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अमरीका में भूखे सोने को मजबूर लाखों बच्चे

 गुरुवार, 7 मार्च, 2013 को 09:30 IST तक के समाचार
अमरीका

अमरीका में हर पांच में से एक बच्चा किसी खाद्य सहायता कर्यक्रम के चलते खाना खाता है.

दुनिया के कुल जीडीपी का करीब एक चौथाई अकेले अमरीका का है लेकिन यहाँ लाखों बच्चे भूख से बिलबिला रहे हैं और इनकी तादाद बढ़ रही है घट नहीं रही.

अमरीका में आज की तारीख में एक करोड़ सत्तर लाख ब क्लिक करें च्चे गरीबी की मार झेल रहे हैं. बहुत बड़ी तादाद में बच्चों के लिए भूख एक अनचाहे दोस्त की तरह रोज़ साथ रहने लगी है.

दस साल की केली हेवुड और उसके 12 साल के भाई टायलर दोनों के दिमाग में हमेशा अगले भोजन के बारे में विचार चलते रहते हैं और बहुत बार वो नहीं मिलता.

आयोवा के एक फ़ूड बैंक से केली की माँ केवल 15 चीज़ें खरीद सकती हैं. वो 15 चीज़ें कौन सी हों यह तय करना उनकी माँ या भाई बहनों के आसान नहीं है.

हर दिन संकट

खाने की ज़रूरी चीज़ों के बाद ऐसी दो चार ही चीज़ें हैं जो बच्चों की पसंद से ली जा सकती हैं. ऐपल सॉस लिया जाएगा, डिब्बाबंद स्पेगेटी भी होगी, मीट बॉल हो सकती है.

जिस कमरे में वो रहते हैं वहां ऐसी कोई जगह नहीं है जहाँ खाना पकाया जा सके.

अमूमन यह होता है कि केली के परिवार के पास पर्याप्त खाना खरीदने के लिए पैसे नहीं होते.

केली बताती हैं, "हम दिन में क्लिक करें तीन बार नहीं खाते. मतलब नाश्ता, दोपहर का खाना और रात का खाना. जब मुझे भूख लगती हैं तो मैं दुखी होती हूँ और कुछ करने का मन नहीं करता."

केली और उसका भाई टायलर अपनी माँ बारबरा के साथ रहते हैं. बारबरा किसी फैक्ट्री में काम किया करती थीं. उनकी नौकरी चली गई जिसके बाद उन्हें बेरोज़गारी भत्ते के रूप में 1480 डॉलर मिलते हैं.

"जब मैं टीवी पर कहीं फ़ूड शो देखता हूँ तो मुझे लगता है कि मैं टीवी में घुस जाऊं और सारा खाना खा लूं"

टायलर

एक नज़र में देखने में यह पैसा ज़्यादा लग सकता है लेकिन इतने पैसों में अमरीका में गुज़ारा चलाना बेहद मुश्किल है.

वो खुद के मकान में रह नहीं सकते क्योंकि वहां रहने का खर्च 1326 डॉलर महीना है. उसे देने के बाद इनके पास खाना खरीदने के लिए कुछ नहीं बचेगा.

बच्चों की मजदूरी

केली ने परिवार की मदद के लिए रेलवे ट्रैक के आस-पास खाली डिब्बे बीनने शुरू कर दिए हैं. एक डिब्बे की कीमत दो से पांच सेंट मिल जाती है.

टायलर यहाँ-वहाँ लोगों के बगीचों की घास काट देता है जिसमें से "हर घर में से जो चार डॉलर मिलते हैं वो मैं अपनी माँ को दे देता हूँ ताकि कुछ खाना खरीदा जा सके."

दुकान की जगह केली के कपड़े पुराने कपड़ों की एक दुकान से आते हैं जहाँ पर उसे हिदायत है कि वो ऐसे किसी कपड़े की ना सोचे जिसकी कीमत दो डॉलर हो.

अच्छे दिनों में परिवार के पास दो कुत्ते थे जिनमें से एक को दान दे दिया गया ताकि कुछ खाना बचे.

जिस जगह वो रहते हैं उसका किराया करीब 700 डॉलर महीना है, पर इस जगह रहने के बाद परिवार के बजट को चलाना बेहद मुश्किल है.

