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मिस्र: मुख्य न्यायाधीश बने अंतरिम राष्ट्रपति

 गुरुवार, 4 जुलाई, 2013 को 17:39 IST तक के समाचार

मिस्र के मुख्य न्यायाधीश अदली मंसूर ने देश के अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली है.

शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने अदली मंसूर ने सरकारी टीवी पर लोगों को संबोधित किया.

अदली मंसूर ने सेना और मिस्र के लोगों की सराहना की और कहा कि “शासक की अराधना” का वक्त ख़त्म हो जाना चाहिए.

मिस्र की चुनी हुई मुर्सी सरकार को अपदस्थ करने के बाद नया संविधान बनाने की सेना की योजना का यह पहला चरण है.

संसद के राष्ट्रपति के हाथ में असीमित शक्तियां दिए जाने के बाद पिछले साल से ही मुर्सी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहे थे.

मुर्सी को उनके घर में ही नज़रबंद कर लिया गया है. मुस्लिम ब्रदरहुड अभियान ने मुर्सी सरकार की बर्खास्तगी को तख्ता पलट की संज्ञा दी है.

गिरफ़्तारियां

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जैसे ही सेना में संविधान स्थगित करने और नए चुनाव करवाने की घोषणा की, मुर्सी विरोधी रात को ही काहिरा के तहरीर चौक पर पटाखे फोड़कर और कारों के हॉर्न बजा कर जश्न मनाने लगे.

एक प्रदर्शनकारी उमर शरीफ़ ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को कहा, “यह एक ऐतिहासिक पल है. हमें मुर्सी और मुस्लिम ब्रदरहुड से निजात मिल गई है.”

जनरल सीसी के संबोधन के तुरंत बाद सैन्य वाहन शहर भर में फैल गए थे. लेकिन बुधवार रात को ही मुर्सी समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच काहिरा और एलेक्ज़ेंड्रिया में संघर्ष शुरू हो गया, जिसमें कई लोग मारे गए.

रविवार से जारी तनाव के चलते अब तक करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है. देश के पहले लोकतान्त्रिक तरीके से चुने गए राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के खिलाफ नवम्बर 2012 से ही जनता में असंतोष बन रहा था.

देश के नए संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए मुर्सी ने अपने हाथ में अपार शक्तियां ले ली थीं. लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद वह अपनी शक्तियों को सीमित करने पर राज़ी भी हो गए थे.

पिछले महीने के अंत में संसंद द्वारा जल्दबाजी में तैयार किये गए संविधान के मसौदे को मंज़ूरी दिए जाने के बाद और प्रदर्शन हुए. इनमें उदारवादियों के साथ धर्मनिरपेक्ष और कॉप्टिक चर्च के समर्थक भी शामिल हुए.

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मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रवक्ता गेहाद अल-हद्दाद ने बीबीसी को बताया कि अपदस्थ राष्ट्रपति को घर में ही नज़रबंद कर दिया गया है और “राष्ट्रपति की पूरी टीम” को कैद कर लिया गया है.

मुर्सी के वरिष्ठ साथियों हद्दाद के पिता एसाम अल-हद्दाद और अभियान की राजनीतिक शाखा के प्रमुख साद अल-कतानी भी कैद लोगों में शामिल हैं.

मुर्सी के फ़ेसबुक पेज पर सैन्य तख़्तापलट की आलोचना की गई. उन्होंने सेना पर सिर्फ़ “एक पक्ष का साथ” देने का आरोप लगाया.

इसमें मिस्र के लोगों का आह्वान किया गया कि वह, “संविधान और कानून को मानें और तख्तापलट का साथ न दें.”

सरकारी अख़बार अल-अहराम के अनुसार मुस्लिम ब्रदरहुड के 300 नेताओं के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी के वारंट जारी किए गए हैं.

मुस्लिम ब्रदरहुड के टीवी चैनल मिस्र 25 का प्रसारण बंद हो गया और सरसारी न्यूज़ एजेंसी मीना के अनुसार उसके मैनेजर को गिरफ़्तार कर लिया गया.

चर्चा शुरू

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बुधार को राष्ट्रीय टेलीविज़न पर जारी अपने संदेश में सेना प्रमुख जनरल अब्देल फ़तह अल-सीसी ने कहा कि अंतरिम सरकार नए राष्ट्रपति का चुनाव होने तक काम करेगी.

जनरल सीसी ने कहा कि मिस्र के पहले स्वतंत्र रूप से चुने गए नेता “लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति करने में विफल रहे हैं.”

जनरल सीसी ने कहा कि सेना मिस्र के लोगों की पुकार को अनसुना नहीं कर सकती.

उन्होंने भविष्य के लिए एक नई योजना के बारे में बात की और कहा कि मंसूर को “नए राष्ट्रपति के चुनाव तक के परिवर्तन काल के दौरान देश को चलाने की ज़िम्मेदारी” दी जाएगी.

जनरल सीसी के संबोधन के बाद कॉप्टिक चर्च के प्रमुख पोप टोवाड्रोस द्वितीय और प्रमुख विपक्षी नेता मोहम्मद अल बारादेई ने अपने संक्षिप्त टीवी संबोधन में मिस्र के भविष्य की उस योजना की चर्चा की जिस पर उनकी सेना से सहमति बनी है.

अल बारादेई ने कहा कि भविष्य की योजना राष्ट्रीय सामंजस्य और जनवरी 2011 की क्रांति को लेकर एक नई शुरूआत है.

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क्लिक करें पोप टोवाड्रोस ने कहा, “इस योजना का ख़ाका उन सम्मानित लोगों द्वारा तैयार किया गया है जो सबसे पहले और सबसे ज़्यादा सिर्फ़ देश का हित चाहते हैं.”

विपक्ष के नेता और अरब लीग के पूर्व प्रमुख अमर मूसा ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताय कि सरकार और सामंजस्य के लिए चर्चा “अब शुरू होगी”.

अमरीका चिंतित

इससे पहले मुर्सी को दी गई सेना की चेतावनी बुधवार दोपहर समाप्त हो गई थी. सेना ने कहा था कि मुर्सी 'लोगों की माँगें मानें' या सैन्य हस्तक्षेप के लिए तैयार रहें.

मिस्र सरकार के ख़िलाफ़ कई दिन तक लोगों के प्रदर्शनों के बाद सेना ने यह कदम उठाया.

प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति और मुस्लिम ब्रदरहुड पर देश पर इस्लामी कार्यक्रम थोपने और मिस्र की आर्थिक दिक्कतों को दूर कर पाने में विफल रहने का आरोप लगा रहे थे.

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काहिरा में बीबीसी के केविन कोनोली कहते हैं राष्ट्रपति प्रदर्शनकारियों को यह भरोसा देने में नाकाम रहे कि वह तेज़ी से फैल रही गरीबी को मिटाने के लिए काम कर रहे हैं.

वहीं अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि ताज़ा घटनाक्रम को लेकर वे "बेहद चिंतित" हैं. उन्होंने जल्द से जल्द नागरिक शासन बहाल करने की उम्मीद जताई है.

काहिरा में बीबीसी संवाददाता कोनोली कहते हैं कि कोई नहीं जानता कि आगे क्या होगा. ख़तरा यह है कि दोनों पक्ष सड़कों पर अपने समर्थकों के साथ मामले को सुलटाने की कोशिश करेंगे.

सेना का कहना है वह ऐसा नहीं होने देगी लेकिन बीबीसी संवाददाता के अनुसार इसे रोकना आसान नहीं होगा.

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