मिस्र: 'हिंसा हुई तो चुप नहीं बैठेगी सेना'

  • 19 अगस्त 2013
मिस्र के सेना प्रमुख
सेना प्रमुख ने प्रदर्शनकारियों से राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बनने को कहा है

मिस्र में सेना प्रमुख ने अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी के समर्थकों से कहा है कि देश में ‘सबके लिए स्थान है’ लेकिन अगर हिंसा होती है तो सेना खामोश नहीं रह सकती है.

जनरल अब्दुल फतह अल-सीसी ने प्रदर्शनकारियों से 'देश के पुनर्निर्माण और उसे लोकतांत्रकि रास्ते पर चलाने में योगदान' करने को कहा है.

काहिरा में बुधवार को मोर्सी समर्थकों पर सुरक्षा बलों की गोलीबारी में सैकड़ों लोगों की मौत के बाद सेना प्रमुख ने पहली बार सार्वजनिक बयान देते हुए कहा कि हिंसा की स्थिति में सेना चुप नहीं बैठ सकती है.

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वहीं मोर्सी समर्थक प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वो राजधानी काहिरा में अपने प्रदर्शन जारी रखेंगे. हालांकि पहले खबरें थीं कि प्रदर्शनों के रास्ते पर 'निशांचियों' की तैनाती के मद्देनजर सभी प्रदर्शन रद्द कर दिए गए हैं.

हिंसा जारी

इस बीच मिस्र की सरकारी समाचार एजेंसी मेना ने खबर दी है कि रविवार को देश भर में हुई हिंसा में 79 लोग मारे गए हैं जबकि 549 घायल हुए हैं.

दूसरी तरफ मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंध रखने वाले 36 कैदी भागने के प्रयासों के दौरान मारे गए हैं. ये घटना तब हुई जब उन्हें एक जेल से दूसरी जेल में ला जाया जा रहा था.

जनरल सीसी ने तीन जुलाई को ये कहते हुए मोर्सी को राष्ट्रपति पद से हटा दिया था कि वो उन लाखों लोगों की मांग को अनदेखा नहीं कर सकते हैं जो लोकतांत्रकि रूप से निर्वाचित देश के पहले राष्ट्रपति का इस्तीफा चाहते हैं.

रविवार को सेना और पुलिस अधिकारियों के सामने दिए गए अपने भाषण में जनरल सीसी ने चेतावनी दी कि हालिया अशांति के बाद सेना और हिंसा नहीं होने देगी.

उन्होंने कहा, “हम खामोशी से खड़े होकर देश और इसके लोगों के विनाश को नहीं देख सकते हैं.”

लेकिन सीसी ने ये भी साफ किया कि वो अपने विरोधियों के साथ मेलमिलाप चाहते हैं.

उन्होंने कहा, “हमने इस संकट को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म करने के लिए बहुत मौके दिए हैं और पूर्व सरकार के समर्थकों से पुनर्निर्माण और लोकतांत्रिक रास्ते पर चलने की प्रक्रिया में हिस्सा लेने को कहते हैं, बजाय इसके कि वो टकराव पर कायम रहें और मिस्री राष्ट्र को बर्बाद करें.”

'आतंकवाद से सख्ती से निपटेंगे'

मिस्र में तनाव
मिस्र में प्रदर्शनों के दौरान हिंसा पर दुनिया भर में कड़ी प्रतिक्रिया हुई

मोर्सी समर्थक राष्ट्रपति पद पर अपने नेता की बहाली की मांग कर रहे हैं. बुधवार को प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की कार्वराई में छह सौ से ज्यादा लोग मारे गए जबकि शुक्रवार को भी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया जिसमें 173 लोगों की जान चली गई.

इस बीच रविवार को देश में जारी संकट पर चर्चा के लिए अंतरिम सरकार की बैठक भी बुलाई गई.

बैठक के बाद सूचना मंत्री दोरेया शरफ अल-दीन ने कहा कि कैबिनेट को हालिया प्रदर्शनों में लोगों की मौत पर अफसोस है, लेकिन सरकार 'आंतकवाद' से सख्ती से निपटती रहेगी.

उधर यूरोपीय संघ ने कहा है कि वो अगले हफ्ते एक बैठक कर मिस्र के साथ अपने रिश्तों की समीक्षा करेगा.

यूरोपीय परिषद और यूरोपीय आयोग के प्रमुखों ने कहा कि हिंसा और हत्याओं को न तो उचित ठहराया जा सकता है और न ही इन्हें माफ किया जा सकता है.

यूरोपीय संघ ने मिस्र को अरबों यूरो की मदद और ऋण देने का संकल्प जताया है.

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