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बांग्लादेश में इमारत गिरी, 147 की मौत

 गुरुवार, 25 अप्रैल, 2013 को 07:55 IST तक के समाचार
बांग्लादेश

मलबे को हटाने का काम जोरशोर से चल रहा है

क्लिक करें बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आठ मंजिला इमारत ढहने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 147 हो गई है. एक हज़ार से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं. कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है.

मलबे को हटाने का काम अब भी जारी है और इस काम में सेना की भी मदद ली जा रही है.

शहर के बाहरी इलाके सावा में स्थित राना प्लाजा में कपड़ों की एक फैक्ट्री, एक बैंक और कई अन्य दुकानें थीं. इमारत सुबह उस समय गिरी जब वहां काफी भीड़-भाड़ थी.

घटनास्थल के आस-पास बड़ी संख्या में भीड़ जमा है और लोग इमारत में काम करने वाले अपने परिजनों और दोस्तों की तलाश में जुटे हैं.

दरार

स्थानीय निवासी तहसीन महमूद ने बीबीसी से कहा, “इमारत गिरते ही मेरे दोस्त रक्तदान के लिए पहुंचे. उन्होंने बताया कि वहां अफरातफरी का माहौल है.”

"मैं फैक्ट्री के कपड़ा काटने वाले खंड में था कि तभी मैंने जोरदार आवाज सुनी और कुछ ही मिनटों में इमारत ढह गई"

गारमेंट फैक्ट्री मजदूर

ढाका में बीबीसी संवाददाता अनबरसन एथिराजन के मुताबिक इमारत गिरने के कारणों का अभी पता नहीं चला है लेकिन स्थानीय मीडिया का कहना है कि इमारत में मंगलवार को एक दरार देखी गई थी.

हमारे संवाददाता ने बताया कि बचावकर्मी कंक्रीट को काटने वाली मशीनों और क्रेन का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि मलबे में फंसे हुए लोगों को निकाला जा सके.

करीब स्थित एक अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि उनके अस्पताल में बड़ी संख्या में घायलों को लाया जा रहा है लेकिन अस्पताल में इतने ज्यादा घायलों के इलाज के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं.

डॉक्टर इमरूल हसन वारसी ने बीबीसी से कहा, “मैंने इससे पहले कभी भी इतनी बड़ी संख्या में मरीजों को इस अस्पताल में नहीं देखा है.”

नजरअंदाज

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मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए कपड़ों का इस्तेमाल किया गया

स्थानीय पुलिस प्रमुख मोहम्मद असदुजमां ने समाचार एजेंसी रायटर्स को बताया कि दरार आने के बाद मजदूरों के इमारत में नहीं जाने की चेतावनी दी गई थी लेकिन ऐसा लगता है कि फैक्ट्री के मालिकों ने इसे नजरअंदाज किया था.

पुलिस ने स्थानीय मीडिया को बताया कि इमारत का पिछला हिस्सा बुधवार सुबह ढहना शुरू हो गया और देखते ही देखते इमारत ज़मींदोज़ हो गई.

अधिकारियों ने बताया कि इमारत के भूमिगत तल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. सेना के जवान, दमकल विभाग के कर्मचारी और स्थानीय लोग मलबा हटाने में लगे हुए हैं.

इस हादसे के बाद विपक्षी दलों ने बुधवार को आयोजित बंद को रद्द कर दिया है.

आपबीती

हादसे में बाल-बाल बचे कई लोगों ने स्थानीय मीडिया से अपनी आपबीती सुनाई.

बीबीसी संवाददाता अनबरसन एथिराजन घटनास्थल से

  • मलबे में दबे लोगों के परिजनों में बैचेनी का आलम है. बचाव दल मलबे को हटाने के लिए कंक्रीट काटने वाली मशीनों और क्रेनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस काम में सेना की भी मदद ली जा रही है
  • इस बात का पता नहीं चल पाया है कि मलबे में कितने लोग दबे हैं. हालांकि स्थानीय मीडिया ने सैकड़ों लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई है. आठ मंजिला इमारत में कपड़ों की एक फैक्ट्री
    ,
    एक बैंक और कई अन्य दुकानें थीं
    . एक स्थानीय डॉक्टर ने बीबीसी को बताया कि शवों के अस्पताल पहुंचने का सिलसिला जारी है और स्वास्थ्यकर्मियों को अतिरिक्त काम करना पड़ रहा है.
  • इमारत गिरने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है. इस घटना ने एक बार फिर देश के कपड़ा उद्योग में सुरक्षा मानकों की खामियों को उजागर कर दिया है. हालांकि फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि हाल के सालों में सुरक्षा मानकों में उल्लेखनीय सुधार आया है.

कपड़ों की फैक्ट्री में काम करने वाले एक मजदूर ने एक निजी चैनल सोमोय टीवी से कहा, “मैं फैक्ट्री के कपड़ा काटने वाले खंड में था कि तभी मैंने ज़ोरदार आवाज़ सुनी और कुछ ही मिनटों में इमारत ढह गई.”

उन्होंने कहा, “मैंने मलबा हटाया और दो साथियों के साथ बाहर आ गया लेकिन मेरे कम से कम 30 साथी अभी लापता हैं.”

बांग्लादेश में इमारतों का गिरना कोई नई बात नहीं है क्योंकि देश में कई बहुमंज़िला इमारतें नियमों की अनदेखी करके बनाई गई हैं.

हादसे

नवंबर में ढाका के बाहरी इलाक़े में स्थित कपड़ों की एक फैक्ट्री में आग लगने से 110 लोग मारे गए थे और इससे इंडस्ट्री में सुरक्षा मानकों को लेकर जनता में काफी रोष व्याप्त हो गया था.

इस घटना के बाद बांग्लादेश से कपड़े आयात करने वाली पश्चिमी देशों की कंपनियों ने फैक्ट्री मालिकों से आग्रह किया था कि वे अपने यहां सुरक्षा मानकों में सुधार करें. बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग दुनिया की सबसे बड़ी का गारमेंट इंडस्ट्रीज में से एक है.

साल 2010 में ढाका में एक चार मंजिला इमारत के ढह जाने से 25 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे.

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