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'मुझे बचा लीजिए... मैं अब भी यहां हूं'

 शुक्रवार, 10 मई, 2013 को 20:17 IST तक के समाचार
बांग्लादेश महिला

रेशमा को बहुत ज़्यादा चोटें नहीं आई हैं और वह बचाव दल के सदस्यों से बात कर रही हैं

बांग्लादेश में 17 दिन पहले गिरी आठ-मंजिला इमारत में से एक महिला को ज़िंदा निकाला गया है.

रेशमा नाम की महिला आठ-मंजिला इमारत, राना प्लाज़ा, के मलबे की दूसरी मंज़िल पर पाई गईं.

बचाई गई महिला को अधिक चोटें नहीं आई हैं और उन्हें सेना के अस्पताल ले जाया गया है.

पिछले महीने बांग्लादेश की राजधानी ढाका के बाहरी इलाके, सावर, में एक फ़ैक्टरी की इमारत ढह गई थी और उसमें सैकड़ों लोग फंस गए थे.

सेना के अनुसार इस दुर्घटना में अब तक मरने वालों की संख्या 1,000 से ऊपर जा चुकी है.

क्लिक करें तस्वीरें - मरने वालों की संख्या 1,000 से ज़्यादा

मुझे बचा लो

सेना का कहना है कि मृतकों की संख्या और अधिक हो सकती है क्योंकि सबसे ज़्यादा क्षतिग्रस्त जगहों से मलबा हटाने के लिए भारी मशीनों से काम किया जा रहा है.

"जब हम मलबा हटा रहे थे, हमने आवाज़ दी कि क्या कोई ज़िंदा है. तब हमने उसकी आवाज़ सुनी- मुझे बचा लीजिए, मुझे बचा लीजिए."

बचावकर्मी

शुक्रवार को स्थानीय समय के अनुसार दोपहर करीब 3.15 बजे जब सैनिक एक सीमेंट के बड़े टुकड़े को तोड़ने की तैयारी कर रहे थे तब उन्हें इस महिला का पता चला.

एक अज्ञात बचावकर्मी ने सोमोए टीवी को बताया, “जब हम मलबा हटा रहे थे, हमने आवाज़ दी कि क्या कोई ज़िंदा है. तब हमने उसकी आवाज़ सुनी- मुझे बचा लीजिए, मुझे बचा लीजिए.”

अधिकारियों ने तुरंत भारी मशीनों का इस्तेमाल कर रहे लोगों को रोक दिया.

उनकी सही स्थिति जानने के लिए ऑडियो और वीडियो खोज उपकरणों की मदद ली गई और फिर बचाव दल ने देखा कि एक महिला अपना हाथ हिला रही थी.

वह चिल्ला रही थीं, “मैं अब भी यहां हूं”

उन्होंने बताया कि उनका नाम रेशमा है.

बीबीसी की बंगाली सेवा के अकबर हुसैन के अनुसार कुछ ही मिनट में सैकड़ों सैनिक और अग्निशमन दल कर्मी उनकी मदद के लिए मौके पर पहुंच गए और मलबा हटाने लगे.

सुरक्षित जगह

" दो हफ़्ते तक तो रेशमा के पास खाना मौजूद था लेकिन दो दिन पहले यह ख़त्म हो गया था."

बचावकर्मी

महिला ने बताया कि वह बहुत ज़्यादा घायल नहीं हैं और उन्हें पानी और बिस्किट दिए गए.

मलबे को हटाने के लिए हाथ से चलने वाली आरियों और ड्रिलिंग मशीनों से लोहे की रॉडों और मलबे को हटाया गया.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार इसके बाद महिला को बाहर निकाल लिया गया और मौजूद भीड़ की खुशी फूट पड़ी.

उन्हें जांच और इलाज के लिए संयुक्त सैन्य अस्पताल ले जाया गया.

सेना के इंजीनियरिंग विभाग के वारंट ऑफ़िसर अब्दुर रज़्ज़ाक उन लोगों में से हैं जिन्होंने मलबे के अंदर रेशमा को सबसे पहले देखा था.

उन्होंने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि वह ठीक हैं और चल पा रही हैं.

एक अन्य बचावकर्मी ने बताया कि पहले दो हफ़्ते तक तो रेशमा के पास खाना मौजूद था लेकिन दो दिन पहले यह ख़त्म हो गया था.

बचावकर्मी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, “उस महिला ने कहा कि उसने दो दिन से कुछ नहीं खाया. उन्होंने बताया कि उन्हें कुछ बिस्किट जैसे कुछ ड्राई फ्रूट खाने को दिए गए हैं. उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें एक सुरक्षित जगह मिल गई थी जहां से उन्हें हवा और रौशनी मिलती रही.”

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