चीन पर लगे साइबर सेंधमारी के आरोप

  • 19 फरवरी 2013
हैकिंग, शंघाई
शंघाई की इस इमारत को हैकिंग का केंद्र बताया जा रहा है.

चीनी सेना की एक खुफिया शाखा के बारे में कहा जा रहा है कि यह दुनिया के सबसे सफल साइबर हमलावर गुटों में से एक है. साइबर सुरक्षा से जुड़ी अमरीकी फर्म मैनडियांट के मुताबिक ‘युनिट 61398’ के बारे में यह माना जाता है कि इस संगठन ने दुनिया भर के कम से कम 141 संगठनों के सैंकड़ों टेराबाइट आंकड़ें बड़े ही करीने से उड़ाए हैं.

मैनडियांट ने इस साइबर सेंधमारी की जड़ें शंघाई की एक गुमनाम-सी इमारत में खोजी हैं. फर्म के मुताबिक इस इमारत का इस्तेमाल चीनी सेना की ‘युनिट 61398’ करती है.

हालांकि चीन ने हैकिंग के आरोपों से इनकार किया है और मैनडियांट की रपट की वैधता पर सवाल उठाया है.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हॉन्ग लेई ने कहा,“साइबर सेंधमारी अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है और हैकिंग के पीछे अनजान लोग होते हैं.”

संदिग्ध इमारत

उन्होंने कहा,“हैंकिंग के पीछे शामिल लोगों की पहचान करना बेहद मुश्किल है. हम नहीं जानते कि इस तथाकथित रपट में दिए गए सबूत कितने तर्कसंगत हैं.”

हॉन्ग ने कहा कि बीजिंग ने हैकिंग का स्पष्ट तौर पर विरोध किया है और इसे रोकने के लिए कदम भी उठाए गए हैं. चीन खुद भी साइबर हमलों का शिकार होता रहा है.

शंघाई के इस इमारत की सैन्य संवेदनशीलता को इस बात से समझा जा सकता है कि बीबीसी संवाददाता जॉन सुडवर्थ जब अपनी कैमरा टीम के साथ वहां पहुंचे तो सैनिकों ने थोड़ी देर के लिए उन्हें हिरासत में ले लिया था.

जॉन सुडवर्थ और उनकी टीम को वहां से तभी जाने दिया गया जब उन्होंने रिकॉर्ड किए गए वीडियो फुटेज चीनी सैनिकों को वापस कर दिए.

मैनडियांट की रिपोर्ट

हैकिंग
हैकिंग की समस्या का सामना दुनिया भर के देश कर रहे हैं.

हालांकि मैनडियांट का कहना है कि उन्होंने साल 2004 के बाद से हुई साइबर सेंधमारी की सैकड़ों घटनाओं की जांच की थी और पाया कि इन हरकतों के तार चीन से जुड़े हुए हैं और चीनी सरकार को इनके बारे में पता है.

हैकिंग हमलावरों में सबसे प्रमुख है ‘एपीटी1’ और इसके बारे में मैनडियांट मानती है कि साइबर सेंधमारों का यह एकमात्र संगठन है जो अपनी गतिविधियां कम से कम साल 2006 से जारी रखे हुए है.

तरह तरह के संगठन ‘एपीटी1’ के हैकिंग हमलों का शिकार हुए हैं.

मैनडियांट कहती है,“हमें यकीन है कि ‘एपीटी1’ इतने लंबे समय तक अपने साइबर हमले जारी रखने में इसलिए सक्षम हुआ है क्योंकि इसे सरकार की सीधी मदद हासिल है.”

सक्रिय संगठन

फर्म के मुताबिक ‘एपीटी1’ की हैकिंग हरकतों के सुराग शंघाई के पुडोंग इलाके की एक 12 मंजिला इमारत में मिले. रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की ‘युनिट 61398’ भी इसी इलाके से काम कर रही है.

मैनडियांट की रपट में ‘एपीटी1’ के बारे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. इसके लिए अच्छी अंग्रेजी और कंप्यूटर सुरक्षा व नेटवर्किंग तकनीक की जानकारी वाले सैंकड़ों या संभवतः हज़ारों लोग काम करते हैं.

‘एपीटी1’ ने दुनिया के 20 उद्योगों की 141 कंपनियों के आंकड़े चुराए हैं जिनमें 87 फ़ीसदी अंग्रेजी में काम करते हैं.

हैकिंग के बाद अपने शिकार के नेटवर्क में ‘एपीटी1’ ने अपनी घुसपैठ औसतन 356 दिनों तक कायम रखी और सबसे ज्यादा 1,764 दिनों तक.

‘एपीटी1’ ने जिन उद्योगों को अपना निशाना बनाया वे चीन के आर्थिक विकास के लिए उसकी पंचवर्षीय योजना में रणनीतिक तौर पर अहम हैं.

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