'ड्रोन हमले पाकिस्तानी सीमा का अतिक्रमण हैं'

  • 16 मार्च 2013
प्रिडेटर ड्रोन हवाईजहाज़
ड्रोन हमलों पर संयुक्त राष्ट्र की जांच इस वर्ष जनवरी में शुरु हुई थी और इसकी रिपोर्ट अक्तूबर में आने की उम्मीद है.

पाकिस्तान में अमरीकी ड्रोन हमलों की तहक़ीक़ात कर रहे संयुक्त राष्ट्र के एक दल ने कहा है कि इन हमलों में पाकिस्तान की रज़ामंदी नहीं है और ये पाकिस्तानी सीमा का अतिक्रमण है.

संयुक्त राष्ट्र टीम के प्रमुख बेन इमरसन ने ये बात पाकिस्तान में एक गुप्त दौरे के बाद कही.

लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तान के मौन समर्थन के बिना अमरीका ड्रोन हमले नहीं कर सकता है.

संवाददाताओं का ये भी कहना है कि निजी तौर पर बातचीत के दौरान दोंनो देश के अधिकारी मानते हैं कि ड्रोन हमलों के लिए दोनों देशों के बीच सहमति है.

'गुप्त सहमति लेकिन सार्वजनिक निंदा'

ऐसा अनुमान है कि वर्ष 2004 से 2013 के बीच अमरीकी खु़फ़िया विभाग, सीआईए, के ड्रोन हमलों में पाकिस्तान में लगभग 3460 लोग मारे गए हैं.

ब्यूरो ऑफ़ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज़्म के शोध के मुताबिक़ इनमें से लगभग 890 आम नागरिक थे और ज़्यादातर हमले राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में किए गए हैं.

तथाकथित अमरीकी ड्रोन हमलों के खिलाफ़ फरवरी 2012 में इस्लामाबाद में विरोध प्रदर्शन करते पाकिस्तानी नागरिक.

हालांकि पाकिस्तान में ड्रोन हमलों के बारे में अमरीका टिप्पणी नहीं करता है लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि कई सालों तक अमरीका को पाकिस्तान के अंदर स्थित हवाई अड्डों से ही ड्रोन हमले करने दिए गए.

निजी तौर पर अमरीकी अधिकारी कहते हैं कि दोंनो देशों के बीच रिश्तों की गर्माहट कम होने के बावजूद पाकिस्तान के साथ सहयोग पूरी तरह ख़त्म नहीं हुआ है और पाकिस्तानी सेना के मुख्य अधिकारी और राजनेता अब भी ड्रोन हमलों का समर्थन करते हैं.

वर्ष 2010 में विकीलीक्स द्वारा जारी दस्तावेज़ों से पता चलता है कि वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारियों ने अमरीकी राजनयिकों को गुप्त रुप से इन हमलों के लिए सहमति दी थी लेकिन साथ ही सार्वजनिक तौर पर उन अधिकारियों ने ड्रोन हमलों की निंदा की.

पाकिस्तान की रज़ामंदी नहीं

बेन इमरसन एक ब्रितानी वकील हैं और वे संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक हैं जो पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, यमन, फलस्तीनी क्षेत्रों और सोमालिया में 25 जगहों पर हुए हमलों की जांच कर रहे हैं.

शुक्रवार को बेन इमरसन ने कहा, "पाकिस्तान सरकार की स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है. पाकिस्तानी सरकार अपनी ज़मीन पर अमरीका द्वारा ड्रोन हवाई जहाज़ों के इस्तेमाल की इजाज़त नहीं देती और वो इसे पाकिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन मानती है. ड्रोन कार्यक्रम में दूसरे देश की ज़मीन पर उसकी इजाज़त के बिना बल का इस्तेमाल शामिल है."

बेन इमरसन ने ये भी कहा कि पाकिस्तान मानता है कि ड्रोन हमलों से चरमपंथियों की एक नई पीढ़ी पैदा हो रही है जबकि पाकिस्तान खुद ही देश के भीतर इस्लामी चरमपंथियों से निपटने में सक्षम है.

संयुक्त राष्ट्र टीम के प्रमुख ने ये भी कहा कि ड्रोन हमले तभी वैध माने जाते हैं जब वे संबंधित देश के साफ़ या प्रकट अनुरोध पर किए जाएं.

संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तान में ड्रोन हमले इसलिए विवादित हैं क्योंकि वो खुफ़िया तरीक़े से किए जाते हैं और क्योंकि इन हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिकों की मौत हुई है. लेकिन अमरीका इन आरोपों को ख़ारिज करता रहा है.

ड्रोन हमलों के बारे में संयुक्त राष्ट्र की जांच इस वर्ष जनवरी में शुरु हुई थी और इसकी रिपोर्ट अक्तूबर तक आने की उम्मीद है.