करिश्माई महिला पायलट की गुमनामी का रहस्य

  • 27 मई 2013
(इस कहानी में इस्तेमाल की गई सभी तस्वीरों के कॉपीराइट एमेलिया एयरहर्ट फेस्टिवल, जो कैंपबैल, डैरी सेंट्रल लाइब्रेरी और गैटी इमेजेज के हैं)

महज दस साल की उम्र में एमेलिया मैरी एयरहर्ट ने जब पहली बार हवाई जहाज़ देखा, तो वो हवाई जहाज़ से प्रभावित नहीं हुईं.

अमरीका के डेस मोनिस शहर में उनके पिता एक एयर प्रदर्शनी में एमेलियो को ले गए थे. पिता अपनी बेटी को हवाई जहाज़ पर उड़ाना चाहते थे, लेकिन बेटी को हवाई जहाज़ पसंद ही नहीं आया.

उन्हें हवाई जहाज़ जंग लगे हुए तार, लकड़ी और लोहे का टुकड़ा भर लगा.

लेकिन एमेलिया को तो इतिहास बनाना था. आगे चलकर हवाई जहाज़ से अटलांटिक महासागर पार करने वाली वो पहली महिला बनीं.

अटलांटिक महासागर को पार करने का करिश्मा एमेलिया ने करीब 81 साल पहले 20 मई, 1932 को कर दिखाया था.

ये उड़ान करीब 15 घंटे की थी. और इस कामयाब उड़ान के साथ ही एमेलिया को अमरीका का क्वीन ऑफ़ द एयर की उपाधि मिल गई.

ट्रेनिंग

1897 में जन्मी एमेलिया एयरहर्ट ने बॉस्टन शहर में जनवरी, 1921 में हवाई जहाज़ उड़ाने की ट्रेनिंग लेनी शुरू की. इसके छह महीने के बाद ही उन्होंने अपने लिए हवाई जहाज़ खरीद लिया. हालांकि वो जहाज़ सेकेंड हैंड ही था.

दो सीटों वाले जहाज़ का नाम एमेलिया ने केनेरी रखा और इसकी मदद से ही उन्होंने पहले पहल 14 हजार फ़ीट की ऊंचाई तक पहुंचने का कारनामा दिखाया.

1897 में जन्मी एमेलिया एयरहर्ट ने बॉस्टन शहर में जनवरी, 1921 में हवाई जहाज़ उड़ाने की ट्रेनिंग लेनी शुरू की. इसके छह महीने के बाद ही उन्होंने अपने लिए हवाई जहाज़ खरीद लिया.

हालांकि वो जहाज़ सेकेंड हैंड ही था. दो सीटों वाले इस जहाज़ का नाम एमेलिया ने केनेरी रखा. इस जहाज़ की मदद से ही उन्होंने पहले पहल 14 हजार फ़ीट की ऊंचाई तक पहुंचने का कारनामा दिखाया.

वह अप्रैल, 1928 की एक दोपहर थी. जब एयरहर्ट अपने काम में जुटी थी, तभी उनके पास एक फोन आया.

फोन सुनने का भी वक्त उनके पास नहीं था. उन्होंने कहा कि बाद में बात करिए, लेकिन सामने वाले ने उनसे कहा कि ये एक ज़ोरदार ऑफर है.

एमेलिया ने पूछा क्या बात है तो उनसे कहा गया कि क्या आप अटलांटिक महासागर को जहाज़ से अकेले पार करने का कारनामा करना चाहेंगी?

इस एक फोन कॉल ने एमेलिया की ज़िंदगी बदल कर रख दी. इसके बाद से उनकी ज़िंदगी का एक ही लक्ष्य बन गया.

उन्होंने दो पायलटों के साथ ट्रेनिंग हासिल करनी शरू की. और ठीक पांच साल बाद उन्होंन न्यू फाउंडलैंड से पेरिस की उड़ान भरी.

लेकिन उस दौरान मौसम का मिजाज बिगड़ गया. तेज हवा और बर्फबारी के बीच एमेलिया ने जहाज़ का नियंत्रण संभाले रखा.

आखिरकार उन्होंने जहाज़ को आयरलैंड के एक चारागाह में उतार दिया.

