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चीनी राष्ट्रपति से पहली बार मिलेंगे मनमोहन

 मंगलवार, 26 मार्च, 2013 को 02:46 IST तक के समाचार
मनमोहन सिंह

डरबन में शी जिनपिंग से मिलेंगे मनमोहन सिंह.

दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर में मंगलवार से हो रहे क्लिक करें ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री क्लिक करें मनमोहन सिंह पहली बार चीन के नए राष्ट्रपति क्लिक करें शी जिनपिंग से मिलेंगे.

ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका समेत पांच देशों के इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए मनमोहन सिंह सोमवार को डरबन पहुंच गए.

इस बार के सम्मेलन में ब्रिक्स देशों का अपना बैंक बनाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार के तौर तरीकों पर खास तौर से चर्चा होने की उम्मीद है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ गए शिष्टमंडल में वित्त मंत्री पी चिदंबरम, वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन भी शामिल हैं.

उम्मीदों का महाद्वीप

पूर्व विदेश सचिव आरएस कल्हा का कहना है कि भारत के लिए इस ब्रिक्स सम्मेलन की सबसे खास बात है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से चीन के नए राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात.

"भारत और चीन के बीच आपसी सहयोग भी है और कुछ समस्याएं भी हैं. समस्याओं में जहां सीमा विवाद और व्यापार असंतुलन का नाम लिया जा सकता है, वहीं जलवायु परिवर्तन और जी20 से जुड़े मुद्दों पर भारत और चीन की नीति लगभग एक ही है."

आरएस कल्हा, पूर्व विदेश सचिव

इस मुलाकात की अहमियत पर उन्होंने ने बीबीसी को बताया, “भारत और चीन के बीच आपसी सहयोग भी है और कुछ समस्याएं भी हैं. समस्याओं में जहां सीमा विवाद और व्यापार असंतुलन का नाम लिया जा सकता है, वहीं जलवायु परिवर्तन और जी20 से जुड़े मुद्दों पर भारत और चीन की नीति लगभग एक ही है.”

इसलिए दोनों नेताओं की ये मुलाकात खासी अहम मानी जा रही है.

ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका पहुंचने से पहले चीन के नए राष्ट्रपति शी ने तंजानिया का दौरा किया.

शी ने अफ्रीका को उम्मीद और वादे का महाद्वीप बताया. उन्होंने ये बात तंजानिया में कही. सत्ता संभालने के 11 दिन के भीतर ये उनका दूसरा विदेश दौरा है.

'बराबरी' पर जोर

शी जिनपिंग

शी जिनपिंग के इस अफ्रीकी दौरे को बहुत अहम माना जा रहा है

आर्थिक और राजनीतिक तौर पर तेजी से उभरता चीन हाल के वर्षों में अफ्रीका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार बन गया है और ये व्यापार ज्यादातर तेल समेत खनिज पदार्थों पर आधारित है.

रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने शी के हवाले से कहा है कि चीन सरकार न सिर्फ किसी अफ्रीकी देशों से कच्चे संसाधन हासिल करने में ही दिलचस्पी नहीं रखती है, बल्कि उनके साथ बराबर के संबंध चाहता है ताकि उस देश के विकास में मदद मिले.

उन्होंने कहा, "चीन को अफ्रीका के साथ बेहतर रिश्ते विकसित होने की उम्मीद है और हम अफ्रीका और अन्य देशों के बीच भी बेहतर संबंध देखना चाहते हैं. अफ्रीका अफ्रीकी लोगों का है. अन्य देशों के साथ रिश्ते बनाते वक्त अफ्रीका की गरिमा और स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए.”

आरएस कल्हा कहते हैं कि अफ्रीका के संसाधनों में हिस्सेदारी हासिल करने की होड़ में चीन भारत से कहीं आगे हैं. उनके अनुसार, “अफ्रीका के 20 प्रतिशत निर्यात चीन के लिए होते हैं. और चीन ने वहां काफी निवेश भी किया है.”

चीन पर अकसर अफ्रीकी देशों के प्राकृति संसाधनों पर कब्जा जमाने के आरोप लगते रहे हैं.

दक्षिण अफ्रीका के बाद शी कांगो ब्राजीविले के दौरे के साथ अपने अफ्रीकी यात्रा का समापन करेंगे.

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