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जिसके इशारे पर विमान बरसाते हैं बम

 शनिवार, 15 जून, 2013 को 14:34 IST तक के समाचार
  • आयशा फ़ारूक़
    पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बहावलपुर की रहने वाली 26 वर्षीय आयशा फ़ारूक़ देश की पहली महिला लड़ाकू विमान चालक बन गईं हैं.
  • आयशा फ़ारूक़
    अपने पुरुष साथियों की तुलना में आयाशा दुबली-पतली नजर आती हैं लेकिन उनके इरादों की उड़ान ऊंची है.
  • आयशा फ़ारूक़
    आयशा पिछले दस साल में पाकिस्तान की वायुसेना में शामिल हुई 19 महिलाओं में से एक हैं. दुनिया के ज्यादातर देशों की तरह पाकिस्तान में भी महिलाओं को मोर्चे पर लड़ने का अनुमति नहीं है.
  • आयशा फ़ारूक़
    तालिबानी लड़ाकों और पाकिस्तान में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा के बारे में आयशा कहती हैं, "हमारी भौगोलिक स्थिति और चरमपंथ की समस्या को देखते हुए हमें हर वक्त मुस्तैद रहना बेहद जरूरी है."
  • आयशा फ़ारूक़
    अपने साथी पुरुष पायलटों से तुलना के बारे में मृदुभाषी आयशा कहती हैं, "मुझे कोई फ़र्क महसूस नहीं होता. हमारा काम एक है. अचूक बमबारी करने में हम उन्हीं की तरह सक्षम हैं."
  • आयशा फ़ारूक़
    पाकिस्तानी वायुसेना के अधिकारियों का कहना है कि सेना में पारंपरिक रूप से पुरूषों के वर्चस्व के कारण महिलाओं को लड़ाकू विमान चालक बनने में परिवार के विरोध का भी सामना करना पड़ता है.
  • आयशा फ़ारूक़
    पाकिस्तानी वायुसेना में 24 वर्षीय विमान इंजीनियर अनम हसन कहती हैं, "पाकिस्तानी सीमा की चरमपंथ से रक्षा करना जरूरी है और साथ ही ये भी बेहद अहम है कि इसमें सबकी भागीदारी हो. हालांकि वायुसेना को ये बात समझने में थोड़ा वक्त लगा."
  • आयशा फ़ारूक़
    पाकिस्तान और उसकी सेना के लिए चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं. एक तरफ जहां पाकिस्तान में अमरीकी ड्रोन हमले लगातार जारी हैं, वहीं पड़ोसी अफगानिस्तान और अमरीका से भी उसके रिश्ते तनावपूर्ण चल रहे हैं.
  • आयशा फ़ारूक़
    आयशा चीन निर्मित एफ-7पीजी लड़ाकू जेट उड़ाती हैं.
  • आयशा फ़ारूक़
    पाकिस्तान में महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरुक हो रही हैं और इसीलिए सुरक्षा बलों में उनकी संख्या में भी इजाफा हो रहा है.
  • आयशा फ़ारूक़
    पाकिस्तान के सैन्य बलों में लगभग चार हजार महिलाएं हैं. लेकिन वो ज्यादातर दफ्तरी कामकाज या फिर चिकित्सा संबंधी सेवाओं में काम कर रही हैं.
  • आयशा फ़ारूक़
    इनमें से 319 महिलाएं पाकिस्तानी एयरफोर्स में काम कर रही हैं. पांच साल पहले ये संख्या 100 के आसपास हुआ करती थी.
  • आयशा फ़ारूक़
    आयशा को सात साल पहले वायुसेना में आने के लिए अपनी माँ के विरोध का सामना करना पड़ा था. उनकी मां अनपढ़ हैं और पुराने ख्यालों की है.
  • आयशा फ़ारूक़
    लेकिन धीरे धीरे समाज की सोच बदल रही है और महिलाएं अपने लिए हर क्षेत्र में जगह बना रही हैं.
  • आयशा फ़ारूक़
    बेशक आयशा पाकिस्तानी लड़कियों के लिए मिसाल कही जा सकती हैं.

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