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उस स्वर्ग में नहीं जाऊंगा,जहाँ समलैंगिक न हों:टूटू

 रविवार, 28 जुलाई, 2013 को 19:55 IST तक के समाचार
डेसमंड टूटू

डेसमंड टूटू लंबे समय से समलैंगिकता के समर्थन में आवाज़ उठाते रहे हैं.

शांति का नोबल पुरस्कार प्राप्त दक्षिण अफ्रीका के रिटायर्ड आर्चबिशप डेसमंड टूटू ने कहा है कि वे समलैंगिकता के खिलाफ़ रहने वाले ईश्वर की कभी पूजा नहीं करेंगे.

वे समलैंगिक अधिकारों को प्रोत्साहन देने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से केपटाउन में हुए एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.

इसी कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार कमिश्नर नवी पिल्लई ने कहा कि भले ही दक्षिण अफ्रीका में समलैंगिक शादियों की मान्यता है, लेकिन यहाँ समलैंगिकों के खिलाफ़ हिंसा के सबसे ख़तरनाक मामले सामने आए हैं.

नवी पिल्लई के मुताबिक़ अब भी दुनिया के एक तिहाई देशों में समलैंगिक शादियां अपराध मानी जाती हैं और इनके लिए मौत की सज़ा तक का प्रावधान है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक़ अब भी अफ्रीका के 38 देशों में समलैंगिकता अपराध की श्रेणी में आती है.

ग़ौरतलब है कि 81 वर्षीय आर्चबिशप डेसमंड टूटू समलैंगिक अधिकारों के लिए लंबे वक्त से आवाज़ उठाते रहे हैं. वे केपटाउन के आर्चबिशप पद से 1996 में रिटायर हुए थे, लेकिन अभी भी उन्हें राष्ट्र की अंतरआत्मा की आवाज़ माना जाता है.

रंगभेद जैसी है समलैंगिकों के खिलाफ़ हिंसा

अफ्रीकी समलैंगिक

दक्षिण अफ्रीका में समलैंगिकता को क़ानूनी मान्यता प्राप्त है लेकिन फिर भी यहाँ समलैंगिकों के खिलाफ़ हिंसा के मामले आते रहते हैं.

केपटाउन में फ्री एंड इक्वल (स्वतंत्र और समान) अभियान की शुरुआत के मौके पर टूटू ने कहा, "समलैंगिकता के खिलाफ़ रहने वाले भगवान के स्वर्ग के बजाय मैं किसी और जगह जाना पसंद करूंगा. मैं कभी ऐसे भगवान की पूजा नहीं करूंगा, जो समलैंगिकों के खिलाफ़ है. इसे मैं बहुत गंभीरता से महसूस करता हूँ."

उन्होंने यह भी कहा कि समलैंगिकों के खिलाफ़ हिंसा के खिलाफ़ चल रहा अभियान अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ़ चले अभियान जैसा ही है.

टूटू ने कहा, "मैं इस अभियान के लिए साथ भी उसी तरह जुड़ा हूँ, जिस तरह रंगभेद के खिलाफ़ चले अभियान के साथ था. मेरे लिए यह भी रंगभेद जैसा ही मामला है."

पिल्लई का कहना है कि अफ्रीका में 1994 में रंगभेद खत्म होने के बाद से यहाँ समलैंगिकों के पास दुनिया में सबसे बेहतर अधिकार हैं, लेकिन फिर भी उन पर ख़तरनाक हमले होते हैं.

टॉयलेट ब्रश से हमला

पिछले महीने एक समलैंगिक महिला पर टॉयलेट ब्रश से यौन हमला करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी. समाचार एजेंसी एएफ़पी की रिपोर्ट के मुताबिक़ पिल्लई ने कहा,"लोग यहाँ अपने प्यार की कीमत अपनी जान देकर चुका रहे हैं."

पिल्लई ने कहा कि जिन देशों में समलैंगिकों को अधिकार ही नहीं हैं, वहाँ उन्हें अधिकार दिलवाने के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रयास करेगा.

उन्होंने कहा. "अक्सर सरकारें हमसे कहती हैं कि यह हमारी संस्कृति से जुड़ा मामला है और इसमें हम कुछ नहीं कर सकते. इसलिए इस मामले में हमें बहुत काम करना है."

आर्चबिशप डेसमंड टूटू को अफ्रीका में गोरे लोगों के शासन के खिलाफ़ अभियान चलाने के लिए 1984 में शांति के नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा गया था.

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