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डॉलर में 'ईश्वर' शब्द के खिलाफ़ हैं नास्तिक

 रविवार, 7 अप्रैल, 2013 को 22:44 IST तक के समाचार
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डॉलर में धार्मिक वाक्यांश का कई संस्थाओं ने विरोध किया है

अमरीका में नास्तिकों की एक संस्था अमरीकी वित्त विभाग के खिलाफ़ अदालत चली गई है. ये समूह अमरीकी क्लिक करें डॉलरों और सिक्कों में छापा गया अमरीका के राष्ट्रीय आदर्श वाक्य ''हम भगवान पर विश्वास करते हैं'' का विरोध कर रहे हैं.

फ्रीडम फ्रॉम रिलिजन फाउंडेशन नाम की इस संस्था ने अन्य 19 शिकायतकर्ताओं के साथ मिलकर केस दर्ज किया है.

इसमें कहा गया है कि ये वाक्यांश ना सिर्फ भेदभाव से भरा है बल्कि उन लोगों का भी अपमान करता जो धार्मिक नहीं है.

संस्था के मुताबिक ये वाक्य भेदभावपूर्ण होने के साथ-साथ ईश्वर की अवधारणा पर विश्वास कराने जैसा है.

साथ ही कहा गया है कि ये अमरीकी संविधान के उस संशोधन के भी विपरीत है जिसमें कहा गया है कि अमरीकी संसद ना तो किसी धर्म के प्रति विशेष आग्रह रखेगा ना ही किसी धर्म को स्थापित करने के लिए विशेष कदम उठाएगी.

ये गैरधार्मिक लोगों को देश निकाला देने जैसा है

"हमारी सरकार ने ना सिर्फ किसी एक धर्म को मानने से मना किया है बल्कि धार्मिकता की तुलना में धर्मनिरपेक्षता का समर्थन किया है. ऐसे में देश के मुद्रा पर एक ईश्वर प्रति आस्था जताना भी असंवैधानिक है"

दान बार्कर, सह अध्यक्ष , फ्रीडम फ्रॉम रिलिजन फाउंडेशन

फ्रीडम फ्रॉम रिलिजन के सहअध्यक्ष दान बार्कर के अनुसार, "हमारी सरकार न केवल एक धर्म की दूसरे धर्म पर श्रेष्ठता के खिलाफ़ है बल्कि वो धर्मनिरपेक्ष बनाम धार्मिक की लड़ाई में भी धर्मनिरपेक्षता का समर्थन करती है. राष्ट्रीय मुद्रा में एक अद्वैतवादी आदर्श को प्रदर्शित करना भी असंवैधानिक है."

बार्कर कहते हैं, ''हमारी सरकार ने ना सिर्फ किसी एक धर्म को मानने से मना किया है बल्कि धार्मिकता की तुलना में धर्मनिरपेक्षता का समर्थन किया है. ऐसे में देश की मुद्रा पर एक ईश्वर प्रति आस्था जताना भी असंवैधानिक है.''

कई लोगों के अनुसार अमरीकी मु्द्रा में छपा वाक्य "भगवान पर हमें विश्वास है" इसलिए भेदभावपूर्ण है क्योंकि इसमें नास्तिकों और उन लोगों को शामिल नहीं किया गया है जो भगवान या सिर्फ एक भगवान की अवधारणा में विश्वास नहीं रखते.

और क्योंकि इस वाक्यांश को राष्ट्रीय मुद्रा में प्रदर्शित किया गया है, तो ये गैरधार्मिक लोगों को देश निकाला देने जैसा है.

भेदभाव बर्दाश्त नहीं

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'भगवान में हमारा विश्वास' अमरीका का आदर्श वाक्य है

ख़ासकर तब जब इन क्लिक करें नोटों पर ये भी लिखा है कि यहूदियों, कैथोलिक महिलाओं, काले, लातिनी, एशियाई और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ़ किसी प्रकार का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

एक जाँच के बाद इस आवेदन में कहा गया है, "राष्ट्रीय मुद्रा में भगवान का नाम लेने का मकसद पूरी तरह से धार्मिक उद्देश्य की पूर्ति करना था."

फाउंडेशन के सदस्य माइक न्यूडाओ इस मुकदमे में कानूनी सलाहकार के तौर पर काम कर रहे हैं.

उन्होंने इसके समर्थन में वोट डालने वाले सदस्यों का हवाला देते हुए कहा कि कैसे इन लोगों पर पैसों का इस्तेमाल करके इनको फुसलाने की कोशिश की गई है.

लेकिन अमरीकी सांसद हर्मन एबरहार्टर के अनुसार, ''अमरीकी मुद्रा दुनिया के हर देश में घूमती है और अक्सर उन देशों में भी जाती है जहां शीतयुद्ध का भी असर रहा है. ऐसे में अगर हम अपने संस्कारों और सिद्धांतों को औरों तक पहुंचा सके तो ये काफी अच्छा रहेगा.''

'भगवान में हमारा विश्वास'

"अमरीकी मुद्रा दुनिया के हर देश में घूमती है और अक्सर उन देशों में भी जाती है जहां शीतयुद्ध का भी असर रहा है. ऐसे में अगर हम अपने संस्कारों और सिद्धांतों को औरों तक पहुंचा सके तो ये काफी अच्छा रहेगा"

हर्मन एबरहार्टर, अमरीकी सांसद

लेकिन ये पहली बार नहीं है जब अमरीका के राष्ट्रीय चिह्नों या आदर्श वाक्यों का इस तरह से इस्तेमाल किया जा रहा है.

माइक न्यूडाउन ने इससे पहले भी कई बार इसके खिलाफ़ मुकदमा दर्ज किया गया है.

साल 2011 में दायर किया गया एक केस सुप्रीम कोर्ट भी गया था.

'भगवान में हमारा विश्वास' इस वाक्यांश को साल 1956 में संयुक्त राज्य अमरीका के आधिकारिक आदर्श वाक्य के रूप में अपनाया गया था.

इससे पहले जो अनौपचारिक तौर पर ''कई से, एक'' को ये स्थान मिला हुआ था.

1864 के गृहयुद्ध के बाद से अमरीकीयों को हर मु्द्रा में छपा ये नारा पढ़ना पड़ा था. कुछ लोगों का मानना है कि अब इसका धार्मिक महत्व खत्म हो गया है तो कुछ इसे देशभक्ति का प्रतीक मानते हैं.

तो कुछ अन्य का मानना था कि ये पुराने समय की बात है और भेदभाव खत्म होना चाहिए.

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