंस गया. उसके ऊपर लिखा है -बेनजीर हत्याकांड में मुशर्रफ पर आरोप तय.

वहीं दैनिक 'आवाम' में एक तस्वीर भी देखने को मिली, जिसमें कुछ पाकिस्तानी हिंदुओं के हाथों में रक्षाबंधन पर राखी बंधी थी.

और आखिर में, दैनिक ख़बरें और औसाफ़ दोनों ने अपने शोबिज़ पन्ने पर ख़बर लगाई है कि दीपिका पादुकोण बॉलीवुड की ऐसी इकलौती हीरोइन हैं जिनकी लगातार दो फिल्में बॉक्स ऑफ़िस पर 180 करोड़ रुपए की कमाई कर चुकी हैं. उनकी फ़िल्म 'ये जवानी है दीवानी' ने जहां 182 करोड़ रुपए कमाए, वहां हाल में रिलीज़ हुई 'चेन्नई एक्सप्रेस' लगातार 185 करोड़ रुपए का बिजनेस कर चुकी है और उसकी कमाई जारी है.

(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)