इतिहास

(इस कहानी में इस्तेमाल की गई सभी तस्वीरों के कॉपीराइट एमेलिया एयरहर्ट फेस्टिवल, जो कैंपबैल, डैरी सेंट्रल लाइब्रेरी और गैटी इमेजेज के हैं)

लेकिन वह इतिहास बना चुकी थीं. लिहाजा दुनिया भर की मीडिया उनके एक झलक को देखने को आतुर थी.

एयरहर्ट ने तब कहा था कि हवाई जहाज़ उड़ाने के लिए बुद्धिमत्ता, संयोजन, तेज़ी, संयम और इच्छाशक्ति के लिहाज से पुरुष और महिला में अंतर नहीं है.

एयरहर्ट की इस करिश्मे के बाद अमरीकी राष्ट्रपति हरबर्ट हूवर ने उन्हें नेशनल ज्योग्राफिक सोसायटी के गोल्ड मेडल से सम्मानित किया. अमरीकी कांग्रेस ने उन्हें फ्लाइंग क्रॉस से सम्मानित किया, ये उपाधि पहली बार किसी महिला को दिया गया.

इसके बाद तो एयरहर्ट ने आसमान में इतिहास रचने की झड़ी लगा दी. उन्होंने 18,415 फीट की ऊंचाई तक पहुंचने का कारनामा दिखाया. इसके बाद 11 जनवरी, 1935 को पैसिफिक महासागर को अकेली पार करने वाली पहली महिला बनीं.

इसके बाद वो पहली महिला बनीं जिसने मैक्सिको सिटी से नेवार्क तक की दूरी अकेले तय की.

1937 में लगभग चालीस साल की उम्र में एमेलिया एयरहर्ट ने अपने पायलट करियर की सबसे मुश्किल चुनौती को पूरा करने का मन बनाया. वे हवाई जहाज़ से दुनिया भर की उड़ान भरना चाहती थीं.

एक जून, 1937 को अपने मार्ग निर्देशक फ्रेड नूनान के साथ मियामी से 29 हजार मील के सफ़र पर निकलीं. 29 जून को करीब सात हजार मील की दूरी तय करने के बाद दोनों न्यू गयाना द्वीप पर उतरे.

यहां से दोनों ने दो जुलाई को सुबह दस बजे अगले ठिकाने की ओर उड़ान भरी. पहले कहा गया था कि मौसम साफ रहेगा लेकिन इसके बाद तेज बरसात शुरू हो गई. और जहाज़ रास्ते से भटकने लगा.

अमरीकी कोस्ट गार्ड सेंटर में अगली सुबह आठ बजकर 45 मिनट में आखिरी बार एमेलिया की आवाज़ सुनी गई. उन्होंने कहा था हमारा जहाज़ उत्तर और दक्षिण की ओर उड़ रहा है.

(इस कहानी में इस्तेमाल की गई सभी तस्वीरों के कॉपीराइट एमेलिया एयरहर्ट फेस्टिवल, जो कैंपबैल, डैरी सेंट्रल लाइब्रेरी और गैटी इमेजेज के हैं)

लेकिन इसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया.

अमरीकी सरकार ने आसमान और समुद्र का कोना कोना छान मारा. लेकिन एमेलिया का कोई पता नहीं चला.

19 जुलाई, 1937 को अमरीकी प्रशासन ने 40 लाख डॉलर की रकम खर्च करने और समुद्री सीमा में ढाई लाख मील को छानने के बाद ये अभियान बंद कर दिया. 5 जनवरी, 1939 को उनको मृत मान लिया गया.

दुनिया को एमेलिया का कभी पता नहीं चल पाया. लेकिन यही माना जाता है कि उनका जहाज़ किसी दुर्घटना का शिकार हो गया होगा.

वैसे एमेलिया को एक साहसी पायलट के अलावा एविएशन सेक्टर की मशहूर लेखिका के तौर पर आज भी याद किया जाता है. उनकी किताबों में 20 घंटे, 40 मिनट; द फन ऑफ़ इट; और लास्ट फ्लाइट बेहद लोकप्रिय हुईं.

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