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करोड़ों में बिक रहे हैं भारतीय पेंटर

 शुक्रवार, 22 मार्च, 2013 को 12:59 IST तक के समाचार

एक तरफ जहां पूरी दुनिया में मंदी के दौर की बात हो रही है वहीं कला के क्षेत्र में भारतीय कलाकारों की पेंटिंग्स निए नए रिकार्ड बना रही है.

जानी मानी एजेंसी सोथबीज़ ने जब पिछले दिनों अमाया कलेक्शन की नीलामी की तो इसमें भारतीय कलाकारों की पेंटिंग्स करोड़ों में बिकी है.

इस कलेक्शन ने करीब सत्तर लाख डॉलर का व्यवसाय किया है.

इसमें सबसे अधिक क़ीमत लगी वीएस गायतोंडे की अनाम पेंटिंग की जो बिकी नौ लाख 65 हज़ार डॉलर में.

जाने माने पेंटर सैय्यद हैदर रज़ा की पेंटिंग राजस्थान वन बिकी आठ लाख नौ हज़ार डॉलर में और एफ एन सूज़ा की द क्रूसिफिकेशन की बिकी पांच लाख सत्तावन हज़ार डॉलर में.

इसके अलावा मंजीत बावा की पेंटिंग ‘‘द ब्लैक देवी’’ भूपेन खक्खर की पेटिंग सतसंग भी काफी मंहगी बिकी है.

अमाया कलेक्शन में कुल 43 चित्र थे जो जानी मानी लेखक और कलेक्टर अमृता झवेरी के हैं. इनमें से 40 पेंटिंग बिकी हैं अपने अनुमानित कीमत से अधिक कीमत में.

सोथबीज़ की सेल्स हेड प्रियंका मैथ्यू का कहना था कि इस वर्ष बाज़ार में बहुत सारे नए खरीदार आए हैं और वर्तमान समय की पेंटिगों में उन्होंने काफी रुचि दिखाई है.

उत्तरी सांग वंश का एक कटोरा 1.19 अरब रुपये से ज्यादा कीमत में नीलाम हुआ

बारह करोड़ का कटोरा

सोचिए चीनी-मिट्टी से बने एक कटोरे की कीमत ज़्यादा से ज़्यादा कितनी हो सकती है? क्या इतनी ज़्यादा हो सकती है कि उसे खाना खाने या रखने के लिए इस्तेमाल करना तो दूर, आप शायद उसे तिजोरी में बंद कर के रखें?

अगर कटोरे की क़ीमत 20 लाख डॉलर से ज़्यादा हो तो शायद ऐसा ही हो.

न्यूयॉर्क में एक गैराज सेल में महज़ कुछ डॉलर में खरीदा गया चीन का एक दुर्लभ कटोरा 22 लाख डॉलर यानि लगभग 12 करोड़ रुपये में बिका.

उत्तरी सॉन्ग वंश का एक हज़ार साल पुराना डिंग कटोरा वर्ष 2007 में केवल तीन डॉलर में खरीदा गया था.

नीलामी करने वाली कंपनी सथबीज़ के मुताबिक ये कटोरा न्यूयॉर्क के एक परिवार में एक शेल्फ़ या आले में रखा गया था जिसे इसकी असली कीमत के बारे में कुछ पता नहीं था.

सथबीज़ में नीलामी के दौरान कड़ी होड़ के बाद इस कटोरे को लंदन के डीलर ज़ुज़पे एस्केनाज़ी ने खरीदा.

सथबीज़ ने पांच इंच व्यास के कटोरे की शुरुआत में कीमत अधिकतम तीन लाख डॉलर आंकी थी.

उम्मीद से कई गुना मिली कीमत

लेकिन दुनिया में पूर्वी या ओरिएन्टल कला के सबसे प्रमुख डीलरों में से एक माने जाने वाले ज़ुज़पे एस्केनाज़ी ने इसे आंकी गई क़ीमत से सात गुनी ज़्यादा कीमत देकर खरीदा.

सथबीज़ के मुताबिक इस डिंग कटोरे के लिए एस्केनाज़ी और तीन अन्य संग्रहकर्ताओं में 'लंबी' लड़ाई चली.

नीलामकर्ता कंपनी का कहना था कि ये कटोरा "सॉन्ग वंश के मिट्टी के बने बर्तनों का अनोखा और असाधरण रूप से ख़ूबसूरत नमूना है".

इसी आकार, आकृति और लगभग इसी तरह की सजावट वाला सिर्फ़ एक और ही कटोरा दुनिया में है और वो पिछले 60 साल से ज़्यादा समय से लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय के संग्रह का हिस्सा है. उस कटोरे को संग्रहालय को जाने-माने ब्रितानी संग्रहकर्ता हैनरी जे ऑपनहाइम ने वर्ष 1947 में दिया था.

सथबीज़ का कहना था कि सॉन्ग वंश के मिट्टी के बर्तनों की चीनी संग्रहकर्ताओं में तेज़ी से मांग बढ़ी है.

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