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क्या अमरीकी सैनिक ने लादेन की मदद की थी?

 मंगलवार, 4 जून, 2013 को 15:03 IST तक के समाचार
ब्रैडले मैनिंग

अमरीकी सैनिक ब्रैडले मैनिंग पर हज़ारों की तादाद में ख़ुफ़िया ऑपरेशनों के दस्तावेज़ लीक करने का आरोप है.

अमरीकी सैनिक ब्रैडले मैनिंग के एक कदम ने इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में क्लिक करें ओसामा बिन लादेन और अल क़ायदा के रास्ते आसान किए थे. ये आरोप ब्रैडले मैनिंग पर उनके कोर्ट मार्शल के दौरान लगाए गए है. वकीलों का कहना है कि अल क़ायदा की कार्रवाइयों में इस ख़ुफिया जानकारी ने बेहद मदद की.

अगर ब्रैडले मैनिंग के ख़िलाफ़ दुश्मन की मदद का आरोप साबित हो जाता है तो उन्हें ज़िंदगी भर सलाख़ों के पीछे वक्त बिताना पड़ सकता है.

क्लिक करें तस्वीरों में देखिए ओसामा बिन लादेन

ब्रैडले मैनिंग ख़ुफ़िया जानकारी लीक करने का अपराध स्वीकार कर चुके हैं. हालांकि बचाव पक्ष ने दुश्मन की मदद करने के आरोपों को ख़ारिज किया है.

फोर्ट मीड, मेरीलैंड में चल रही सैन्य अदालत में ब्रैडले मैनिंग के ख़िलाफ़ कोर्ट मार्शल चल रहा है. उन पर 22 में से 10 मामलों में ख़ुफिया जानकारी लीक करने के अभियोग हैं.

कहा गया है कि उन्होंने जान-बूझकर हज़ारों संवेदनशील ख़ुफ़िया दस्तावेज़ एंटी प्राइवेसी साइट विकीलीक्स को सौंप दिए.

ब्रैडले मैनिंग

ब्रैडले के समर्थक मानते हैं कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है.

ओबामा सरकार का कहना है कि इन दस्तावेज़ों के सार्वजनिक होने से कई देशों की सरकारों के साथ उनके ताल्लुकात ख़राब हो गए और बहुत से कूटनीतिक और सैन्य सूत्र बेनक़ाब हो गए.

मैनिंग-विकीलीक्स केस को अमरीकी सैन्य इतिहास का सबसे बड़ा ख़ुफ़िया दस्तावेज़ लीक माना जा रहा है.

भोला-भाला या देशद्रोही?

उधर, मैनिंग के समर्थक उन्हें व्हिसिल ब्लोअर हीरो के बतौर पेश कर रहे हैं. मैनिंग का बचाव करने वाले सेना के वकीलों ने उन्हें ‘भोला-भाला नौजवान’ करार दिया.

प्रॉसीक्यूटर कैप्टेन जो मॉरो ने इस केस को ‘अहंकार और पहुंच’ का नतीजा बताया. मॉरो के मुताबिक उनके पास सुबूत हैं जब ओसामा बिन लादेन ने विकीलीक्स की इस सूचना का अपने मक़सद पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया.

प्रॉसीक्यूशन ब्रैडले मैनिंग की ब्लॉग एंट्री, एक कंप्यूटर, हार्ड ड्राइव और एक मैमरी कार्ड को सुबूत के बतौर पेश करने वाला है. इसके साथ ही कुछ गवाह भी पेश किए जाएंगे.

दस्तावेज़ों में अफ़गानिस्तान और इराक़ में युद्ध से जुड़ी हज़ारों रिपोर्ट्स, अमरीकी दूतावासों और वॉशिंगटन में गृह विभाग के बीच भेजे गए संदेश शामिल हैं.

मॉरो ने इस बात से इनकार किया कि लीक हुई जानकारियां व्हिसिलब्लोइंग का काम था. उनका कहना था, ‘ये मामला एक ऐसे सैनिक का है जिसने पूरी तैयारी के साथ क्लासीफ़ाइड डेटाबेसों से हज़ारों दस्तावेज़ उठाकर इंटरनेट पर दुश्मन के हाथ सौंप दिए.’

