बॉस्टन धमाके: आख़िर ज़ोख़र ने ऐसा क्यों किया?

  • 21 अप्रैल 2013
जौहर सारनाइव (फ़ाइल फ़ोटो)
जौहर सारनाइव के जानने वालों को यक़ीन नहीं होता कि उन्होंने ऐसा किया है.

जो लोग ज़ोख़र सारनाएफ़ को जानते हैं वो बॉस्टन धमाके से पहले और उसके बाद की पूरी घटना को समझने की कोशिश कर रहे हैं.

लोग ये जानना चाहते हैं कि इतने उज्जवल भविष्य वाला एक नौजवान आख़िर किस तरह इतना बदल सकता है.

कैंब्रिज रेंज और लिट्टन स्कूल में लाइफ़ गार्ड का सर्टिफ़िकेट कोर्स करने वाले ज़ोख़र को पानी में तैरने में काफ़ी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता था.

ज़ोख़र के 19 वर्षीय दोस्त मार्क फ़ारिया का कहना है कि ज़ोख़र की सबसे बड़ी मुश्किल यही थी लेकिन फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और अपना कोर्स पूरा किया.

मार्क फ़ारिया कहते हैं, ''उसके बाद हमलोगों ने जश्न मनाया था. हमलोग बहुत ख़ुश थे. हम लोग जब उसे देखते तो उसे हाय लाइफ़गार्ड कह कर बुलाते थे.''

कभी ज़ोख़र ने इतनी कड़ी मेहनत कर लोगों की ज़िंदगी बचाने का हुनर सीखा था लेकिन आज वो हत्या के आरोप में पुलिस हिरासत में है और उस पर बॉस्टन मैराथन में बम धमाके कराने और दूसरे अपराध करने का इल्ज़ाम है.

ज़ोख़र के बड़े भाई और बॉस्टन बम धमाके मामले में दूसरे संदिग्ध तमरलान सारनाएफ़ पुलिस गोलीबारी में मारे गए हैं.

जो लोग ज़ोख़र को जानते हैं उन्हें विश्वास नहीं होता कि वो बॉस्टन बम धमाकों का क़सूरवार है. उन लोगों के अनुसार शायद वो किसी दबाव में था, अपने बड़े भाई के या फिर किसी चरमपंथी संगठन के.

'भूतों का शहर'

कारण चाहे जो भी हो लेकिन अब वो एक अंतरराष्ट्रीय घटना के केंद्र में बने हुए हैं और इसी वजह से उनके आवास के आस-पास भी इसका काफ़ी असर पड़ा है.

बॉस्टन धमाका
बॉस्टन मैराथन के दौरान हुए धमाके में तीन लोग मारे गए थे.

फ़ारिया के अनुसार प्रॉस्पेक्ट स्ट्रीट को देखकर लगता है कि ये 'भूतों का शहर' हो गया है.

फ़ारिया कहते हैं, ''अली बारा मार्केट में हलाल चिकेन की दुकान बंद है और ज़ोख़र जिस मस्जिद में नमाज़ पढ़ता था वो भी बंद है. इलाक़े के ज़्यादातर लोगों ने ख़ुद को घरों के अंदर बंद कर रखा है.''

ज़ोख़र साल 2002 में चेचन्या से अपने परिवार के साथ अमरीका आकर बस गए थे.

फ़ारिया के अनुसार उन्होंने और ज़ोख़र ने एक साथ पढ़ाई की थी. फ़ारिया के अनुसार ज़ोख़र पढ़ाई में बहुत अच्छे थे और उनको ढाई हज़ार डॉलर की स्कॉलरशिप भी मिलती थी.

एक स्थानीय रेडियो स्टेशन में काम करने वाली 58 वर्षीय नैन्सी भी इसी गली में रहती हैं. ज़ोख़र के बारे में पूछे जाने पर नैन्सी कहती हैं, ''आख़िर वो ऐसा क्यों करेगा.''

ज़ोख़र को साल 2012 में अमरीकी नागरिकता मिल गई थी. हालांकि एक समय ऐसा भी था जब ज़ोख़र अपने भविष्य को लेकर बहुत सुरक्षित महसूस नहीं करते थे.

ज़ोख़र और उसके बड़े भाई तामरलान सारनाएफ़ के पिता का कहना है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने उनके बेटों को फंसाया है. ग़ौरतलब है कि पुलिस ने तमरलान को गोली मार दी थी.

ज़ोख़र के पिता इंज़ोर सारनाएफ़ ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा, ''ये एक चरमपंथी हमला था जिसे ख़ुफ़िया एजेंसियों ने बड़ी सावधानी से अंजाम दिया है. मेरा बेटा मस्जिद जाया करता था. सिक्रेट सर्विस वाले एक दिन आए और पूछा कि वो ऐसा क्यों करता है और फिर सारा इल्ज़ाम उस पर मढ़ कर उसे गोली मार दी.''

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