सीरिया में क्या कर रहे हैं फ़्रांसीसी जेहादी

  • 25 अगस्त 2013
सीरिया
ज्यां डेनियल को उनके भाई ने इस्लाम कबूलने के लिए प्रेरित किया था.

सीरिया में चल रहे गृहयुद्ध में फ्रांस के भी कई नागरिक हिस्सा ले रहे हैं. आख़िर क्या वजह है कि लोग धर्म बदलकर सीरिया में जेहाद के नाम पर शहीद होने को तैयार हैं. एक ऐसे पिता जिसके दो बेटे लड़ने के लिए सीरिया गए थे, ने बीबीसी के क्रिस्टियन फ्रेज़र को अपनी आपबीती सुनाई.

यह भी अन्य जेहादी वीडियो की तरह दिखता है. अल्लाह के प्रति निष्ठा दिखाने वाले एक काले झंडे के आगे एक व्यक्ति बैठा है जो अपना नाम अबु अब्द अल रहमान बता रहा है. वो कहता है, “मैं फ़्रांसीसी हूं. मैं माता-पिता नास्तिक हैं और किसी धर्म को नहीं मानते हैं.”

लेकिन सच्चाई यह है कि उनके माता-पिता कैथोलिक हैं. इस व्यक्ति का नाम निकोलस है. वो 30 साल के हैं और उसने इस्लाम स्वीकार कर लिया है. वो टुलूज के एक मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक़ रखते हैं और उनकी मां सेना में काम करती हैं.

वीडियो के दूसरे हिस्से में निकोलस सेना की वर्दी में है और उसके पैरों में एक कलाशनिकोव राइफ़ल रखी है.

उनके साथ में एक व्यक्ति बैठा है. वो सहज नहीं दिख रहा है. उसकी दाढ़ी भी नहीं है. ये निकोलस के सौतेला भाई ज्यां डेनियल हैं. ये दोनों भाई सीरिया में जेहाद में हिस्सा लेने गए थे.

इस्लाम से निकोलस का परिचय 2009 में इंटरनेट के माध्यम से हुआ. उन्होंने टुलूज में एक नरमपंथी विचारधारा की मस्जिद में जाना शुरू किया. लेकिन उनके एक दोस्त ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि निकोलस ने कई बार इस्लाम के बारे में बातें की और फिर अचानक उनमें कुछ बदलाव आ गया.

चरमपंथी

उसने कहा, “मुझे नहीं पता कि निकोलस को किसने चरमपंथी बनाया. मैं उन्हें पहचान नहीं पाऊंगा. वे बाहर से आए थे. वे मस्जिद में नहीं रहते थे और न ही हमारे इलाक़े में. वे शायद स्ट्रॉसबर्ग के थे या फिर पेरिस के. लेकिन इतना तय है कि वे टुलूज के नहीं थे. वे लंबे समय तक वहां नहीं रुके. कुछ को वहां से निकाल दिया गया.”

29 मार्च को वे बस से बार्सिलोना रवाना हुए और फिर कासाब्लांका होते हुए इस्तांबुल पहुंचे. तुर्की से उन्होंने सीमा पार की और सीरिया के शहर अलेप्पो पहुंच गए. यात्रा का खर्च जुटाने के लिए वे पार्ट टाइम काम भी कर रहे थे. हालांकि उनका मित्र को लग रहा था कि ज्यां डेनियल में ज़िहाद के लिए अपने भाई की तरह ज़ुनून नहीं है.

उसने कहा, “मुझे निश्चित तौर पर लग रहा था कि उसे अपने फ़ैसले पर अफसोस था. निकोलस ने मुझे प्रभावित किया. उसे ज़रूर इस बात पर आश्चर्य होगा कि उसने अपने आप को कहां फंसा लिया है. वो अपने भाई की बहुत सुनता था.”

दोनों नियमित रूप से शहर के उत्तरी इलाक़े इज़ार्ड्स जाते थे जो कि अपराधों का गढ़ है. निकोलस को हशीश बेचने का दोषी पाया गया था. उनके परिवार का कहना था कि वो गलत संगत में पड़ रहे थे.

परिचय

लेकिन तभी उसका परिचय एक नई आस्था से हुआ. वो अपने अधिकांश मुस्लिम दोस्तों से ज़्यादा आस्थावान था. उसने परिवार में सभी को मुसलमान बनाने की कोशिश की.

साल 2011 में वो अपने भाई को मुसलमान बनाने में सफल रहे. उनकी मां उनके व्यवहार से इतनी चिंतित थी कि उन्होंने ख़ुफ़िया पुलिस को बुला लिया.

गेरार्ड
गेरार्ड का कहना है कि उनका बेटा पहचान के लिए भटक रहा था.

वे बिखरे हुए परिवार से संबंध रखते थे लेकिन ऐसा नहीं था कि वे ज़िदगी से खुश नहीं थे. फ्रेंच गुयाना में रह रहे उनके पिता गेरार्ड स्काइप पर साक्षात्कार के लिए सहमत हो गए.