उनके मुताबिक मैनिंग ने इसके लिए अपने सैन्य प्रशिक्षण का भी इस्तेमाल किया.

'इराक़ में अमरीकी कार्रवाई से परेशान थे मैनिंग'

ब्रैडले मैनिंग

अगर आरोप साबित हुए तो मैनिंग को उम्रभर जेल की सलाख़ों के पीछे रहना पड़ सकता है.

मगर बचाव पक्ष का कहना है कि ब्रैडले मैनिंग 2009 के दौरान हुए अमरीकी सेना के हमले में एक इराक़ी की मौत से काफ़ी परेशान था. इसके बाद उन्होंने जानकारियां इकट्ठी करनी शुरू कीं.

बचाव पक्ष के मुताबिक मैनिंग को लगता था कि अगर ये जानकारी आम लोगों तक गई तो ‘दुनिया को बेहतर जगह’ बनाने में मददगार होंगी.

बचाव पक्ष के वकील डेविड कूम्ब्स का कहना है, ‘उन्हें यक़ीन था कि इस जानकारी के बाद लोगों पता चलेगा कि हम इंसानी ज़िंदगी को कितनी अहमियत देते हैं.’ मैनिंग ने सार्वजनिक किए जाने वाले दस्तावेज़ चुनने में काफी सोच समझ का इस्तेमाल किया. हालांकि कूम्ब्स ने बिन लादेन की मदद को लेकर उठे सवाल पर कोई बात नहीं की.

क्या दुश्मनों की मदद की थी मैनिंग ने?

मैनिंग पर दुश्मन को मदद पहुंचाने का आरोप साबित करने के लिए प्रॉसीक्यूशन को काफी मशक्कत करनी होगी. बीबीसी संवाददाता मार्क मार्डैल के मुताबिक ऐसी जानकारी इंटरनेट पर डालना दुश्मन की मदद करने के बराबर है.

सेना ये दिखाने की कोशिश करेगी कि ये जानकारी अमेरिका के दुश्मनों के लिए ‘काफ़ी अहम’ थी. जबकि मैनिंग के समर्थक कहते हैं कि उन्होंने जो कुछ भी आम जनता के सामने रखा, वो कभी भी ख़ुफ़िया था ही नहीं.

डेविड कूम्ब्स

मैनिंग के वकील डेविड कूम्ब्स का कहना है कि मैनिंग 'दुनिया को बेहतर' बनाने की कोशिश कर रहे थे.

मैनिंग को मई 2010 में गिरफ़्तार किया गया था. तब वो इराक़ में तैनात थे. मैनिंग ने इस साल फ़रवरी में कहा था कि उन्होंने ये दस्तावेज़ अमरीकी सेना और विदेश नीति पर जनता के बीच बहस के लिए डाले थे.

ऐसे एक वीडियो में 2007 में एक अपाचे हेलीकॉप्टर के हमले की फुटेज दिखाई गई, जिसमें रॉयटर्स के फ़ोटोग्राफ़र समेत बग़दाद में दर्जन भर लोगों की जान गई थी.

सज़ा में 112 दिन की छूट

ब्रैडले मैनिंग को एक राहत भी हासिल है. उन्हें कोर्ट चाहे जो सज़ा सुनाए, उसमें उन्हें 112 दिन की छूट मिलेगी. ये छूट मैनिंग को उनकी गिरफ़्तारी के बाद उनसे हुई बदसुलूकी के एवज़ में दी जा रही है.

मैनिंग के ख़िलाफ़ मुक़दमे की सुनवाई एक जज कर रही हैं. मुक़दमा पूरी गर्मियों तक चलने की संभावना है. संवेदनशील जानकारियों का मसला होने की वजह से मुक़दमे की कार्रवाई का बड़ा हिस्सा आम लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा.

फैडरल प्रशासन इस मामले में विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज के ख़िलाफ़ कार्रवाई का भी मन बना रहा है. असांज सेक्स अपराध केस से बचने के लिए फिलहाल लंदन में मौजूद इक्वेडोर दूतावास में शरण लिए हुए हैं. उनके स्वीडन प्रत्यर्पण की मांग उठ रही है.

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