सिख दंगों के गवाह को इंसाफ़ की उम्मीद नहीं

  • 11 अप्रैल 2013

दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस पार्टी के नेता जगदीश टाइटलर के ख़िलाफ़ सिख विरोधी दंगों के सिलसिले में लगे आरोपों की फिर से जांच के आदेश दिए हैं. लेकिन इसके बाद भी कुछ अहम गवाहों को इंसाफ़ की उम्मीद नहीं है.

दिल्ली में 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक अहम चशमदीद माने जाने वाले गवाह जसबीर सिंह अब अमरीका के सैनफ़्रैंसिस्को शहर में रहते हैं.

टाइटलर के खिलाफ़ मामले में फिर से जांच के आदेश के बाद भी वह संतुष्ट नहीं हैं कि इस मामले में इंसाफ़ मिलेगा.

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जसबीर सिंह कहते हैं, "वहां तो आंख मिचौली का खेल चल रहा है. कोर्ट सीबीआई को और सीबीआई कोर्ट को, बस पिछले 29 सालों से यही चल रहा है. हम अदालत में बयान दें तो अदालत तय करे कि बयान सही है या नहीं, लेकिन सीबीआई को कहां से इतना अधिकार मिल गया है कि वह जगदीश टाइटलर को बार बार क्लीन चिट देती फिरती है."

'कहीं भी बयान देने को तैयार हूँ'

जसबीर सिंह कहते हैं कि सन 2008 में सैनफ़्रैंसिस्को शहर में सीबीआई ने उनका 13 घंटों तक बयान रिकॉर्ड किया. लेकिन वह यह भी कहते हैं कि बार बार उनसे सीबीआई के अफ़सर यह भी कहते रहे कि इस मामले में कुछ होने वाला नहीं है.

अब उनका कहना है कि वह भारत जाकर इस मामले में किसी भी शहर में अदालत के सामने गवाही देने को तैयार हैं.

जसबीर सिंह कहते हैं, "मैं अपना फ़र्ज अदा करूंगा. मैं भारत के किसी भी शहर की अदालत में अपना बयान देने को तैयार हूं. लेकिन मुझे सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए और मेरी जान की हिफ़ाज़त की जाए. क्योंकि एक अहम गवाह सुरिंदर सिंह को अमरीका से भारत जाने पर मार दिया गया और कोई पोस्टमार्टम भी नहीं हुआ."

जगदीश टाइटलर के खिलाफ़ यह आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान उत्तरी दिल्ली के गुरूद्वारा पुलबंगश के पास एक उग्र भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया जहां तीन सिखों बादल सिंह, ठाकुर सिंह और गुरचरण सिंह का कत्ल हुआ.

सन 2009 में सीबीआई ने जगदीश टाइटलर को क्लीन चिट दे दी थी.

लेकिन अदालत ने अब कहा है कि सीबीआई इस मामले में फिर से सारी जांच करे. और मामले से जुड़े सारे गवाहों की फिर से गवाही भी ले, जिनमें अब अमरीका में रह रहे तीन गवाह भी शामिल हैं. अमरीका में रहने वाले गवाहों के नाम हैं जसबीर सिंह, चैन सिंह औऱ आलम सिंह.

इनमें से जसबीर सिंह का बयान 2008 में भी लिया गया था.

'कैसे भरोसा करें'

जसबीर सिंह को सीबीआई पर भरोसा नहीं हैं. जसबीर सिंह के वकील गुरपतवंत पानुन ने भी सीबीआई की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं.

गुरपतवंत पानुन कहते हैं, "हमे तो कोई उम्मीद नहीं है कि इस मामले में इंसाफ़ किया जाएगा. इस मामले में सीबीआई तो टाइटलर और अन्य कांग्रेस नेताओं के बचाव पक्ष की तरह काम कर रही है, तो हम उन पर कैसे भरोसा कर लें."

सीबीआई ने इससे पहले दो बार इस मामले में जांच की है. 2007 में संस्था द्वारा जगदीश टाइटलर को क्लीन चिट दिए जाने को एक जज ने खारिज किया तो फिर से जांच शुरू हुई और 2009 में सीबीआई ने फिर टाइटलर के खिलाफ़ सबूत नाकाफ़ी होने के बाद मामला बंद करने की मांग की थी.

सीबीआई ने अदालत में कहा था कि जांच से पता चला है कि जगदीश टाइटलर 1 नवंबर, 1984 को उस गुरद्वारे के पास थे ही नहीं जहां कत्ल हुए थे. सीबीआई ने कहा कि वह तो उस समय प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के निवास तीन मूर्ती भवन में थे.

1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मौत के बाद देश भर में कई जगह दंगे भड़क उठे थे. दिल्ली में होने वाले दंगों में लगभग तीन हज़ार लोगों की मौत हुई थी.

उसके बाद से दिल्ली दंगों के सिलसिले में 10 विभिन्न कमीशनों और समितियों का गठन हो चुका है जिसके नतीजे में कई पुलिसवालों के खिलाफ़ भी कार्रवाई करने की सिफ़ारिश भी की गई थी.लेकिन कुल 12 कत्ल के मामलों में अब तक 30 लोगों का ही अदालत में अपराध सिद्व हुआ है.