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सीरिया संघर्षः क्या हैं अमरीका के 5 विकल्प?

 मंगलवार, 23 जुलाई, 2013 को 19:06 IST तक के समाचार
सीरिया

अमरीका में सीनेट जनरल डेम्प्से को फिर से नियुक्त करने पर विचार विमर्श कर रही है.

अमरीका के शीर्ष सैन्य कमांडर ने सीरिया संघर्ष में अमरीकी सैनिकों की संभावित भागीदारी में होने वाले ख़र्चे, जोख़िम और फ़ायदों का एक खाका तैयार किया है.

जॉइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ के प्रमुख जनरल मार्टिन डेम्प्सी ने पांच विकल्प सुझाए हैं. इनमें क्लिक करें सीमित हमलों के साथ-साथ उसे ‘उड़ान पर पाबंदी’ वाला क्षेत्र घोषित करने का भी सुझाव शामिल है.

साथ ही, डेम्प्सी का कहना है कि क्लिक करें सीरिया में बल का प्रयोग करना “किसी युद्ध से कम नहीं” साबित होगा और इसमें अरबों डॉलर खर्च हो सकते हैं.

अमरीका ने सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप की संभावनाओं से अब तक इनकार किया है.

सीमित भूमिका

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2011 से अब तक सीरिया के करीब 17 लाख नागरिकों के मजबूरन आस पास के देशों में शरण लेनी पड़ी है.

फ़िलहाल अमरीका ने पड़ोसी मुल्कों में पनाह लिए हुए क्लिक करें सीरियाई शरणार्थियों को मानवीय सहायता पहुंचाने तक अपनी भूमिका सीमित रखी है. साथ ही, वह सीरियाई विपक्ष को बिना हथियारों वाली सहायता देने का भी काम कर रहा है.

सीनेटरों को लिखे गए क्लिक करें खुले खत में जनरल डेम्प्सी ने पांच सैन्य विकल्पों की पड़ताल की है. अमरीकी सेना इन विकल्पों की शुरुआत सीरिया में कर सकती है.

इन पांच विकल्पों में पहला है- प्रशिक्षण, सलाह और विपक्ष को सहायता. दूसरा विकल्प है- सीमित हमलों की योजना.

तीसरा विकल्प 'उड़ान पर पाबंदी' वाले एक इलाक़े का निर्माण करने से संबंधित है. चौथा विकल्प है- सीरिया के भीतर 'प्रतिरोधक क्षेत्र' की स्थापना और पांचवां और सबसे आखिरी विकल्प है सीरियाई रासायनिक हथियारों को नियंत्रित करना.

'युद्ध' जैसा जोखिम भरा

"सीरिया में सैन्य बल का प्रयोग करने के फैसले को हल्के में नहीं लिया जा सकता. यह किसी युद्ध से कम साबित नहीं होगा."

जनरल डेम्प्सेः शीर्ष अमरीकी अधिकारी

जनरल डेम्प्सी का आकलन है कि पहले विकल्प में एक साल में 50 करोड़ डॉलर खर्च होंगे जबकि बचे चार विकल्पों में मोटे तौर पर एक अरब डॉलर प्रति महीने की लागत आएगी.

उन्होंने खुले खत में लिखा है, “बल का प्रयोग करने के फैसले को हल्के में नहीं लिया जा सकता. यह किसी 'युद्ध' से कम नहीं है.”

जनरल डेम्प्सी ने माना कि इन कदमों को यदि अमल में लाया जाए तो सीरिया का विपक्ष मज़बूत होगा, साथ ही राष्ट्रपति क्लिक करें बशर-अल-असद पर थोड़ा दबाव बनाया जाना संभव होगा.

पिछले हस्तक्षेप से सबक

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2011 में शुरु हुई बगावत में सीरिया में अब तक 90,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

साथ ही जनरल ने आगाह किया है कि अमरीका को अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में किए गए अपने पिछले हस्तक्षेपों से सबक भी लेना होगा.

उन्होंने कहा, “अपने पिछले 10 सालों के अनुभव से हम कह सकते हैं कि राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए बिना ढंग से सोचे विचारे सेना की ताकत का इस्तेमाल पर्याप्त साबित नहीं होगा.”

यूएन के अनुसार सीरिया में 2011 में राष्ट्रपति असद के ख़िलाफ़ शुरू हुई बगावत में अब तक 90,000 से ज़्यादा लोग संघर्ष के दौरान मारे गए हैं.

इसके अलावा अब तक करीब 17 लाख नागरिकों को मजबूरन आस-पास के देशों में शरण लेनी पड़ी है.

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