'इधर वाजपेयी चीन पहुँचे, उधर सीमा पर भारतीय पिटे'

  • 7 मई 2013

चीन और भारत के बीच पिछले कुछ दिनों से तनाव का माहौल चल रहा था. ऐसे आरोप लगाए गए थे कि चीनी सैनिकों की एक टुकड़ी ने 15 अप्रैल को भारतीय सीमा के 19 किलोमीटर अंदर पांच तंबू गाड़ दिए थे. हालांकि अब ये विवाद सुलझ गया है.

2003 में जब तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी चीन यात्रा पर थे तो ऐसे आरोप लगे थे कि चीन के बॉर्डर पैट्रोल ने भारतीय बॉडर पैट्रोलकर्मियों को पीटा है. इस घटना ने भारतीय संसद में भी हंगामा खड़ा कर दिया था. भारत-चीन विवाद से जुड़ी पाँच घटनाएँ

1967 - नाथुला

भारत और चीन की सेना सिक्कम में 1967 में आमने सामने थीं और काफी तनाव हो गया था. लेकिन भारतीय सेना पीछे नहीं हटी. इस वजह से चीन को पीछे हटना पड़ा और बात आगे नहीं बढ़ी. इससे कुछ समय पहले चीन जलापुला में भी प्रवेश कर गया था जो नाथुला से ज़्यादा दूर नहीं है.

अरुणाचल प्रदेश, 1986 सौंदरमचू

इस घटना में दोनों ओर से कोई गोलीबारी नहीं हुई थी लेकिन इससे आपसी रिश्तों पर असर पड़ा था. चीन ने करीब 250 चीनी सैनिकों की टुकड़ी बनाई थी और अरुणाचल प्रदेश के उत्तर में एक विशेष हेलीपैड भी बनाया गया था. तत्कालीन भारतीय सेना प्रमुख जनरल सुंदरजी ने भी एक ब्रिगेड खड़ी कर चीन को जवाब दिया. बाद में चीन पीछे हट गया.

चीन का मकसद था कि सैनिकों की मौजूदगी से वो इलाके में अपना दबदबा बना सके. जनरल सुंदरजी ने उस समय विशेष अभियान चलाया था- ऑपरेशन चकबो. ये ‘एयर-लैंड बैटल’ की अवधारणा पर आधारित था. कुछ चीनी सैन्य जनरलों के मुताबिक इस अभियान में लोगों के मारे जाने का अनुपात बहुत था मतलब ये कि मारे गए हर भारतीय सैनिक के पीछे दस चीनी सैनिकों की मौत. ये सिर्फ़ एक सिमुलेशन टेस्ट था इसलिए ज़्यादा समस्या खड़ी नहीं हुई.

31 दिसंबर 2000, लद्दाख़

लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) के पास वर्ष 2000 में चीन और भारत के अर्धसैनिक बल बिल्कुल आमने सामने आ गए थे. लेकिन दोनों पक्षों को ये हिदायत दी गई थी कि इसे सैन्य तनाव में न बदलने में दें. इस कारण विवाद ख़त्म हो गया और कोई गोलीबारी नहीं हुई.

जून 2003, अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल प्रदेश के आसाफिला इलाक़े में चीन के बॉर्डर पैट्रोल ने भारतीय बॉडर पैट्रोलकर्मियों को पीटा था. महत्वपूर्ण बात ये है कि उस समय भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी चीन यात्रा पर बीजिंग गए हुए थे. उस वक़्त सारे बड़े अख़बारों में ये घटना छाई रही थी. इस घटना से स्पष्ट हो गया था कि भारत-चीन रिश्ते अब भी कितनी समस्याओं से घिरे हुए हैं और वो भी तब जब भारतीय प्रधानमंत्री ख़ुद चीन में थे.

भारतीय संसद में भी इस मुद्दे को लेकर ख़ूब हंगामा हुआ था और विपक्ष की माँग थी कि कोई कड़ा क़दम उठाया जाए.

15 अप्रैल 2013, लद्दाख

चीनी सेनाएं भारतीय सीमा में करीब 10 किलोमीटर तक घुस आई थीं. इसके बाद दोनों सेनाएं लद्दाख में आमने-सामने रहीं. कई दिनों के तनाव के बाद चीन और भारत ने लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी इलाके से अपनी सेनाएं हटा लीं.

( बीबीसी संवाददाता वंदना से बातचीत पर आधारित)