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'इन हकीमों के पास हर मर्ज़ की दवा है'

 गुरुवार, 20 जून, 2013 को 07:41 IST तक के समाचार
  • तंजानिया
    तनजानिया और अफ़्रीका में कई लोग परंपरागत विधियों के सहारे चिकित्सा करते हैं. इनसे दुनिया भर के लोग संपर्क साधते हैं ताकि उनकी बीमारी दूर हो. कई लोग तो गुड लक चार्म के चलते ही ऐसे चिकित्सकों से संपर्क साधते हैं. जंगली औषधियों के सहारे ये लोग पश्चिमी इलाज विधि के सामने अच्छा काम कर रहे हैं. फोटोग्राफ़र सासजा वान वेकेघल ने इनमें से कुछ लोगों से मुलाकात की. तस्वीर में नजर आ रहे चिकित्सक की उम्र अस्सी साल हो चुकी है. लेकिन वे आज भी अपने पेशे से जुड़े हैं. इन चिकित्सकों के लिए बने ख़ास गांव किटाला में उनसे इलाज करने लोग दूर दराज के इलाकों से पहुंचते हैं.
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    तंजानिया में बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं इस तरह से लोगों को चंगा करने का काम करते हैं. पूरे देश में इस पेशे को सम्मान की नजर से देखा जाता है. 40 साल का ये हकीम लकवा को ठीक करने के लिए मशहूर हो चुका है. वह अपनी दवाईयों के साथ मरीज़ के घर-घर पहुंच कर उनका इलाज करते हैं. हालांकि इनके इलाज करने की विधि वैज्ञानिक नहीं है, बावजूद इसके बड़ी संख्या में लोग इस विधि पर भरोसा करते हैं.
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    परंपरागत तौर पर ऐसे इलाज़ में कई पहलू शामिल होते हैं. पारंपरिक विधि हो या फिर कोई दूसरा आरामदेह तरीका हो या फिर दवा देना हो. यहां के हकीम हर तरकीब अपनाते हैं. कई हकीम झाड़ फूंक का सहारा भी लेते हैं. 88 साल के इस हकीम का कहना है, "मैं अपने साथ एक बोतल रखता हूं. ये मेरे लिए बेहद अहम है." इसमें वे एक तरल पदार्थ डालते हैं. स्थानीय उड़हुल का फूल और अन्य श्रृंगार का समान भी. मरीज से बातचीत के दौरान वे अपनी बोतल को हिलाते हैं और इससे वे ये पता लगाते हैं कि मरीज को किस तरह के इलाज की जरूरत है.
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    इस मरीज का अभी अभी इलाज हुआ है. इनके शरीर की कई हड्डी टूट गई थी. इनके इलाज के दौरान हकीम ने कुछ स्थानीय पौधों की पत्तियों को पीस कर उसका लेप प्रभावित जगह पर लगाया. हालांकि कई बार ऐसे चिकित्सक दर्द निवारण के लिए पैरासिटामोल का भी इस्तेमाल करते हैं और कई बार एक्स रे का उपयोग भी करते हैं.
  • हकीमों का ये तबका एचआईवी और एड्स के बारे में क्या सोचते हैं. ये जानना कम दिलचस्प नहीं है. कुछ लोग ये मानते हैं कि ये बीमारी हमेशा से थी. ये हकीम एचआईवी एड्स को लुगानडागांडा कहते हैं जिसका मतलब होता है कि वजन का कम होना. तस्वीर में एचआईवी पॉजिटिव मरीज का इलाज करने वाले हकीम दिखाई पड़ रहे हैं. वे कहते हैं, '"इस बीमारी का असर चेहरे पर भी नजर आने लगता है. चेहरे पर झुर्रियां बढ़ जाती हैं."
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    इन हकीमों के फीस अलग अलग होती है. हालांकि अस्पताल में जाकर इलाज कराने से ये हमेशा सस्ते साबित होते हैं. हकीम सामान्य सर दर्द और थकान के मामले में तीन डॉलर की फीस लेते हैं जबकि हड्डियों के टूटने के मामले में खर्च 122 डॉलर तक पहुंच जाता है. एचआईवी पॉजिटिव लोगों का इलाज करने वाला ये हकीम पहले शहर में एक कैफे चलाता था लेकिन घर वालों को उनका दूसरा काम पसंद नहीं था, लिहाजा वे गांव लौट कर अपने परंपरागत पेशे से जुड़ गए.
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    एक युवा हकीम कहता है, "ज़्यादातर लोग जो मेरे पास इलाज के लिए आते हैं, वे पहले अस्पताल जा चुके होते हैं. जब उन्हें इलाज से कोई फ़ायदा नहीं होता तभी वे मेरे पास पहुंचते हैं. जब उन्हें मेरा इलाज पसंद आता है तो वे अपने परिचितों को इसके बारे में बताते हैं. मैं अपना प्रचार नहीं करता."
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    तंजानिया में बहुत लोग ऐसे भी हैं जो ये मानते हैं कि जिन चीजों का इलाज़ अस्पताल में नहीं हो सकता उसका इलाज ये हकीम कर सकते हैं. चित्र में एक हकीम की पत्नी ये दिखा रही है कि उसने एक पुराना सिक्का पहना हुआ है ताकि बुरी आत्मा की नजर उन पर नहीं पड़े.
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    कुछ परंपरागत हकीम गुड लक चार्म भी बेचते हैं. इसके लिए वे शेर, जानवरों के सींग, और छिपकली से बने सामान मसलन घंटी, सिक्के, सींग इत्यादि बेचते हैं.
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    उत्तरी तंजानिया में कुछ हकीमों का कहना है कि उनके लकी चार्म की बदौलत कुछ लोग बेहद अमीर और रसूख वाले बन गए हैं. हालांकि दक्षिणी तंजानिया के हकीमों का कहना वे इस तरह के लकी चार्म को नहीं बेचते. तस्वीर में दिख रहा है मासूम एक कलाई बैंड पहने हुए हैं जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि इसके पहनने से मलेरिया बीमारी दूर हो जाती है.
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    वैसे ये लकी चार्म हर काम के लिए बनाए, बेचे और खरीदे जाते हैं. मसलन आपको फ़ुटबॉल मैच जीतना हो या फिर कोई बीमारी से ठीक होना हो. यहां तक कि ईसाई और मुस्लिम समुदाय के लोग भी इन लकी चार्मों पर खूब भरोसा करते हैं. ( सभी तस्वीरें फोटोग्राफ़र सासजा वान वेकेघल ने मानव विज्ञानी जी फिश्चर की मदद से ली है. जिन लोगों की तस्वीरें हैं, वे नहीं चाहते हैं उनके नाम का इस्तेमाल किया जाए. वैसे सभी तस्वीरें आप heart4photography.com पर भी देख सकते हैं.)

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