टायलर बताता है, "जब मैं टीवी पर कहीं फ़ूड शो देखता हूँ तो मुझे लगता है कि मैं टीवी में घुस जाऊं और सारा खाना खा लूं."

अमरीका में ऐसे चार करोड़ सत्तर लाख परिवार हैं जो खाने के लिए फ़ूड बैंकों पर आश्रित हैं. हर पांच में से एक बच्चा किसी खाद्य सहायता कार्यक्रम के चलते खाना खाता है.

ख़राब होते हालात

जिस इलाके में केली और टायलर रहते हैं वहां के नज़दीकी फ़ूड बैंक वाले बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों से वहां सहायता लेने वाले परिवारों की संख्या में इजाफा हुआ है.

इस फ़ूड बैंक में पिछले तीस साल से काम कर रही कारेन लॉगलिन कहती हैं, "हालात तेज़ी से बदले हैं ख़ास तौर पर वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद. हमारे यहाँ आने वाले लोगों में कम से कम 30 से 40 फ़ीसदी इज़ाफा हुआ है."

"मैं स्कूल जाना चाहती हूँ क्योंकी अगर पढ़ाई अच्छी नहीं होगी तो अच्छी नौकरी नहीं मिलेगी अच्छा पैसा नहीं मिलेगा. अच्छा पैसा नहीं मिला तो मैं अपने घरवालों पर ही आश्रित रह जाउंगी"

कैली

कारेन लॉगलिन बताती हैं, "ऐसा नहीं कि हर आदमी बेरोजगार हो गया हो लेकिन नौकरी जाने के बाद उन्हें जो रोज़गार मिल रहा है उसमें इतने कम पैसे मिल रहे हैं कि आप अपने परिवार को नहीं पाल सकते."

यूं तो अमरीकी स्कूलों में खाना मिलता है लेकिन केली और टायलर स्कूल नहीं जा सकते क्योंकि वो पिछले कुछ ही समय में तीन मकान बदल चुके हैं और जहाँ वो अभी रह रहे हैं वहां भी वो कितने दिन तक और रहेंगे पता नहीं.

इन बच्चों के पिता नहीं हैं और इनकी नानी पास ही रहती हैं और जो भी थोड़ी बहुत मदद वो कर सकती हैं वो करती हैं.

केली की माँ का मानसिक अवसाद के लिए इलाज भी चल रहा है .

सरकारी कदम

फ़रवरी में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा था कि वो न्यूनतम मज़दूरी को बढ़ाकर कम से कम नौ अमरीकी डॉलर प्रति घंटा कर देंगे.

उनका कहना था, "इस एक कदम से लाखों कामकाजी परिवारों के हालात सुधर जाएंगे. वो खाना खरीद पाएंगे अपने घरों से निकाले नहीं जाएंगे और आखिरकार तरक्की करेंगे."

आंकड़ों के मुताबिक़ करीब एक करोड़ सत्तर लाख अमरीकी बच्चे ऐसे हैं जिन्हें खाना तो मिल रहा है लेकिन वो स्वास्थ्यप्रद नहीं है. उनके परिवार ताज़ा खाना नहीं खरीद सकते सो वो पित्ज़ा या ऐसी ही कुछ चीज़ें खरीदते हैं जो आगे चल कर उन्हें मोटा कर देती हैं.

इस तरह की समस्या से निपटने के लिए कुछ ऐसे स्कूल ने जहाँ गरीब बच्चे पढ़ने आते हैं उन्होंने शुक्रवार को बच्चों को शनिवार और रविवार के लिए खाना बाँध कर देना शुरू कर दिया है.

इस सबके बीच केली पूरी शिद्दत से स्कूल वापस जाना चाहती है. केली कहती हैं, " मैं स्कूल जाना चाहती हूँ क्योंकि अगर पढ़ाई अच्छी नहीं होगी तो अच्छी नौकरी नहीं मिलेगी अच्छा पैसा नहीं मिलेगा. अच्छा पैसा नहीं मिला तो मैं अपने घरवालों पर ही आश्रित रह जाउंगी."

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