‘सउदी राजकुमारी’ तस्करी के आरोप में ग़िरफ़्तार

  • 12 जुलाई 2013
सउदी राजकुमारी बताई जा रही इस महिला को 50 लाख डॉलर में ज़मानत मिली

सउदी अरब की राजकुमारी बताई जा रही एक महिला को कैलिफॉर्निया में मानव तस्करी के आरोप में ग़िरफ़्तार किया गया है.

मेशैल अलेबान नाम की इस 42 वर्षीय महिला पर आरोप है कि उन्होंने कीनिया की एक महिला को हर दिन 16 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया और पूरी तन्ख्वाह भी नहीं दी.

अधिकारियों का कहना है कि मेशैल ने इस महिला का पासपोर्ट छीन लिया ताकि वो काम छोड़ कर जा भी न पाए.

हालांकि उनके वकील का कहना है कि ये मामला केवल काम करने के घंटों को लेकर हुआ विवाद है.

गत नवंबर में कैलिफॉर्निया में मानव तस्करी से जुड़ी सज़ा को और कड़ा किया गया था.

अगर मेशैल इस मामले में दोषी पाई जाती हैं, तो उन्हें 12 साल की अधिकतम कारावास की सज़ा हो सकती है.

नवंबर से पहले इस सज़ा की अवधि केवल छह साल थी, जिसे बढ़ा कर 12 साल कर दिया गया था.

'ग़ुलामी'

अभियोजक पक्ष का कहना है कि मेशैल सउदी शाही परिवार के राजकुमार अब्दुल रहमान बिन नासीर बिन अब्दुल अल-सउद की छह पत्नियों में से एक हैं.

कीनिया से आई महिला ने मेशैल के साथ पिछले साल सउदी अरब में काम शुरू किया था.

उन्हें दो साल की नौकरी का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था, जिसके तहत उन्हें हर महीने 1,600 डॉलर की तन्ख्वाह दी जानी थी और उन्हें हफ्ते में पांच दिन आठ घंटे की नौकरी करनी थी.

लेकिन अधिकारियों के मुताबिक उन्हें महीने के केवल 220 डॉलर दिए जाते थे और हर दिन 16 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया जाता था.

30 वर्षीय नौकरानी का आरोप है कि सउदी अरब से कैलिफॉर्निया आने के बाद उनका पासपोर्ट भी उनसे छीन लिया गया.

उन्होंने बताया कि कैलिफॉर्निया में हर दिन कम से कम आठ लोगों के लिए उनसे काम करवाया जाता था. ये आठ लोग आसपास के चार फ्लैट में रहते थे.

वे किसी तरह वहां से भाग निकली और पुलिस विभाग में शिकायत दर्ज की.

ज़मानत

उनकी मालकिन मेशैल अलेबान को बुधवार को ग़िरफ़्तार किया गया.

कीनियाई महिला के वकील स्टीव बैरिक ने कहा, “मेरे मुवक्किल को गुलाम बना कर रखा गया. उन्हें अपनी मर्ज़ी से कहीं जाने की इजाज़त नहीं थी. उन्हें डराया-धमकाया गया. उनसे सउदी अरब में जो वायदे किए गए वो यहां आकर पूरी तरह तोड़ दिए गए. उनसे कम पैसे में ज़्यादा काम करवाया गया.”

ऑरेंज काउंटी के अटॉर्नी टोनी राकॉकस ने इस मामले को ‘ज़बर्दस्ती मजदूरी’ करवाने का उदाहरण बताया.

उन्होंने कहा, “150 साल पहले ही अमरीका में गुलामी को अवैध करार दे दिया गया था. ऐसे उदाहरण का सामने आना एक निराशाजनक बात है.”

मेशैल अलेबान ने गुरुवार को अदालत में अपनी अपील नहीं डाली. 50 लाख डॉलर जमा करवाने के बाद उन्हें ज़मानत दे दी गई, लेकिन उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया है और उन्हें एक जीपीएस डिवाइस पहनने का आदेश दिया गया है.

हालांकि अभियोजक पक्ष का कहना था कि उनकी धन-दौलत को देखते हुए उन्हें दो करोड़ डॉलर देने पर ही ज़मानत मिलनी चाहिए.

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