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‘डरो मत यह अमन की फायरिंग है’

 बुधवार, 3 अप्रैल, 2013 को 11:10 IST तक के समाचार
मलाला यूसुफ़जई

जुमा, 13 फ़रवरी 2009: मौलाना फ़जलुल्लाह रोते रहे

आज मौसम बहुत अच्छा था. बहुत ज़्यादा बारिश हुई और जब बारिश होती है तो मेरा स्वात और भी ख़ूबसूरत लगता है. मगर सुबह जगते ही अम्मी ने बताया कि आज किसी ने रिक्शा ड्राइवर और बूढ़े चौकीदार को क़त्ल कर दिया है.

यहां अब ज़िंदगी बद से बदतर होती जा रही है. आस पास के इला़के से रोज़ाना सैकड़ों लोग मिंगोरा आ रहे हैं जबकि मिंगोरा के लोग दूसरे शहरों की तऱफ चले गए हैं.

जो अमीर हैं वो स्वात से बाहर गए हैं और जो गरीब हैं वो यहां से कहीं और जा नहीं सकते.

हमने अपने तायाज़ाद भाई को फ़ोन किया था कि वह इस अच्छे मौसम में अपनी गाड़ी में हमें मिंगोरा का चक्कर लगवाएं.

वह आया लेकिन जब हम बाहर निकले तो बाज़ार बंद था, सड़कें सुनसान थीं. हम कम्बर के इला़के की तऱफ जाना चाह रहे थे कि किसी ने बताया कि वहां पर एक बहुत बड़ा जुलूस निकला हुआ है.

रात को एफएम स्टेशन पर मौलाना फ़जलुल्लाह ने त़करीर की और वह देर तक रोते रहे. वह ऑपरेशन बंद होने का मुतालबा कर रहे थे. उन्होंने लोगों से कहा कि वह हिजरत न करें बल्कि अपने घरों में वापस आ जाएं.

इतवार, पन्द्रह फरवरी 2009: डरो मत यह अमन की फायरिंग है

मलाला यूसुफ़जई को तालिबान ने गोली मार दी थी, लेकिन वो बच गई

आज पेशावर और गांवों से मेहमान आए हुए थे. दोपहर को जब हम खाना खा रहे थे कि बाहर बहुत ज़्यादा फायरिंग शुरू हुई.

इतनी ज़बरदस्त फ़ायरिंग मैंने इससे पहले कभी नहीं सुनी थी. हम सब डर गए, सोचा कि शायद तालिबान आ गए हैं. मैं भाग कर अब्बू के पास गई. उन्होंने कहा, ‘डरो मत यह अमन की फायरिंग है.’

अब्बू ने बताया कि आज अ़खबार में आया है कि कल हुकूमत और तालिबान के दरम्यान स्वात के बारे में अमन मुहायदा हो रहा है. इसलिए लोग खुशी से फायरिंग कर रहे हैं.

तालिबान पर यकीन

लेकिन रात को जब तालिबान के एफएम पर भी अमन मुहायदा होने का एलान हुआ तो दोपहर से भी ज़्यादा ज़बरदस्त फायरिंग हुई, क्योंकि लोग हुकूमत से ज़्यादा तालिबान के एलान पर य़कीन करते हैं.

जब हमने भी यह एलान सुना तो पहले अम्मी रोने लगी फिर अब्बू, मेरे और दो छोटे भाइयों की आंखों से भी आंसू निकल गए.

आज मैं सुबह उठते ही बहुत ज़्यादा खुश थी क्योंकि हुकूमत और तालिबान के दरम्यान अमन मुहायदा जो हो रहा था. आज हेलीकॉप्टर की परवाज़ भी बहुत ज़्यादा नीचे थी.

मेरे एक कज़न ने कहा कि जैसे-जैसे अमन आ रहा है वैसे-वैसे हेलीकॉप्टर की परवाज़ भी नीचे हो रही है.

