पोप के इस्तीफ़े से जुड़ी दस बातें

  • 27 फरवरी 2013
पोप बेनेडिक्ट 16 वें
पोप के इस्तीफे ने वैटिकन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

छह सौ वर्षों में पहली बार किसी पोप ने अपना पद छोड़ा है. उनके कार्यकाल में कैथोलिक चर्च को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.

लेकिन पद छोड़ देने के बाद बेनेडिक्ट 16वें की जिंदगी कितनी बदलेगी, बीबीसी न्यूज़ के माइकल हर्स्ट ने ऐसे ही दस सवालों और उनके जवाबों की पड़ताल की है.

नाम और उपनाम

वैटिकन ने कहा है कि पोप बेनेडिक्ट 16वें पोप ‘एमिरट्स’ (ससम्मान अवकाश प्राप्त) या ‘रोमन पॉन्टिफ एमिरट्स’ कहे जाएंगे.

वह अपने पुराने नाम योसेफ रात्सिंगर की बजाय अपने ओहदे से जुड़े नाम ‘पोप बेनेडिक्ट 16वें’ से ही जाने जाएंगे.

उन्हें ‘ योर होलीनेस’ कह कर ही पुकारा जाएगा.

ठीक वैसे ही जैसे अमरीकी राष्ट्रपति कार्यकाल खत्म होने के बाद भी ‘राष्ट्रपति’ कह कर ही संबोधित किए जाते हैं.

नया घर

मैटर एक्लेसिया
मैटर एक्लेसिया- बेनेडिक्ट 16 वें का नया घर.

पद छोड़ने के बाद बेनेडिक्ट 16वें वैटिकन से हेलिकॉप्टर से विदा हो गए.

लेकिन तीन महीने बाद वे वापस अपने नए घर में लौटेंगे.

वैटिकन के दक्षिण पश्चिमी छोर पर स्थित एक कॉन्वेंट को बेनेडिक्ट 16 वें का नया घर बनाया गया है.

तब तक बेनेडिक्ट 16वें रोम के दक्षिण में स्थित पोप निवास में ही रहेंगे.

पोप का पहनावा

पोप बेनेडिक्ट 16 वें
पोप अब इन लाल जूतों की जगह भूरे रंग के जूते पहनेंगे.

बेनेडिक्ट 16वें साधारण पादरियों की भांति काले रंग या कार्डिनल के लाल रंग वाले लिबास की जगह पोप के परंपरागत सफेद रंग का लिबास पहनते रहेंगे.

कहा जा रहा है कि वे ज्यादातर इस्तेमाल में आने वाले अपने लाल रंग जूते पहनना छोड़ देंगे और इसकी जगह पर वे हाथ से बने भूरे रंग के जूते पहनेंगे.

पोप पिछले साल जब मैक्सिको के दौरे पर गए थे तो वहां के दस्तकारों ने उनके लिए ये जूते बनाए थे.

उनकी अंगूठी

पोप बेनेडिक्ट 16 वें, सोने की अंगूठी
पोप की सोने की अंगूठी को चांदी के हथौड़े से नष्ट किया जाना है.

पोप की सोने की अंगूठी जिसे ‘मछुआरे की अंगूठी’ भी कहा जाता है, उसे खास तौर पर चांदी से बने एक हथौड़े से तोड़ दिया गया.

वैटिकन ने कहा है कि परंपराओं में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा. सेंट पीटर्स के मंत्रालय से जुड़ी चीजों को नष्ट किया जाना ही होगा.

बेनेडिक्ट 16 वें की निजी मुहर भी नष्ट की जाने वाली चीजों में शामिल है.

पोप के कर्तव्य

बेनेडिक्ट 16वें के पास अब कोई प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं रहेगी.

अपना उत्तराधिकारी चुनने के लिए होने वाली बैठकों में भी वे शिरकत नहीं कर सकेंगे.

इन बैठकों में 80 साल से ज्यादा का कोई कार्डीनल भी शामिल नहीं हो सकेगा.

हालांकि ऐसी बैठकों में शामिल होने वाले 115 लोगों में से 67 की नियुक्ति बेनेडिक्ट 16वें ने ही की थी इसलिए उनके असर से इनकार नहीं किया जा सकता.

सेवानिवृत्ति के बाद का जीवन

पोप बेनेडिक्ट 16 वें, बिल्ली कंटेसिना
पोप की प्यारी बिल्ली कंटेसिना

इस्तीफे की घोषणा के बाद पोप ने कहा था कि वह अपना वक्त चर्च के लिए प्रार्थना में गुजारेंगे.

उनके बड़े भाई मॉन्सिग्नॉर जॉर्ज रात्सिंगर ने भी यह कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो बेनेडिक्ट अपने उत्तराधिकारी को सलाह देकर खुश ही होंगे.

लिखना और पढ़ना भी उनके एजेंडे मे शुमार होगा. साल 2005 में जब वे पोप बने थे तो उनकी लाइब्रेरी में दो लाख किताबें थीं.

पियानो बजाना और पुरानी ब्लैक एंड व्हॉइट कॉमेडी फिल्में उन्हें खास तौर पर पसंद हैं. बेनेडिक्ट को बिल्लियों से भी लगाव है.

सोशल मीडिया

पोप बेनेडिक्ट 16 वें, सोशल मीडिया, ट्विटर
पोप का ट्विटर एकाउंट निष्क्रिय कर दिया जाएगा.

पोप का ट्विटर एकाउंट और उसके आठ भाषाई संस्करण बेनेडिक्ट 16वें के त्यागपत्र के बाद निष्क्रिय कर दिया गया है.

बुधवार को अपने अंतिम भाषण के बाद उन्होंने ट्विटर पर अपने 15 लाख अनुयायियों को अलविदा कह दिया.

सुनहरी छतरी

कहा जा रहा है कि बेनेडिक्ट 16वें को वे तमाम स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहेंगी जिसके बतौर बिशॉप वे हकदार होंगे.

संभव है कि फिलहाल उनके स्वास्थ्य की देख-भाल कर रहे डॉक्टरों और जर्मन नन्स की सुविधा भी उन्हें मिलती रहेगी.

चूंकि छह सौ सालों में पहली बार कोई पोप सेवानिवृत्त हो हुआ है इसलिए पोप के पेंशन जैसी कोई योजना अस्तित्व में नहीं है.

इसमें कोई शक नहीं है कि रोम अपने पोप एमिरट्स का ख्याल रखता रहेगा.

पोप का पी.ए.

पोप बेनेडिक्ट 16 वें, निजी सचिव आर्चबिशप जॉर्ज गैंग्सवीन
पोप अपने निजी सचिव जॉर्ज गैंग्सवीन के साथ.

बेनेडिक्ट 16वें के निजी सचिव जॉर्ज गैग्सवीन अपने पद पर बरकरार रहेंगे.

हमने उन्हें पोप की लगभग हर तस्वीर की पृष्ठभूमि में मुस्कुराते चेहरे के साथ देखा है.

पोप के निवास की देख-रेख की जिम्मेदारी भी उनके ही जिम्मे होगी. वे एक साथ दो स्वामियों के सेवक बने रहेंगे.

पोप गलत नहीं हो सकते

ऐसा माना जाता है कि पोप गलतियां नहीं कर सकते. वे जो कहते हैं या करते हैं, गलत नहीं हो सकता.

बेनेडिक्ट 16वें ने अपने इस विशेषाधिकार का कभी इस्तेमाल नहीं किया.

यह भी सच है कि साल 1870 के बाद से केवल एक बार ही किसी पोप ने अपने इस विशेषाधिकार का इस्तेमाल किया था.

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