पाक-चीन के बीच 2000 किमी लंबा 'आर्थिक गलियारा'

  • 6 जुलाई 2013
पाकिस्तान और चीन अतिमहत्वाकांक्षी परियोजना पर काम कर रहे हैं.

चीन और पाकिस्तान दो हज़ार किलोमीटर लंबा आर्थिक गलियारा बनाने पर सहमत हो गए हैं. दोनों देशों की यह अति महत्वाकांक्षी योजना है.

2000 किलोमीटर लंबा गलियारा एक दीर्घकालीन परियोजना है जिसके तहत उत्तरपश्चिमी चीन में काशगर और पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को पहले सड़क और फिर रेल के ज़रिए जोड़ा जाएगा.साथ ही पाइपलाइन भी होगी.

यह कराकोरम पर्वत श्रृंखला से होकर गुजरेगा.

यह 'आर्थिक गलियारा' चीन और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों को एक-दूसरे से जोड़ेगा और दो देशों के क्षेत्रीय दूरसंचार, परिवहन और आर्थिक ढाँचे का विकास करेगा.

पाकिस्तान और चीन दोनों का मानना है कि इस आर्थिक गलियारे से दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार में काफी समय की बचत होगी.

शहद से ज़्यादा मीठे संबंध

दोनों देश 'आर्थिक गलियारा' बनाने के लिए सँयुक्त आर्थिक सहयोग आयोग के गठन पर भी सहमत हैं. इस आयोग का उद्देश्य पारस्परिक रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को मज़बूत बनाना होगा.

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चून-इन ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक शुक्रवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और चीनी प्रधानमंत्री ली कचियांग के बीच मुलाक़ात के बाद दोंनो देशों के बीच "आर्थिक गलियारे" पर सहमति समेत आठ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए.

शुक्रवार को प्रधानमंत्री शरीफ़ ने चीन के प्रधानमंत्री ली कचियांग के साथ द्विपक्षीय सहयोग के विकास से जुड़े सवालों पर भी विस्तार से बातचीत की .

नवाज़ शरीफ़ ने इस चीन यात्रा के दौरान कहा कि दोनों देशों के संबंध शहद से ज्यादा मीठे हैं.

आर्थिक मदद मुख्य मुद्दा

चीन और पाकिस्तान के बीच इस आर्थिक गलियारे के महत्व के बारे में बीजिंग में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार सैबल दासगुप्ता कहते हैं,"गत चार-पांच साल से पाकिस्तान इस आर्थिक गलियारे की बात कर रहा है, चीन की तरफ़ से एक-दो बार इसका ज़िक्र हुआ था लेकिन चीन ने इस बारे में कभी कुछ खुलासा नहीं किया. इस बार गुरुवार से शुक्रवार के बीच पाकिस्तानी मंत्री और प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने इसका बार-बार पाकिस्तानी मीडिया में उल्लेख किया है. लेकिन चीन की तरफ़ से हमारे रिश्ते मज़बूत हैं या हम भाई हैं, इस तरह की टिप्पणियों के अलावा कुछ नहीं कहा है."

सैबल कहते हैं कि पाकिस्तान चाहता है कि चीन इस गलियारे को बनाने के अलावा कुछ और योजनाओं के लिए भी आर्थिक मदद दे. इनमें ग्वादर में एक अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा बनाना, वहां मौजूद बंदरगाह को और बड़ा बनाने और कराकोरम एक्सप्रेस हाईवे को मज़बूत करवाना शामिल है.

लेकिन इस चीनी दौरे में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की सबसे ज़्यादा दिलचस्पी चीन से आर्थिक मदद लेने में है.

सैबल दासगुप्ता कहते हैं, "गुरुवार को नवाज़ शरीफ़ चीन विकास बैंक और चीन निवेश कॉर्पोरेशन प्रमुखों से मिले और नकद मांगा क्योंकि पाकिस्तान आर्थिक तंगी से गुज़र रहा है. शरीफ़ की दिलचस्पी इस वक्त चीन से सिर्फ़ आर्थिक मदद लेने में है. भारत की बात वो कर ही नहीं रहे हैं. वो सिर्फ़ पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलों को ख़त्म करने में चीन की मदद मांग रहे हैं और चीन को हल्का सा डरा भी रहे हैं कि अगर वो पाकिस्तान की मदद नहीं करेगा तो उसे अमरीका से मदद मांगनी पड़ेगी."

महत्वपूर्ण है कि जिस वक्त नवाज़ शरीफ के साथ चीन ने समझौते किए, उसी दौरान भारत के रक्षा मंत्री एंटनी भी चीन दौरे पर हैं

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