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इतालवी नौसैनिक मर्ज़ी से भारत लौटे: इटली

 शनिवार, 30 मार्च, 2013 को 01:11 IST तक के समाचार

इतालवी नौसैनिकों को भारत भेजने के मुद्दे पर वहाँ के विदेश मंत्री इस्तीफ़ा दे चुके हैं

इटली के रक्षा मंत्री गियामपाओलो दि पाओला ने कहा है कि दो भारतीय मछुआरों को मारने के आरोप में मुकदमे का सामना कर रहे इतालवी नौसैनिक अपनी मर्जी से भारत लौटे हैं.

इतालवी नौसैनिक मसीमिलियानो लातोर और सालवाटोर गिरोन 22 मार्च को मुकदमे का सामना करने के लिए भारत वापस लौट आए थे. इससे पहले इटली की सरकार ने उन्हें वापस भेजने से इंकार कर दिया था.

उन्हें इस आश्वासन के बाद वहाँ के चुनाव में भाग लेने इटली भेजा गया था कि वह मतदान के बाद 22 मार्च से पहले वापस भारत लौट आएंगे.

कूटनीतिक विवाद

भारत के साथ इस मुद्दे पर हुए कूटनीतिक विवाद के बाद भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने इतालवी राजदूत के भारत छोड़ने पर रोक लगा दी थी.

नौसैनिकों को भारत भेजने के फैसले पर भी इटली की सरकार में एक राय नहीं थी. इस सप्ताह के शुरू में वहाँ के विदेश मंत्री जिऊलियो तर्ज़ी ने यह कहते हुए इस्तीफ़ा दे दिया था कि उनकी राय में नौसैनिकों को वापस भारत नहीं भेजा जाना चाहिए था और इस बारे में उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया.

दि पाओला ने तर्ज़ी की यह कह कर आलोचना की कि वह जहाज़ और नौसैनिकों को उनके हाल पर नहीं छोड़ेंगे. रक्षा मंत्री ने ये बातें नेपल्स में इटली की वायुसेना की 90वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह के दौरान कहीं.

आंसू

"इसमें कोई सच्चाई नहीं है कि इन नौसैनिकों को इस फैसले पर राज़ी कराने में पांच घंटे लग गए. वे लोग न सिर्फ आदेश का पालन कर रहे थे बल्कि उनमें कर्तव्य और ज़िम्मेदारी को पूरा करने की भावना भी थी. उन्होंने अपने दिए गए वादे को पूरा किया."

इतालवी रक्षा मंत्री

जब वह ये बातें कर रहे थे तो उनकी आवाज़ भर्रा गई और उनकी आंखें नम हो गईं. उन्होंने मीडिया में आने वाली उन ख़बरों का खंडन किया कि नौसैनिक मुकदमे का सामना करने के लिए भारत नहीं जाना चाहते थे.

उनका कहना था, "इसमें कोई सच्चाई नहीं है कि इन नौसैनिकों को इस फैसले पर राज़ी कराने में पांच घंटे लग गए. वे लोग न सिर्फ आदेश का पालन कर रहे थे बल्कि उनमें कर्तव्य और ज़िम्मेदारी को पूरा करने की भावना भी थी. उन्होंने अपने दिए गए वादे को पूरा किया."

इतालवी रक्षा मंत्री का कहना था कि उन्होंने अपने दुख के बावजूद अपनी वर्दी का सम्मान किया और अपनी और अपने परिवार की भावनाओं को कोई तरजीह नहीं दी.

इटली की सरकार ने ये आश्वासन मिलने के बाद कि इन्हें मृत्यु दंड नहीं दिया जाएगा, नौसैनिकों को वापस भारत लौटा दिया था.

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