अफगान नागरिकों को मारने वाले सार्जेंट ने माँगी माफ़ी

  • 23 अगस्त 2013

पिछले साल 16 अफ़ग़ान नागरिकों की हत्या करने वाले अमरीकी सार्जेंट रॉबर्ट बेल्स ने इस नरसंहार को 'कायरतापूर्ण कृत्य' बताते हुए माफी माँगी है.

वॉशिंगटन के एक सैन्य हिरासत केन्द्र में बेल्स की सज़ा कम करने को लेकर सुनवाई हो रही है.

39 वर्षीय बेल्स ने कहा, ''11 मार्च 2012 को हमले के समय वह बहुत घबराए हुए थे.''

दो बच्चों के पिता बेल्स ने मौत की सज़ा से बचने के लिए जून में अपना गुनाह स्वीकार कर लिया था.

अग बेल्स को पैरोल के साथ उम्रकैद की सज़ा सुनाई जाती है, तो उनके 20 साल की सज़ा के बाद छूटने की संभावना है.

'बहुत शराब पीना बना वजह'

बेल्स ने गुरुवार को हुई सुनवाई में कहा, ''मैं मारे गए लोगों के परिवारों से माफ़ी माँगना चाहता हूँ. मैं सोचता हूँ कि काश मैं उन मारे हुए लोगों को वापस ला सकता!''

बेल्स ने अदालत में कहा, ''मैं जानता हूँ कि सिर्फ़ माफ़ी माँगना ही काफ़ी नहीं है, लेकिन फिर भी मैं सभी से माफ़ी माँगता हूँ.''

अभियोजन पक्ष के अनुसार बेल्स का इस तरह अपराध स्वीकार कर लेना विवादित है, क्योंकि जेल से अपनी पत्नी को किए गये एक फ़ोन कॉल की रिकॉर्डिंग के मुताबिक इस केस की चर्चा करते हुए वे हंस रहे थे. लेकिन बेल्स के वकील ने बहस के दौरान इस बातचीत को इस केस से अलग रखा.

बेल्स ने गुरुवार को कहा, ''बहुत ज़्यादा शराब पीने और अपनी समस्याओं को छिपाने की वजह से और हर वक़्त ख़ुद पर गुस्सा करते रहने से मैं पागल हुए जा रहा था.''

बेल्स ने अदालत को बताया कि ''अपने चौथे सैन्य मिशन पर इस हत्याकांड को अंजाम देते वक़्त मैं ड्रग्स लेने और शराब पीने का आदी था.''

पूर्व पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी मार्क एडवर्ड्स भी सार्जेंट बेल्स के चरित्र को प्रमाणित करने के लिए गवाह के तौर पर कोर्ट में पेश हुए.

न्यू इंग्लैंड पैट्रियट्स के इस पूर्व खिलाड़ी ने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका में हाईस्कूल की पढ़ाई के वक़्त सार्जेंट बेल्स एक 'अद्भुत नेतृत्व' वाले व्यक्ति थे.''

मारे गये लोगों में ज़्यादातर महिलाएँ और बच्चे थे

तबाही

बेल्स के बड़े भाई 55 वर्षीय विलियम बेल्स ने भी उनके प्रति सहानभूति दिखाई.

विलियम ने कहा, ''मैने बेल्स से बेहतर पिता आज तक नहीं देखा है, बच्चे उसे बहुत प्यार करते हैं, अगर आप अभी बच्चों को उसके पास लाएँ तो वे दौड़कर उसके पास चले जाएँगे.''

इराक़ में बेल्स के साथ तैनात रहे मेजर ब्रेंट क्लेमर के मुताबिक, ''बेल्स ऐसी किसी क्रूर घटना को अंजाम दे सकते हैं, इस बात पर मैं कभी विश्वास नहीं कर सकता था."

इससे पहले इस स्पताह जूरी ने इस केस को विस्तार से सुना था कि कैसे बेल्स ने कंधार प्रांत में दो गाँवों पर हमला कर अधिकतर महिलाओं और बच्चों को गोलियों से भून डाला था.

कोर्ट मार्शल की कार्यवाही में अमरीकी सेना द्वारा अमरीका लाए गये नौ अफ़ग़ान नागरिकों ने बताया कि कैसे इस हत्याकांड के बाद उनका जीवन पूरी तरह से बदल गया.

इस हमले में अपने परिवार के 11 सदस्यों को खोने वाले हाजी मोहम्मद वज़ीर ने कहा, ''इस हमले ने उनका पूरा जीवन तबाह कर दिया."

अमरीकी सरकार ने मुआवज़े के तौर पर वज़ीर को पाँच लाख पचास हज़ार डॉलर की राशि प्रदान की. पीड़ित परिवारों को कुल लगभग एक मिलियन डॉलर का भुगतान अमरीकी सरकार ने किया.

(बीबीसी हिन्दी एंड्रॉएड ऐप के लिए यहाँ क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार