सुर ही नहीं धड़कनें भी एक हैं इनकी !

  • 10 जुलाई 2013
समूह गायक
गायकों के साँस लेने की प्रक्रिया का असर उनके दिल की धड़कनों पर होता है.

एक समूह में गाने वाले गायकों की आवाज़ें सुनकर ये तो समझ में आता है कि ये गायक इस क़दर सुर में सुर मिलाकर गाते हैं कि अलग-अलग आवाज़ें एक हो जाती हैं लेकिन अगर आपसे कहा जाए कि इन गायकों की धड़कनें भी एक हो जाती हैं तो क्या आप यक़ीन करेंगे?

स्वीडन में हुए एक शोध के नतीजे तो यही बताते हैं कि एक साथ मिलकर गाने वाले गायकों की आवाज़ें ही नहीं दिल की धड़कनें भी एक गति में बढ़ती और घटती हैं. ये शोध फ्रंटियर्स इन न्यूरोसाइंस नामक एक जर्नल में छपा है.

गाने का असर धड़कन पर

कॉयर गायक यानी गिरजाघर में एक समूह में मिलकर गाने वाले गायकों पर किए गए शोध के ज़रिए ये पता चला है कि सुर में सुर मिलाने वाले इन गायकों का शरीर भी इससे प्रभावित होता है.

ये शोध स्वीडन के गॉथरबर्ग विश्वविद्यालय के डॉक्टर ब्यॉर्न विकॉफ़ की अगुआई में हुआ है.

शोधकर्ताओं ने गायक-समूह की प्रस्तुति के दौरान उनकी धड़कनों पर नज़र रखी जिससे पता चला कि उनकी धड़कनों की गति एक साथ बढ़ती और घटती है.

वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी वजह गायन के दौरान इन गायकों के साँस लेने का तरीक़ा है. एक साथ गाने के लिए इन्हें एक तरह से साँस लेनी और छोड़नी पड़ती है जिसका असर उनके दिल की धड़कनों पर पड़ता है.

शोधकर्ताओं को ये भी पता चला है कि साँस लेने की इस तरह की नियंत्रित प्रक्रिया से दिल के धड़कनों की गति कम हो जाती है. माना जा रहा है कि इस शोध के नतीजों का इस्तेमाल उच्च रक्तचाप की समस्या से निजात दिलाने में मददगार हो सकता है.

(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे फ़ेसबुक पन्ने पर भी आ सकते हैं और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)