क्यों करनी पड़ रही है बच्चों के दूध की राशनिंग

  • 12 अप्रैल 2013
चीन के खाद्य पदार्थों के प्रति लोगों का विश्वास बहुत कम है

चीन में लोग बच्चों के लिए दूध की गुणवत्ता को लेकर इतने संशकित हैं कि वह अपने बच्चों को आयातित दूध दिलाने के लिए जी-जान एक कर देते हैं. इससे ब्रिटेन और अन्य जगह दूध की राशनिंग की ज़रूरत हो गई है.

स्थिति यह है कि लोग विदेशों से दूध मंगाने की कोशिश करते हैं ताकि यह तय हो जाए कि वह नकली नहीं है.

तीन साल के बच्चे की मां बीजिंग निवासी ल्यू फ़ैंग कहती हैं, “मेरा बच्चा सिर्फ़ जापान से मेरे रिश्तेदार द्वारा भेजा गया दूध पाउडर ही पीता है. जब जापान में परमाणु संयत्र में लीकेज हुई थी तो मेरे बेटे ने अमरीका से मंगाया गया दूध पाउडर पिया.”

चीनी महिलाएं बहुत समय तक अपने बच्चों को स्तनपान भी नहीं करवाती हैं क्योंकि उन्हें खुद अपने दूध की गुणवत्ता पर भी शक है.

जो समर्थ होते हैं वह चीनी ब्रांड के बजाय आयातित ब्रांड लेना पसंद करते हैं.

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बेवजह नहीं है डर

लेकिन ज़्यादातर अभिभावक मानते हैं कि यह डर बेवजह नहीं है.वर्ष 2008 में दूषित बेबी दूध पाउडर से छह नवजातों की गुर्दे में दिक्कत की वजह से मौत हो गई थी और 3,00,000 से अधिक बच्चों को गुर्दे में पथरी की वजह से दर्द से तड़पना पड़ा था.

कई चीनी दूध कंपनियों के टेस्ट करने के बाद पता चला था कि उनमें मेलामिन, एक पदार्थ जो दूध में प्रोटीन की मात्रा को छद्म रूप से बढ़ा देता है, पाया गया था.

पिछले कुछ सालों में खाद्य पदार्थों से जुड़े इसी तरह के संकट सामने आए हैं. कई अभिभावक यह मानने लगे हैं कि ‘चीन में बने’ खाद्य पदार्थ बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं.

चीन के बाज़ारों में उपलब्ध करीब-करीब हर खाद्य पदार्थ दागदार है. चाहे वो विषाणुओं से भरा सूअर को गोश्त हो, जो अंधेरे में चमकता है या 'रेस्तरां के बाहर नालियों से इकट्ठा किया गया खाने का तेल'- जिसे फिर से पैक कर दिया गया है.

4-2-1 फॉर्मूला

चीन में एक बच्चे के सिद्धांत के चलते 4-2-1 का फॉर्मूला बन गया है. दादा-दादी+ नाना-नानी हुए 4, मां-बाप हुए 2 और एक हुआ बच्चा. तो सभी छह मिलकर बच्चे के लिए पूरी दुनिया से सुरक्षित खाद्य पदार्थ लाने के लिए पैसा जुटा लेते हैं.

कई लोग इंटरनेट से आयातित बेबी दूध पाउडर खरीदते हैं, जो प्रामाणिक होने के दावों से भरे पड़े हैं.

बच्चों के दूध पाउडर का एक प्रचलित ब्रांड, एनफ्राप्रो, कनाडा में करीब 1195 रुपये का मिलता है. लेकिन चीन में प्रचलित ऑनलाइन रिटेलर टोबाओ

चीन निवासी बड़े पैमाने पर खरीदारी करने हॉंगकॉंग जाते हैं

पर यह औसतन दोगुने दाम 2390 रुपये में मिलता है.

चीन में बेबी दूध पाउडर को बेचने पर भारी मुनाफ़े का दुनिया भर के खुदरा बाज़ार पर भारी असर हुआ है.

राशनिंग

हॉंगकॉंग की सरकार इसकी खरीद की राशनिंग करने वाली पहली सरकार थी.

वैसे इसमें आश्चर्य की बात नहीं क्योंकि चीन से नज़दीक होने के चलते ज़्यादातर चीनी खरीदारी करने के लिए यहीं आते हैं.

यहां एक दिन में बच्चों के दूध पाउडर के दो से ज़्यादा डिब्बे खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इस प्रतिबंध को तोड़ने वाले को दो साल की कैद या 35,04,930 रुपये का जुर्माना हो सकता है.

लेकिन चीनियों की इस मांग ने अब एशिया के बाहर भी असर दिखाना शुरू कर दिया है.

ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में खुदरा दुकानदारों ने बाकायदा निवेदन किए हैं कि एक उपभोक्ता को एक दिन में बच्चों के दूध पाउडर के डिब्बे बेचे जाने की सीमा तय की जाए.

विश्वास जीतने की कोशिश

चीनी सरकार बच्चों के दूध पाउडर की समस्या को देश में ही सुलझाने के लिए खाद्य पदार्थ की निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की कोशिश कर रही है.

पिछले महीने ही चीन ने देश की खाद्य और दवा निगरानी संस्था का राजनीतिक कद बढ़ा दिया है.

उसे उम्मीद है कि इस कदम से अभिभावकों का चीन के खाद्य पदार्थों पर विश्वास बढ़ेगा.

लेकिन अविश्वास जिस कदर हावी है उसे देखते हुए यह कदम काफ़ी नहीं हैं.

बीजिंग के सबसे बड़े मैटरनिटी अस्पताल के बाहर ख़ड़ी ली, जो पहली बार मां बनने वाली हैं, से हमने बात की.

यह पूछे जाने पर कि वह अपने बच्चे को क्या देगी वो झल्ला जाती हैं, “हमें आयातित दूध नहीं मिल सकता. पिछले कुछ महीने पहले यह आसान था लेकिन अब मैंने सुना है कि चीनी कस्टम बहुत सख़्त हो गया है.”

वह कहती हैं, “अगर बच्चों के चीनी दूध पाउडर का सिर्फ़ एक फ़ीसदी ही ख़राब हो, तो मैं वो एक फ़ीसदी लेने वाली मां नहीं बनना चाहती.”