जीन थेरेपी से बच्चों का सफल इलाज

  • 27 जुलाई 2013
जीन थेरेपी से होगा बच्चों का सफ़ल इलाज

बच्चों के डीएनए में सुधार करके उन्हें चलने और बात करने की क्षमता पर असर डालने वाली बीमारियों से निजात दिलाई जा सकेगी. जीन थेरेपी की मदद से तीन बच्चों का कामयाब इलाज किया गया.

तीनों बच्चे मेटाक्रोमेटिक ल्यूकोडिस्ट्रॉफ़ी से पीड़ित थे.

एक दूसरे अध्ययन में यह बात सामने आई है कि प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाली गंभीर आनुवांशिक बीमारी भी जीन थेरेपी की मदद से दूर की जा सकती है.

अनुवांशिक कोड में गड़बड़ी?

जीन थेरेपी शोधकर्ताओं के अनुसार यह वाकई उत्साहित करने वाला आविष्कार है. उनके मुताबिक चलने और बोलने पर असर डालने वाली चीज़ें व्यक्ति के आनुवांशिक कोड में गड़बड़ी के कारण होती हैं.

मेटाक्रोमेटिक ल्यूकोडिस्ट्रॉफ़ी के साथ पैदा हुए बच्चे वैसे तो स्वस्थ दिखाई देते हैं, लेकिन एक या दो साल में उनका मस्तिष्क नष्ट होना शुरू हो जाता है.

विस्कॉट एल्ड्रिच सिंड्रोंम बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर डालना शुरू कर देता है. इस वजह से उनमें दूसरे संक्रमण, कैंसर जैसी और बीमारियां होने का ख़तरा और बढ़ जाता है.

इटली के सैन राफ़ेल वैज्ञानिक संस्थान में मरीज के जीन में मौजूद हानिकारक बदलावों को ठीक करने के लिए आनुवांशिक रूप से परिवर्तित वायरस का प्रयोग किया गया.

इस प्रक्रिया में मरीज़ की अस्थिमज्जा से मूल कोशिका को ले लिया जाता है और फिर सुरक्षित डीएनए के छोटे टुकड़े के साथ मिलाकर मरीज़ के शरीर में वापस डाल दिया जाता है.

मेटाक्रोमेटिक ल्यूकोडिस्ट्रॉफ़ी के इतिहास वाले विभिन्न परिवारों के इन तीन बच्चों को उनके मस्तिष्क के खराब होने से पहले ही इलाज के लिए चुना गया.

नये दौर की शुरुआत

डॉक्टर एलएन जेंड्रा बिफी ने बीबीसी को बताया, ''शोध के परिणाम बहुत सकारात्मक रहे हैं. तीनों बच्चे बिल्कुल स्वस्थ हैं और अब स्कूल जा रहे हैं. यह वाकई हमारे लिए बहुत ख़ुशी देने वाला पल है. परिणाम बताते हैं कि यह इलाज पूरी तरह से सुरक्षित था.''

डॉक्टर एलएन जेंड्रा कहती हैं कि जीन थेरेपी वह प्रक्रिया है, जिसकी सुरक्षा के बारे में सवाल उठाकर हमेशा बाधाएं पैदा की गई हैं.

डॉ. बिफी का कहना है, ''हमने पिछली असफलताओं से सबक लिया है. जीन थेरेपीमें बहुत से सुधार हो सकते हैं और भविष्य में नई खोजें करके चिकित्सा जगत में नए दौर की शुरुआत की जा सकती है.''

विज्ञान पत्रिका में छपे एक और शोध में कहा गया है कि इन तीन मरीजों में संक्रमण और एग्जिमा जैसे रोगों के लक्षण काफ़ी कम थे.

लंदन के ग्रेट ऑर्म्ड स्ट्रीट अस्पताल के प्रोफ़ेसर बॉबी गेस्पर जीन थेरेपी का इस्तेमाल प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत करने के लिए कर रहे हैं.

प्रोफ़ेसर गेस्पर ने बीबीसी को बताया, ''मेटाक्रोमेटिक ल्यूकोडिस्ट्रॉफ़ी बहुत बड़ी तंत्रिका विकृति है, जिसे दूर करने का कोई और इलाज नही हो सकता. अब इस खोज से इनके मरीज सामान्य ज़िंदगी जी सकते हैं. इससे यह साबित होता है कि दूसरी लाइलाज बीमारियों का इलाज भी मुमकिन है.''