उन्होंने कहा, “उनका जो तरीक़ा था वो किसी धर्म से ज्यादा पंथ था. निकोलस का कम्प्यूटर अफ़ग़ानिस्तान में चल रही लड़ाई के यूट्यूब वीडियो से भरा हुआ था. वो किसी ऐसे आदमी से मिले था जिसने उन्हें ये वीडियो दिखाए थे.

गेरार्ड ने कहा, "मुझे लगता है कि इन फ़िल्मों का इन लड़कों पर प्रभाव पड़ा. ये फ़िल्मों लोगों का ध्यान आकर्षित कर सकती हैं. मैंने अपने बच्चों का लालन पालन निनटेंडो और कोको पॉप्स में किया है लेकिन उन्हें सीरिया में ऐसा करते देखना विचलित करता है. मुझे लगता है कि जिन लोगों ने ऐसा किया वो कमजोर लोगों को निशाना बनाते हैं. निकोलस पहचान के लिए किसी काम की तलाश में थे और उन्होंने इसी बात का फायदा उठाया.”

चिंता

उन्होंने कहा, “मुझे उनकी चिंता है. मुझे 19 दिनों से उनके बारे में कोई जानकारी नहीं थी. सोमवार को ज्यां डेनियल ने मुझे बताया कि वे ठीक हैं. वे हवाई अड्डे पर कब्जे के लिए लड़ाई लड़ रहे थी जिसमें उनकी जीत हुई.” लेकिन इस साक्षात्कार के एक घंटे बाद गेरार्ड को अलेप्पो से निकोलस ने फ़ोन पर सूचना दी कि ज्यां डेनियल मारे जा चुके हैं.

ख़ुफ़िया सूत्रों का कहना है कि क़रीब 220 फ्रांसीसी नागरिक सीरिया में लड़ाई में हिस्सा ले रहे हैं. इनमें से 40 लोग धर्म बदलकर मुसलमान बने हैं. फ्रांस में केवल एक प्रतिशत मुसलमान दूसरे धर्मों से आए हैं.

इस्लाम और ज़िहाद के विशेषज्ञ मैथ्यू गाइडेरे फ्रांस सरकार के सलाहकार हैं. उन्होंने कहा, “इस तरह के लोग मानते हैं कि पश्चिम में आप विरोध प्रदर्शन करते है लेकिन कुछ नहीं बदलता है जबकि मिस्र में इससे बदलाव हो रहे हैं. विचारों के टकराव से समस्याएं पैदा हो रही हैं."

उन्होंने कहा, "इस्लाम इस समय 60 और 70 के दशक के साम्यवाद की तरह दिखता है. जिन लोगों के बारे में बात कर रहे हैं उनके लिए यह एक धर्म से ज्यादा विचारधारा है.”

सीरिया
आशंका है कि दूसरे लोग भी मोहम्मद मेराह के पदचिन्हों पर चल सकते हैं.

आंतरिक मामलों के मंत्री मैन्युअल वाल्स इसे टाइम बम मानते हैं. वो मोहम्मद मेराह का उदारहण देते हैं जिन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामी शिविरों में प्रशिक्षण लिया और फिर लौटकर साल लोगों की हत्या की. वो भी इजार्ड्स इलाक़े में घूमा करते थे.

सज़ा

फ़्रांसीसी सरकार लड़ने के लिए सीरिया गए लोगों को चार साल तक जेल की सज़ा देने पर विचार कर रही है लेकिन साथ ही सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार को गिरते हुए भी देखना चाहती है.

मैंने मैथ्यू गाइडेरे से पूछा कि क्या फ्रांस में ऐसे नेटवर्क हैं जो युवा मुस्लमों को चरमपंथी बना रहे हैं. उन्होंने कहा, “इस बात के कोई सबूत नहीं हैं. निकोलस और ज्यां डेनियल सस्ती एयरलाइनों में सफर करते थे. यह इंटरनेट से प्रभावित होने का मामला है. हमारे पास जो भी ऐसे मामले हैं वे सभी इसी तरह के हैं.”

उन्होंने कहा, “तस्वीरों का अपना प्रभाव होता है. वे अरबी नहीं पढ़ सकते हैं. वे यह भी नहीं समझते कि वीडियो में क्या चल रहा है लेकिन तस्वीरों और वीडियो का ऐसा प्रभाव है कि वे वशीभूत हो जाते हैं. वे इसे नज़रअंदाज नहीं कर सकते और उनमें कुछ कर गुजरने की भावना जोर मारने लगती है.”

गेरार्ड को उम्मीद है कि उनके परिवार का अनुभव दूसरे माता-पिता के लिए एक चेतावनी का काम करेगा. वो अपने बच्चों से बेहद प्यार करते हैं लेकिन वो नहीं जानते कि उनका दूसरा बेटा क्या कर सकता है.

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