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टीवी शो में चुने गए 'राष्ट्रपति'

 शनिवार, 29 जून, 2013 को 18:01 IST तक के समाचार

यह राष्ट्रपति केवल प्रतीकात्मक हैं.

फ़लस्तीनी जनता ने बुधवार को एक टीवी रिएलिटी शो के ज़रिए अपना नया ‘राष्ट्रपति’ चुना है.

इस टीवी शो में चुना गया यह ‘राष्ट्रपति’ केवल प्रतीकात्मक है.

जाने माने टीवी चैनल मअन के इस कार्यक्रम में 31 वर्षीय हुसैन अल-दीक को सबसे ज़्यादा वोट मिले. हुसैन रामल्लाह के निवासी हैं.

हुसैन ने इस शो में 1200 नौजवान प्रतिभागियों को पीछे छोड़ कर जीत हासिल की.

उन्हें इनाम में एक कार मिलेगी और वो गैर-आधिकारिक फ़लस्तीनी राजदूत के रूप में यात्राएँ करेंगे.

हुसैन ने बीबीसी को बताया, “मैं पूरी दुनिया को संदेश देना चाहता हूँ. फ़लस्तीनी लोगों को एक स्वतंत्र फ़लस्तीन चाहिए. हमें दुनिया के दूसरे देशों की तरह ही आज़ादी चाहिए. हम चाहते हैं कि हमारी ज़मीन पर क़ब्ज़ा बंद हो.”

ओस्लो शांति समझौते के बीस साल बाद अब तक स्वतंत्र फ़लस्तीनी देश नहीं बन सका है.

लोकतांत्रिक प्रक्रिया

अपने आभासी चुनाव प्रचार में हुसैन ने कहा था कि वो क्लिक करें पश्चिमी तट पर इसराइल के क़ब्ज़े के शांतिपूर्ण विरोध को बढ़ावा देंगे.

यह कार्यक्रम टीवी पर मार्च से दिखाया जा रहा था. प्रतियोगिता में भाग लेने वाले उम्मीदवारों को विभिन्न चरणों से गुजरना पड़ा.

फ़लस्तीन के कई राजनेताओं इस प्रतियोगिता में निर्णायक थे.

इन प्रतिभागियों को हर हफ्ते इसराइली बस्तियों, संकट से घिरी अर्थव्यवस्था और मध्य-पूर्व के घटनाक्रम पर वरिष्ठ फ़लस्तीनी राजनेताओं के सवालों के जवाब देने पड़ते थे.

फ़लस्तीनी सांसद हनान असरावी भी इस प्रतियोगता के जजों में एक थीं.

असरावी ने कहा, “मुझे लगा कि यह जीता-जागता लोकतंत्र है. यह नौजवानों के सशक्त बनाने का साधन है. यह सीखने वाला अनुभव है. इससे नौजवानों को यक़ीन आएगा कि वो सचमुच परिवर्तन ला सकते हैं.”

आठ साल से चुनाव नहीं

पिछले आठ साल से क्लिक करें फलस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति का चुनाव नहीं हुआ है.

मौजूदा राष्ट्रपति महमूद अब्बास जहां तंग आर्थिक हालात और अंदरूनी राजनीतिक गुटबाजी का सामना कर रहे हैं, वहीं इसराइल के साथ क्लिक करें शांति वार्ता भी गतिरोध का शिकार है.

फ़लस्तीन के सीमित स्वशासन के पिछले बीस सालों में अभी तक केवल दो बार राष्ट्रपति चुनाव हो सके हैं. वर्तमान राष्ट्रपति महमूद अब्बास अपना कार्यकाल ख़त्म होने के कई साल बाद भी पद पर बने हुए हैं.

अरब क्रांति के दौरान मध्य-पूर्व में लम्बे समय से काबिज कई शासकों को सत्ता छोड़नी पड़ी लेकिन फ़लस्तीनी क्षेत्र अभी भी राजनीतिक गतिरोध में फंसा हुआ है.

दो मुख्य दलों फतह और हमास के बीच मतभेद होने के कारण फ़लस्तीन में चुनाव नहीं हो पाए हैं.

फतह का पश्चिमी तट में प्रभाव है वहीं गाज़ा पट्टी में हमास का शासन है.

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