"अब्बू ने बताया कि आज अ़खबार में आया है कि कल हुकूमत और तालिबान के दरम्यान स्वात के बारे में अमन मुहायदा हो रहा है, इसलिए लोग खुशी से फायरिंग कर रहे हैं. लेकिन रात को जब तालिबान के एफएम पर भी अमन मुहायदा होने का एलान हुआ तो दोपहर से भी ज़्यादा ज़बरदस्त फायरिंग हुई, क्योंकि लोग हुकूमत से ज़्यादा तालिबान के एलान पर य़कीन करते हैं."

मलाला की डायरी का अंश

दोपहर को अमन मुहायदे की ख़बर सुनकर लोगों ने मिठाइयां बांटीं. मेरी एक सहेली ने मुझे मुबारकबाद का फ़ोन किया.

उसने कहा कि अब उसे घर से निकलने का मौ़का मिलेगा क्योंकि वह कई महीनों से एक ही कमरे में बंद रही है. हम दोनों इस बात पर भी बहुत खुश थे कि शायद अब लड़कियों के स्कूल दोबारा खुल जाएं.

मंगल, सत्रह फरवरी 2009: शहर की रौऩक दोबारा लौट आई है

आज से मैंने इम्तेहानात की तैयारियां दोबारा शुरू कर दी हैं क्योंकि अमन मुहायदे के बाद लड़कियों के स्कूल दोबारा खुलने की उम्मीद पैदा हो गई है.

आज मेरे ट्यूशन पढ़ाने वाली टीचर भी नहीं आई क्योंकि वह किसी मंगनी में शिरकत करने गई थीं.

मैं जब अपने कमरे में आई तो मेरे दो छोटे भाई आपस में खेल रहे थे. एक के पास खिलौने वाला हेलीकॉप्टर था और दूसरे ने का़गज़ से बंदूक बनाई हुई थी.

एक कह रहा था कि फायर करो दूसरा फिर कहता पोज़ीशन संभालो. मेरे एक भाई ने अब्बू से कहा कि ‘मैं एटम बम बनाऊंगा.’

आज स्वात में मौलाना सूफ़ी मुहम्मद भी आए हुए हैं. मीडिया वाले भी ज़्यादा तादाद में आए हैं. शहर में बहुत ज़्यादा रश है. बाज़ार की रौनक़ वापस लौट आई है.

ख़ुदा करे कि इस दफ़े मुहायदा कामयाब हो. मुझे तो बहुत ज़्यादा उम्मीद है लेकिन फिर भी अगर और कुछ नहीं हुआ तो कम अज़ कम लड़कियों के स्कूल तो खुल जाएंगे.

बुध, अठारह फरवरी 2009: सहा़फी के क़त्ल से अमन की उम्मीद टूट गई

आज मैं बाज़ार गई थी, वहां बहुत ज़्यादा रश था. लोग अमन मुहायदे पर बहुत ख़ुश थे. आज बहुत अरसे के बाद मैंने बाज़ार में ट्रै़फ़िक जाम देखा मगर रात को अब्बू ने बताया कि स्वात के एक सहा़फी को नामालूम अफ़राद ने क़त्ल कर दिया है.

अम्मी की तबीयत बहुत ख़राब हो गई. हम सब की अमन आने की उम्मीदें भी टूट गईं.

जुमेरात, उन्नीस फरवरी 2009: हम अब जंग की नहीं अमन की बातें करेंगे

आज अब्बू ने नाश्ता तैयार करके दिया क्योंकि अम्मी की तबीयत कल से ही ख़राब है. उन्होंने अब्बू से गुल्ला भी किया कि उन्हें सहा़फी की मौत की ख़बर क्यों सुनाई.

मैंने छोटे भाइयों को कहा कि हम अब जंग की नहीं अमन की बातें करेंगे. आज पता चला कि हमारी हेड मिस्ट्रेस ने एलान किया है कि गर्ल्स सेक्शन के इम्तेहानात मार्च के पहले हफ़्ते में होंगे.

मैंने भी आज से इम्तेहान की तैयारी मज़ीद तेज़ कर दी है.

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