ड्रोन पर था पाक-अमरीका में गुप्त समझौता?

  • 7 अप्रैल 2013
ड्रोन
ड्रोन हमलों से पाकिस्तान में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है

अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान ने अपने देश में सक्रिय चरमपंथियों के ख़िलाफ़ ड्रोन विमानों के इस्तेमाल के लिए अमरीका के साथ गुप्त समझौता किया था.

पाकिस्तान ने अमरीका के समक्ष शर्त रखी थी कि उसके ड्रोन विमान पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों और कश्मीरी चरमपंथियों के लिए पहाड़ों में चलाए जा रहे प्रशिक्षण शिविरों से दूर रहेंगे.

इसके लिए पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई और अमरीका की सीआईए के बीच 2004 में गुप्त समझौता हुआ था.

अख़बार में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है, “पाकिस्तानी ख़ुफ़िया अधिकारियों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ड्रोन विमान केवल क़बायली इलाक़ों में ही उड़ान भरेंगे और दूसरे स्थानों पर जाने से परहेज़ करेंगे. ये विमान पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों और भारत पर हमले के उद्देश्य से कश्मीरी चरमपंथियों के लिए पहाड़ों में स्थित प्रशिक्षण शिविरों से दूर रहेंगे.”

शर्त

पाकिस्तानी अधिकारियों ने साथ ही इस बात पर ज़ोर दिया कि हर हमले के लिए उनकी इजाज़त ज़रूरी होगी.

इस गुप्त समझौते पर तभी बात बन पाई जब सीआईए ने क़बायली सरदार नेक मोहम्मद को मारने पर सहमति जताई.

नेक मोहम्मद अफग़ान तालिबान के साथी थे और पाकिस्तान उन्हें अपना दुश्मन मानता था.

रिपोर्ट में एक क़िताब ‘द वे ऑफ़ द नाइफ़ः द सीआईए, ए सीक्रेट आर्मी, एंड ए वार एट द एंड्स ऑफ़ द अर्थ’ के हवाले से ये बात कही गई है.

सहमति

रिपोर्ट के अनुसार सीआईए के एक अधिकारी ने आईएसआई के तत्कालीन प्रमुख एहसान उल हक़ से मुलाक़ात की थी.

उस मुलाक़ात के दौरान सीआईए अधिकारी ने पेशकश की थी कि अगर अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी नेक मोहम्मद को मार देती है तो क्या पाकिस्तान अपने क़बायली इलाक़ों पर बिना रोकटोक ड्रोन हमलों की इज़ाजत देगा.

दोनों एजेंसियों के बीच इस बात पर भी सहमति बनी थी कि सीआईए कभी इस बात को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं करेगी कि वो पाकिस्तान में ड्रोन हमले कर रहा है और पाकिस्तान ख़ुद हमले की ज़िम्मेदारी लेगा या फिर चुप्पी साधे रहेगा.

प्रीडेटर

पाकिस्तानी अधिकारी पहले तो ड्रोन उड़ानों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानते रहे लेकिन नेक मोहम्मद की बढ़ती ताक़त के कारण उन्हें अपनी सोच बदलनी पड़ी और उन्होंने प्रीडेटर ड्रोन हमलों की अनुमति दे दी.

ड्रोन हमलों के लिए आईएसआई और सीआईए के बीच राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के ज़माने में समझौता हुआ था और बुश के उत्तराधिकारी बराक ओबामा ने भी इस नीति को आगे बढ़ाया.

इस समझौते के बाद सीआईए ने चरमपंथियों को पकड़ने के बजाए मारने की नीति अपनाई और शीत युद्ध के ज़माने में ख़ुफ़िया जानकारी जुटाने के लिए गठित हुई ये एजेंसी एक अर्द्धसैन्य संस्था में बदल गईं.